50 लाख के गबन में फंसे सीएमएचओ, दोषी मिलने पर किया सस्पेंड

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Published: 30 Jun 2018, 04:48 PM IST

अपर संचालक ने की कार्रवाई, मेन पॉवर से नहीं किया संपर्क, अपने अनुसार की खरीदी

सीहोर। स्वास्थ्य विभाग में अनियमित्ता कर साढ़े 49 लाख से अधिक की खरीदी का गड़बड़झाला उजागर हुआ है। इस काम को किसी और ने नहीं बल्कि सीएमएचओ डॉ. डीके अहिरवार ने दिया। जांच हुई तो इसकी पोल खुल गई। संचालनालय स्वास्थ्य सेवा के अपर संचालक विवेक श्रोत्रिय ने दोषी मिलने पर सीएमएचओ को सस्पेंड कर दिया है।

वित्तीय वर्ष 2018-19 में स्वास्थ्य कार्यालयों में सफाई, सुरक्षा व बायो मेडिकल वेस्ट मद में मापदंड के हिसाब से वार्षिक राशि निर्धारित की थी। इस राशि में सीएमएचओ डॉ. डीके अहिरवार ने अनियमित्ता की। मापदंड राशि से अधिक का व्यय करने की शिकायत संचालनालय की बजट शाखा में आई तो जांच के आदेश जारी किए थे। इसके लिए दल का गठन किया था। जांच होने के बाद दल ने प्रतिवेदन बनाकर स्वास्थ्य संचालनालय को प्रस्तुत किया।

बिना चर्चा के की खरीदी
दल ने प्रतिवेदन में बताया कि पूर्ण रूप से सुरक्षा के मद से विभिन्न प्रकार की सुरक्षा सामग्री आदि का 49 लाख 98 हजार 893 का क्रय किया। जबकि इस मद में जितना व्यय होना था, वह मेन पावर पर निर्भर था। मद में 12 लाख 96 हजार रुपए का मापदंड है। बावजूद सीएमएचओ ने पूर्ण व्यय मेन पावर पर नहीं करते हुए 49 लाख 98 हजार 893 की सामग्री का क्रय किया। लेखा शीर्षो का भी मद परिवर्तन किया गया। सीएमएचओ ने इस सामग्री के क्रय में लोक निधि से व्यय के लिए आवश्यक शर्तो का पालन नहीं किया। वहीं मप्र वित्त संहिता, भंडार क्रय व सेवा उपार्जन नियम 2015 वित्तीय संहिता भाग एक के नियमों को दरकिनार किया।

सीएमएचओ ने कार्यालय में क्रय समिति का गठन भी नहीं किया। क्रय आदेशों को टुकड़ों में विभाजित कर वित्तीय अधिकार पुस्तिका 1995 भाग 2 में प्रत्योजित अधिकारों का उल्लंघन किया गया। प्रतिवेेदन में यह भी जिक्र किया है कि सीएमएचओ ने अपने ही पदीय दायत्विों के प्रति लापरवाही कर स्वयं को कार्रवाई के लिए भागी बनाया।

भोपाल रहेगा मुख्यालय
अपर संचालक ने सीएमएचओ को निलंबन काल में कार्यालय क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल मुख्यालय दिया है। भोपाल की जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. प्रभाकर तिवारी को जिला मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) के पद पर नियुक्त किया है।