23 वर्षीय हरदीप कौर ने भारत के लिए जीते 20 मेडल, अब खेतों में कर रही हैं मजदूरी

|

Updated: 10 Jun 2021, 08:41 PM IST

भारत का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन करने वाली खिलाड़ी हरदीप कौर ने बताया जब उन्होंने मलेशिया में स्वर्ण पदक जीता था नौकरी देने का वादा किया गया था।

 

नई दिल्ली। कई खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्होंने भारत का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उन्हीं में से एक हैं कराटे खिलाड़ी हरदीप कौर (Hardeep Kaur)। लेकिन आज उनके हालत ऐसे है कि वह दाने—दाने को मोहताज हो रही हैं। उन्हें अपना भरण-पोषण करने के लिए खेतों में मजदूरी करके गुजारा करना पड़ रहा है। जबकि पंजाब के मनसा जिले के गुरनेकलां गांव की रहने वाली 23 वर्षीय हरदीप भारत के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 20 मेडल जीत चुकी हैं।

यह भी पढ़ें—ये हैं धोनी के 5 सबसे महंगे शौक, 826 करोड़ के हैं मालिक, रिटायरमेंट के बाद भी कमाते हैं करोड़ों

गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं हरदीप
हरदीप ने हाल ही एक इंटरव्यू में बताया कि भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने के बाद नहीं सोचा था कि जिंदगी में कभी ऐसे हालात भी आएंगे। हम एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। हमारे पास जमीन नहीं है। ऐसे में मजदूरी करके काम चलाना पड़ रहा है।

प्रतिदिन कमा पाती हैं 300—350 रुपए
कराटे खिलाड़ी ने बताया कि वह खेतों में काम करके 300 से 350 रुपए ही कमा पाती हैं। यह सब मुझे अपने परिवार का समर्थन करने के लिए करना पड़ रहा है। मेरे माता—पिता भी खेतों में काम करते हैं। फिलहाल वह पटियाला के फिजिकल एजुकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कर रही हैं। ऐसे अपना खर्च निकालने के लिए मेहनत मजदूरी करके अपना काम चला रही हैं।

यह भी पढ़ें—गावस्कर का खुलासा, तेज गेंदबाज थॉमसन के सामने बल्लेबाजी करने से लगता था डर

सरकारी नौकरी देने का किया गया था वादा
हरदीप ने बताया कि जब उन्होंनेे वर्ष 2018 में मलेशिया में स्वर्ण पदक जीता था तो उन्हें पंजाब के खेल मंत्री राणा गुरमीत सोढ़ी ने सरकारी नौकरी देने का वादा किया था। 3 साल साल बीत चुके हैं लेकिन वो वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। इसके लिए मुझे 4 बार सरकारी कार्यालय भी बुलाया गया, जहां मैंने अपना फॉर्म जमा कराया। लेकिन किसी कार्यालय से मुझे कोई लेटर नहीं मिला है।