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जन्माष्टमी के दिन करें इनमें से किसी भी एक मंदिर के दर्शन, जाग जाएगा सोया हुआ भाग्य

By Tanvi Sharma

Aug, 29 2018 06:24:33 (IST)

जन्माष्टमी के दिन करें इनमें से किसी भी एक मंदिर के दर्शन, जाग जाएगा सोया हुआ भाग्य

जन्माष्टमी के दिन करें इनमें से किसी भी एक मंदिर के दर्शन, जाग जाएगा सोया हुआ भाग्य

हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्यौहारों में से एक जन्माष्टमी है। जन्माष्टमी भादो माह की कृष्ण अष्टमी को मानाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के 8वें अवतार श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। इस साल यह पावन पर्व 2 सितंबर को मनाया जाएगा। जन्माष्टमी की धूम व तैयारियां लगभग पूरे देश में शुरु हो चुकी है। जन्माष्टमी को भारत देश के लगभग हर राज्य में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। लेकिन इसकी असल रौनक भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमी पर देखने को मिलती है। भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमी मथुरा-वृंदावन में इस पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिलता है। वहीं देश के प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों में कई दिनों पहले से तैयारिया जोरों से शुरु हो जाती है। जन्माष्टमी पर यदि कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं और पर्व की असल रौनक देखना चाहते हैं तो आप इस प्रमुख मंदिरों के दर्शन कर सकते हैँ। आइए आपको देशभर के कुछ ऐसे प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बताते हैं जहां जन्माष्टमी पर्व बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है....

1. उडुपी कृष्ण मंदिर (मैसूर)

उडुपी में कृष्ण मंदिर दक्षिण भारत में प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। हजारों श्रद्धालु भगवान कृष्ण की एक झलक पाने के लिए मंदिर की यात्रा करते हैं। इस मंदिर की विशेषता यह है कि, भगवान कृष्ण की मूर्ति एक खिड़की में नौ छेदों से दिखाई देती है। माना जाता है कि, नौ छेद से प्रभु को देखना समृद्धि लाता है। भगवान कृष्ण की मूर्ति पर सजावट अति सुंदर है। कभी कभी यह सुनहरे जवाहरातों के साथ और अगले दिन हीरे के कवच के साथ सजाया जाता है। मंदिर का इतिहास 1500 से अधिक वर्षों का है, जो इसे भारत के इस हिस्से में प्राचीन मंदिरों में से एक भी बनाता है। वैभव के साथ इस मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। इस पर्व पर मंदिर की सुंदरता देखने लायक होती है।

2. द्वारकाधीश मंदिर (गुजरात)

यह है गुजरात स्‍थ‌ित द्वारिकाधीश मंद‌िर। मथुरा छोड़कर श्री कृष्‍ण ने यहां अपनी नगरी बसाई थी। सागर तट पर बना यह मंद‌िर द्वारिकाधीश श्रीकृष्‍ण का राजमहल माना जाता है। आज यह स्‍थान व‌िष्‍णु भक्तों के ल‌िए मोक्ष का द्वार माना जाता है। आसमान को छूता मंद‌िर का ध्वज श्री कृष्‍ण की व‌िशालता को दर्शाता है। द्वारकाधीश मंदिर आम जनता के लिए सुबह 7 बजे से रात 9:30 बजे तक खुला रहता है। यह दोपहर 12:30 से शाम 5 बजे तक बंद रहता है। वहीं जन्माष्टमी के दिन भगवान के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है। यहां जन्माष्टमी पर श्री कृष्ण का श्रृंगार और मंदिर की सजावट काफी अद्भुत व सुंदर होती है।

 

3. राधा रमण मंदिर (मथुरा)

जन्माष्टमी के मौके पर अगर आप मथुरा जा रहे हैं तो राधा रमण मंदिर के दर्शन करने जरूर जाएं। भव्य और प्राचीन इस मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है। इस मंदिर का निर्माण 1542 में किया गया था। इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी शालिग्रान के रूप में स्थापित हैं। इस मंदिर में जन्माष्टमी के दिन काफी भीड़ होती है। आरती से लेकर जन्मोत्सव तक सारे कार्यक्रम यहां बहुत भव्य तरीके से किए जाते हैं।

4. श्री कृष्णजन्म भूमि मंदिर (मथुरा)

श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में हुआ था। मथुरा में इसी जगह पर भगवान कृष्ण के सबसे प्राचीन मंदिर का निर्माण करवाया गया है जिसे श्रीकृष्णजन्मभूमि मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर मथुरा के बिल्कुल बीचोबीच स्थित है। बताया जाता है कि यहां पहला मंदिर 80-57 ईसा पूर्व बनाया गया था। इस विषय पर महाक्षत्रप सौदास के समय में मिले एक शिलालेख से ज्ञात होता है कि किसी वसु नामक व्यक्ति ने यह मंदिर बनाया था। जबकि दूसरा मंदिर सन् 800 में विक्रमादित्य के काल में बनाया गया था। वर्तमान समय में महामना पंडित मदनमोहन मालवीय की प्रेरणा से यह एक भव्य और आकर्षण मन्दिर के रूप में स्थापित है। इस मंदिर का असल रंग जन्माष्टमि पर देखने को मिलता है। जगह-जगह भोग, प्रसाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम आपका मन मोह लेंगे।

 

5. बांके बिहारी मंदिर (वृंदावन)

वृंदावन में एक मंदिर और है जो भगवान के सुन्दर रूप को दर्शाने के साथ देश-विदेश सभी जगह बेहद फेमस है। कहा जाता है की इस मंदिर के बिना वृंदावन की यात्रा अधूरी रह जाती है। जब भी आप वृंदावन जाएं तो बांके बिहारी मंदिर के दर्शन जरुर कर लें। यहां होने वाले अलग-अलग तरह के श्रृंगार की वजह देश-विदेश से कई भक्त दर्शन करने आते हैं। जन्माष्टमी के एक सप्ताह पहले से ही मंदिर में तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो जाती है।

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