अजब गजब: देश के इस हिस्से में अब भी लागू है फ्रांसीसी क़ानून

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Published: 17 Feb 2021, 03:46 PM IST

विवाह-तलाक के लिए पुदुचेरी में अब भी फ्रेंच सिविल कोड के तहत होते हैं निर्णय

अंग्रेजी हुकूमत से आज़ाद हुए देश को 74 साल हो चुके हैं। भारत के कुछ सीमित क्षेत्रों में अंग्रेज़ों से पहले फ्रांसीसियों और पुर्तगालियों का भी राज़ रहा है। फ्रांसीसियों का भारत आने का प्रमुख उद्देश्य व्यापर एवं वाणिज्य था। भारत आने से लेकर 1741 ई तक फ्रांसीसियों का प्रमुख उद्देश्य, ब्रिटिशों के समान, पूर्णतः वाणिज्यिक ही था। ऐसे ही फ्रांसीसी हुकूमत से पहले वास्को डी गामा के साथ भारत में पुर्तगालियों ने भी घुसपैठ की। वास्को डी गामा 1498 में भारत आए और इसके 12 वर्षों के भीतर पुर्तगालियों ने गोवा पर कब्ज़ा जमा लिया। 1510 से शुरू हुआ पुर्तगाली शासन गोवा के लोगों को 451 सालों तक झेलना पड़ा। 1961 में 19 दिसंबर को उन्हें आज़ादी मिली यानी भारत के आज़ाद होने के करीब साढ़े 14 साल बाद गोवा को पुर्तगाल के शासन से आज़ादी मिली। इसके बाद आये अंग्रेज़ जिन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के रूप में 1723 ई में यनम, 1725 ई में मालाबार तट पर माहे और 1739 ई में कराइकल पर कब्ज़ा कर लिया।

280 साल बाद भी फ़्रांसिसी क़ानून लागू
हाल ही कर्नाटक हाइकोर्ट ने पुदुचेरी के 'रेनबसेन्ट्स वंशजों' के एक जोड़े को फ्रांसीसी नागरिक संहिता के तहत तलाक की मंजूरी दी है। न्यायालय ने कहा कि रेनबसेन्ट्स के लिए विशेष विवाह अधिनियम, 1954 और भारतीय क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, 1872, लागू नहीं होते। खंडपीठ ने कहा कि फ्रांसीसी सिविल कोड रेनबसेन्ट्स के वंशजों पर लागू रहेगी। उन पर अन्य पर्सनल लॉ लागू नहीं होंगे। रेनबसेन्ट्स वे लोग हैं जिन्होंने पुदुचेरी के फ्रांस के कब्जे में रहने के दौरान अपने लिए फ्रांसीसी कानून चुना था। भारत आने से लेकर 1741 ई तक फ्रांसीसियों का प्रमुख उद्देश्य ,ब्रिटिशों के समान,पूर्णतः वाणिज्यिक ही था लेकिन हैरानी है की उनके शासन से आज़ाद होने के 280 साल बाद भी भारत के इस शहर में एक ख़ास वंश और उससे जुड़े लोगों पर फ्रेंच सिविलकोड लागू होता है।