मंगल पर घर बनाएंगे नहीं बल्कि उगाएंगे, नासा के अंतरिक्ष यात्री

|

Published: 08 Sep 2020, 06:40 PM IST

नासा के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वे चांद और मंगल मिशन के दौरान एस्ट्रोनॉट्स के रहने के लिए मशरूम की एक खास प्रजाति की लुगदी से बने ब्लॉक्स का उपयोग करेंगे। लेकिन क्या अंतरिक्ष में घर बनाने में मशरूम प्लास्टिक की जगह ले सकेगा?

अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का दावा है कि वह चांद और मंगल ग्रह (MOON & MARS Mission) पर अपने मिशनों के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के लिए घर बनाने में सक्षम है। दरअसल नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें इन ग्रहों पर घर बनाने के लिए लगने वाली सामग्री बनानी नहीं बल्कि उगाने होगी। नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे पारंपरिक घरों को अंतरिक्ष में एक जगह से दूसरे जगह लाना ले जाना आसान नहीं होगा, वहीं वे बहुत ज्यादा जगह घेरेंगे और इसे बनाने वाली सामग्री को अंतरिक्ष में ले जाना भी मिशन को खतरे में डाल सकता है। कैलिफोर्निया में नासा के एम्स रिसर्च सेंटर की परियोजनाओं में से एक माइको-आर्किटेक्चर इस समस्या का समाधान खोजने में लगा है। यहां वैज्ञानिकों ने फंगस वनस्पति (Fungus) उगाई है जिसे मायसेलिया (Mycelia) कहते हैं। इस फंगस से बनी ठोस सामग्री को अंतरिक्ष में घर बनाने के लिए उपयोग में लिया जा सकता है। यह परियोजना नासा के इनोवेटिव एडवांस्ड कॉन्सेप्ट्स कार्यक्रम का हिस्सा है जो जीवन के विभिन्न पहलुओं में समाहित तकनीक को यांत्रिक रूप से उपयोग में लेना चाहता है।

क्या अंतरिक्ष में बन सकेंगे घर!
अभी मंगल के लिए पारंपरिक आवास का सपना सपना ही है। योजनाएं कछुए की चाल से चल रही हैं। वहीं अंतरिक्ष यान में घर ले जाना समझदारी नहीं है। शोधकर्ता लिन रॉथ्सचाइल्ड ने कहा कि मंगल पर घर बनाने की योजना में दम तो है लेकिन यह बहुत खर्चीली है। जबकि हम घर से इतर सोचें तो मायसेलिया को अंतरिक्ष में उगाकर इसे घर बनाने में उपयोग कर सकते हैं। दरअसल ये लंबे समय तक अंतरिक्ष यान में जीवित रह सकते हैं। इन्हें अंतरिक्ष में ग्रह के धरातल पर रखकर पानी से सींचने की जरुरत होगी। इससे बनी ठोस ईंटों के घर अंतरिक्ष यात्रियों की रखा करेंगे और कवक या फंफूंदी भी सुरक्षित रहेगी क्योंकि वह भी एक आवरण में होगी। इतना ही नहीं मायसेलिया में आनुवंशिक रूप से बदलाव भी किए जाएंगे ताकि मंगल या चांद की सतह संक्रमित न हो। fungus या कवक कार्बनिक पदार्थों का सेवन करती है और बीजाणु पैदा करती है। जबकि अपनी सतह के नीचे मायसेलिया जड़ों की तरह काम करता है जो सक्रिय रूप से कवक का निर्माण करते हैं। ये मशरूम की एक पूरी खेती में बदल सकता है। मशरूम की इस खास प्रजाति को जीवित रहने के लिए साइनोबैक्टीरिया की आवश्यकता होती है। यह सौर ऊर्जा का उपयोग ऑक्सीजन और डाइऑक्साइड को अपने भोजन में परिवर्तित करने के लिए साइनोबैक्टीरिया का उपयोग करता है।

डोम जैसे घर बनाए
इस आइडिया को मूर्त रूप देते हुए शोधकर्ताओं ने और प्रोजेक्ट टीम ने तीन परतों वाला एक गुंबददार घर डिज़ाइन किया है। इसमें बाहर की ओर बर्फ की जमी हुई परत होगीए जो अंतरिक्ष यात्रियों और विकिरण के बीच एक ढाल के रूप में काम करेगी। बर्फ की जमी हुई परत, सायनोबैक्टीरिया से बनी दूसरी परत के लिए पानी भी उपलब्ध कराती रहेगी जो इसे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ऑक्सीजन में बदल देगी। अंतिम परत मायसेलिया से बनेगी जो साइनोबैक्टीरिया परत से पोषक तत्वों को इकठ्ठा करेगी।

स्टील से मजबूत सीमेंट सी टिकाऊ
मायसेलिया से बनी ईंट या ब्लॉक इन्सुलेटर्स (विद्युतीय तरंग), अग्निरोधी और जहरीले गैसों का उत्पादन नहीं करते हैं। इतना ही नहीं यह लोहे, सीमेंट और स्टील जितना ही मजबूत, लचीला और टिकाऊ भी होता है। इतना ही नहीं मायसेलिया से बनी ईंट या ब्लॉक का उपयोग बायोलुमिनसेंट लाइटिंग, पानी को छानने, खनिज निकालने, आर्द्रता को नियंत्रित करने और यहां तक कि टूट-फूट को ठीक करने में भी किया जा सकता है।