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इस बार स्थिर योग में विराजेंगे विघ्नहर्ता

By Dinesh O.Bhardwaj

Sep, 12 2018 09:52:20 (IST)

गणेश चतुर्थी

सूरत. दस दिवसीय गणपति महोत्सव की धूमधाम शहर में जमने लगी है। शहरभर में जगह-जगह निर्मित पंडालों में विराजमान करने के लिए गणपति की प्रतिमाएं बाजे-गाजे के साथ ले जाते लोग बुधवार को रात में देर तक दिखे। वहीं, गुरुवार को गणेश चतुर्थी के मौके पर ज्यादातर पंडाल में स्थिर योग में प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी।
ज्योतिषी हरीश जोशी के मुताबिक पुराणों के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के मध्याह्न काल में भगवान गणपति का जन्म माना गया है। गतवर्ष गणपति स्थापना रवि योग में की गई थी और इस बार मंगलमूर्ति विघ्नविनायक गणराज की स्थापना स्थिर योग में की जाएगी। स्थिर योग गुरुवार को सुबह 6 बजकर 26 मिनट से दोपहर 2 बजकर 54 मिनट तक रहेगा और इस दौरान गणपति प्रतिमा की स्थापना करना शास्त्रसम्मत है। स्थिर योग के अलावा गणपति स्थापना गुरुवार सुबह 6 बजकर 27 मिनट से 7 बजकर 58 मिनट तक शुभ चौघडिय़ा है। सुबह 10 बजकर 52 मिनट से दोपहर 1 बजकर 32 मिनट तक चल-लाभ का चौघडिय़ा रहेगा एवं शाम 5 बजकर 2 मिनट से 6 बजकर 43 मिनट तक शुभ चौघडिय़ा रहेगा। शुभ व चल-लाभ के चौघडिय़े में श्रद्धालु गणपति प्रतिमा की स्थापना विधिविधान से गुरुवार को कर सकेंगे। हालांकि इस अवधि के बीच दोपहर डेढ़ बजे से तीन बजे तक राहुकाल रहेगा और इसमें श्रद्धालु गणपति प्रतिमा की स्थापना टालेंगे।
ज्योतिषी मुकेश पारीक ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि बुधवार शाम 4 बजकर 8 मिनट से गुरुवार दोपहर 2 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। ज्योतिष मत में गणेश चतुर्थी के मध्याह्न समय में गणेश पूजा के लिये सबसे श्रेष्ठ समय है। शहर में ज्यादातर पंडाल, सोसायटी-अपार्टमेंट में इसी अवधि में गणपति की स्थापना की जाएगी।


नई कार्यकारिणी का गठन


सीरवी समाज के दो दिवसीय 31वें वार्षिक सम्मेलन व भादी बीज महोत्सव के समापन मौके पर शाम को नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें अध्यक्ष हेमाराम पंवार, उपाध्यक्ष मालाराम वर्फा, सचिव भंवरलाल भायल, सहसचिव वीरमराम सोलंकी, कोषाध्यक्ष हेमराज मूलेवा, सहकोषाध्यक्ष लुंबाराम सोलंकी के अलावा कार्यकारिणी के शेष पदाधिकारी व सदस्य पुराने ही शामिल किए गए है। वहीं, मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी पेमाराम सोयल को सौंपी गई। इस अवसर पर आयोजित भजन संध्या में गायक कलाकारों ने रात देर तक भजनों की प्रस्तुति दी।