गंगकैनाल: पंजाब व राजस्थान क्षेत्र में सिंचाई पानी का बढ़ा लॉसेज, वितरण को लेकर उठ रहे सवाल

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Updated: 07 Aug 2020, 10:02 AM IST

-सिंचाई पानी की मांग को लेकर हर रोज किसानों का धरना-प्रदर्शन

गंगकैनाल: पंजाब व राजस्थान क्षेत्र में सिंचाई पानी का बढ़ा लॉसेज, वितरण को लेकर उठ रहे सवाल

-सिंचाई पानी की मांग को लेकर हर रोज किसानों का धरना-प्रदर्शन
इंडेप्थ स्टोरी--

श्रीगंगानगर. जिले में आईजीएनपी, भाखड़ा व

गंगनहर परियोजना से जुड़ी कृषि भूमि की सिंचाई होती है। सिंचाई पानी के समान वितरण को लेकर प्रतिदिन सवाल उठ रहे हैं? सिंचाई पानी का सही वितरण नहीं होने के क्या कारण है? किसान धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने पर क्यों मजबूर हैं। रेगुलेशन कमेटी की बैठक में किसानों का आक्रोश दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है।

जानकारी के अनुसार 45 आरडी फिरोजपुर फीडर से गंग कैनाल परियोजना में 2600 से अधिक सिंचाई पानी छोड़ा जाता है जबकि खखां हैड पर मुश्किल से 2000 या 2050 क्यूसेक सिंचाई पानी ही मिलता है। इस पानी में ही पेजयल व अन्य लॉसेज 500 से 550 क्यूसेक तक हो रहा है। इसके बाद मुश्किल से 1450 से 1500 क्यूसेक सिंचाई पानी मिलता है। इतने पानी में सिंचाई पानी प्रवाहित करने पर कई नहरों की टेल आदि प्रभावित होती है। पर्याप्त सिंचाई पानी पर ही दो बारियां सिंचाई पानी मिल पाएगा।

यह सिस्टम लागू होना चाहिए
आईजीएनपी व भाखड़ा नहर परियोजना में चार में से दो ग्रुप सिंचाई पानी दिया जाता है। यही सिस्टम गंगकैनाल में लागू करना चाहिए। इसके बाद सिंचाई पानी वितरण को लेकर दिक्कत नहीं आएगी।

बीस से तीस प्रतिशत अधिक छोड़ा जाता है सिंचाई पानी
गंगनगर परियोजना की दो दर्जन छोटी-बड़ी वितरिकाएं है। इनके माध्यम से सिंचाई पानी का वितरण किया जा रहा है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों व किसान प्रतिनिधियों का तर्क है कि नहरों की साफ-सफाई नहीं हुई। टेल पर पूरा सिंचाई पानी करने के लिए विभाग बीस से तीस प्रतिशत नहर की क्षमता से अधिक सिंचाई पानी चलाया जाता है। तब जाकर टेल पर किसानों को पूरा सिंचाई पानी मिल पाता है। बारांबंदी के अनुसार 7 दिन 18 घंटे बाद किसानों को सिंचाई पानी मिलेगा।

मुख्य कारण
-पंजाब से नियमित सिंचाई पानी मिलता रहना चाहिए।

-नहरों की अच्छी तरह से साफ-सफाई नहीं हुई।
-बर्म कटिंग हो करवा दी गई लेकिन हर के तलों से मिट्टी नहीं निकाली गई।

-45 आरड़ी फिरोजपुर से खखा हैड तक 500 से 600 क्यसेक सिंचाई पानी चोरी व लॉसेज हो रहा है।
-पंजाब क्षेत्र में पानी चोरी पर अकुंश लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

-खखां हैड से आगे पेयजल सहित 500 से 550 क्यूसेक सिंचाई लॉसेज हो रहा है।
इनका कहना है

45 आरड़ी से खखां हैड तक नहर की साफ-सफाई 2013 के बाद अच्छी तरह से नहीं हुई है। इस कारण इस नहर की 2930 क्यूसेक सिंचाई पानी की क्षमता थी लेकिन सिंचाई पानी 45 आरडी फिरोजपुर से खखां हैड पर इस बार 1700 से 2250 क्यूसेक तक ही मिला है। साथ ही सिंचाई पानी नियमित नहीं मिलने की वजह से हंगामा होता है।
-सुभाष सहगल, प्रवक्ता, किसान संघर्ष,समिति।

गंगनहर से जुड़ी वितरिकाओं की बर्म की सफाई तो करवा दी गई। लेकिन नहरों के अंदर अभी भी मिट्टी जमी हुई है। इस कारण खखां हैड से आगे राजस्थान में जहां पहले सिंचाई पानी का लॉसेज 350 क्यूसेक था जो कि अब बढकऱ 550 तक पहुंच गया। सिंचाई पानी 1450 से 15 सौ क्यूसेक में वितरण किया जा रहा है। इस कारण किसानों की दो-दो बारियां सूखी जा रही है। इसको लेकर किसान हंगामा व विरोध करते है।
-संतवीर सिंह मोहनपुरा, प्रवक्ता, ग्रामीण किसान-मजदूर समिति जीकेएस।

गंगकैनाल में पंजाब से जितना सिंचाई पानी मिल रहा है उसी के अनुसार सिंचाई पानी का विरतण किया जा रहा है। पंजाब में सिंचाई पानी चोरी हो रही है। साथ ही लॉसेज भी हो रहा है। राजस्थान क्षेत्र में सिंचाई पानी दिया जा रहा है।

-राजेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता, रेगुलेशन खंड, जल संसाधन विभाग, श्रीगंगानगर।