RAJASTHAN NIKAY CHUNAV: राजस्थान के निकाय चुनाव का सूरत कपड़ा मंडी में असर

|

Updated: 15 Jan 2021, 06:39 PM IST

पार्षद व चेयरमैन पद के दावेदार काटने लगे हैं सूरत के चक्कर, वार्डों के कई मतदाता बसे है यहां

सूरत. राजस्थान की प्रत्येक गतिविधि का सीधा और स्पष्ट असर तत्काल प्रभाव से गुजरात की औद्योगिक राजधानी सूरत नगरी में भी देखने को मिल जाता है। राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव हो रहे हैं और उसके लिए रणनीति, गोष्ठी सूरत कपड़ा मंडी के व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर होने लगी है।
पिछले वर्ष राजस्थान में कोरोना महामारी के बीच सालभर चुनावी माहौल बना रहा और इसकी शुरुआत जनवरी-फरवरी में पंचायत चुनाव से हुई थी। चार चरण में आयोजित पंचायत चुनाव के कोरोना महामारी की वजह से दो चरण ही सम्पन्न हो पाए और शेष चरण सितम्बर-अक्टूबर में सम्पन्न किए गए। प्रदेश में चुनाव का सिलसिला यहीं पर नहीं थमा बल्कि इसके बाद तहसील पंचायत व जिला पंचायत के चुनाव नवम्बर-दिसम्बर में आयोजित हुए और इसी अवधि में 35 नगरपालिका व 7 नगर परिषद के निकाय चुनाव भी सम्पन्न करवाए गए। चुनावी सिलसिला राजस्थान प्रदेश में कुछ दिन रुककर फिर प्रारम्भ हो गया और इस बार 28 जनवरी को प्रदेश के विभिन्न जिलों की 90 नगरपालिका के चुनाव होंगे। राजस्थान की प्रत्येक चुनावी गतिविधि में सूरत में बसे प्रवासी राजस्थानियों की हर तरीके से सक्रियता रहती है और यहां से बसें भर-भरकर लोग मतदान के लिए वहां पहुंचते हैं। अब जब 90 नगरपालिका के चुनाव घोषित हो गए हैं तो उसके लिए भी सूरत के प्रवासी राजस्थानियों के एपिक सेंटर सूरत कपड़ा मंडी में चुनाव के चटखारे गूंजने लगे हैं और पार्षद-चेयरमैन पद के दावेदार यहां आकर प्रवासी राजस्थानियों को पीले चावल देने लगे हैं।

-यह आपसी लगाव का ही परिणाम

शुक्रवार को रिंगरोड कपड़ा बाजार में मोटी बेगमवाड़ी के शंकर टैक्सटाइल मार्केट प्रांगण में राजस्थान की नोखा नगरपालिका के प्रत्याशी के आगमन पर प्रवासियों ने आपस में चर्चा की। इस संबंध में कपड़ा व्यापारी जगदीश कोठारी ने बताया कि कर्मभूमि में बसे प्रवासी राजस्थानियों के लगाव का ही परिणाम है कि वहां से प्रत्याशी अपने अमूल्य समय में भी यहां तक दौड़ लगाते हैं और वहां से आने वालों को यहां के लोग सहयोग भी पूरा करते हैं।

-कोई नई नहीं पुरानी परम्परा

गत ढाई दशक से लगातार देखा जा रहा है कि राजस्थान में छोटा अथवा बड़ा किसी भी तरह का चुनाव हो, उसकी चर्चा सूरत में नहीं हो, ऐसा नहीं हो सकता है। अब प्रवासी राजस्थानी वहां के चुनाव में मतदान तक ही सीमित नहीं बल्कि वहां जाकर चुनावी दमखम भी आजमाने लगे हैं और जिला प्रमुख जैसे अहम पद भी पाने लगे हैं। हाल ही में हुए जिला परिषद के चुनाव में राजसमंद जिला प्रमुख के रूप में प्रवासी राजस्थानी रतनीदेवी चौधरी निर्वाचित हुई है।