शनिवार: शनिदेव आप से प्रसन्न हैं या नाराज, ऐसे समझें

|

Published: 16 May 2020, 03:13 AM IST

आज के दिन करें ये काम, न्याय के देवता भी हो जाएंगे आपसे खुश...

ShaniDev Special on saturday- आज के दिन करें ये काम, न्याय के देवता भी हो जाएंगे आपसे खुश

शनि को न्याय का देवता भी कहा जाता है। शनिदेव का नाम लेते ही आम मानस में भ्रम या भय का भाव उत्पन्न हो जाता है। कहा तो यहां तक कहा जाता है कि अगर हम पर शनि की छाया भी पड़ गयी तो कहर आ जाएगा।

इस संबंध में पंडित सुनील शर्मा के अनुसार शनि एक न्यायप्रिय ग्रह हैं। आप अपनी आदतों से खुद जान सकते हैं कि शनि की आप पर कितनी कृपा हो रही है। शनि ही हैं जो प्रकृति की व्यवस्था को संभालते हैं।

यदि आपने गलत, अत्याचार, अनाचार, पाप किया है तो आपको उसका दंड जरूर मिलेगा। यदि इसे आप गलत कहते हैं, तो शनिदेव का क्या दोष ? पंडित शर्मा के मुताबिक शनिदेव कभी किसी का बुरा नहीं करते। उनकी दृष्टि में इतना तेज है कि हम उनसे नजरें नहीं मिला सकते, लेकिन यदि हम सही पथ पर चलते हैं तो शनि हमेशा हम पर कृपा बनाए रखते हैं।

MUST READ : शनिवार आज / शनिदेव का दिन है खास, जानें क्या करें और क्या न करें

शनि की क्रूर दृष्टि कर देगी बर्बाद
माना जाता है कि सूर्य के पुत्र शनि उन ग्रहों में से हैं, जिनकी क्रूर दृष्टि किसी को बर्बाद कर सकती है, लेकिन उनकी अच्छी दृष्टि अगर किसी पर एक बार पड़ जाए तो उसके सारे काम बन जाते हैं और उसके घर कभी दरिद्रता नहीं आती।

शनिदेव सूर्य से काफी दूरी पर हैं और यही कारण है कि शनि प्रकाशहीन हैं। भगवान शनि के प्रकाशहीन होने की वजह से कई लोग उन्हें निर्दयी, क्रोधी, भावहीन और उत्साहहीन भी मान लेते हैं, लेकिन वो ये नहीं जानते कि शनि अगर किसी से प्रसन्न होते हैं तो उसे वैभव और धन से भर देते हैं।

शास्त्रों के मुताबिक शनि का अप्रसन्न होने का अर्थ है मुसीबतों का मार्ग खुलना, लेकिन ऐसे में लोगों में मन में ये प्रश्न उठना स्वाभावित है कि कैसे जानें कि शनि प्रसन्न हैं या अप्रसन्न? इस संबंध में पं. शर्मा ये कहते हैं कि आपको जानकर हैरानी होगी कि रोजाना जीवन में आपकी कुछ आदतों से पता चलता है कि शनि भगवान आप पर प्रसन्न हैं।

MUST READ : दुनिया के इस प्राचीन मंदिर में न्यायाधीश शनि देते हैं इच्छित वरदान

शनि की कृपा : नाखून को रोज करें साफ
उन्होंने कहा कि जो लोग रोज अपने नाखून काटते हैं और उन्हें साफ भी रखते हैं, शनि ऐसा करने वालों का हमेशा ख्याल रखते हैं। इसलिए अचानक अगर आप अपने नाखून काटने में आलस करने लगें या आपके नाखून गंदे रहने लगें तो समझें कि आपको शनि दशा सुधारने के लिए उपाय करने चाहिए।

ऐसे समझें शनि की है विशेष कृपा
अगर आपका दिल गरीबों, जरूरतमंदों को देखकर पसीज जाता है और हर पर्व-त्यौहार पर या गरीब जरूरतमंद की आप हमेशा मदद करते हैं तो समझें शनिदेव की आप पर विशेष कृपा है। ऐसे लोग पौष माह में गरीबों को काले चने, काले तिल उड़द दाल और काले कपड़े सच्चे मन से दान करते हैं, इसलिए शनिदेव भी उनका सदैव कल्याण करते हैं।

इन पर हमेशा बनी रहती है शनिदेव की छत्र-छाया...
ज्येष्ठ माह में धूप से बचने के लिए काले छाते दान करने वालों पर शनिदेव की छत्र-छाया हमेशा बनी रहती है। जब आपकी यह आदत बदलने लगे तो समझें शनिदेव कुपित हो रहे हैं आपसे। कुत्तों की सेवा करने वालों से भगवान शनि हमेशा प्रसन्न होते हैं।

MUST READ : मई 2020 में शनि ने बदली चाल बढ़ागी इन राशियों की परेशानी, ये हैं राशि अनुसार उपाय

कुत्तों को खाना देने वालों और उनको कभी ना सताने वालों के शनिदेव सभी कष्ट दूर करते हैं। इसलिए अगर आपको भी ऐसी आदतें हैं तो जीवन में शनि कोप से मिलने वाली मुश्किलों से हमेश बचे रहेंगे।

इनसे खुश होंगे न्याय के देवता
किसी भी नेत्रहीन व्यक्ति को राह दिखाना, उनकी मदद करना शनि को खुश करने में सहायक सिद्ध होता है। जो लोग भी नेत्रहीन लोगों की अनदेखी नहीं करते, उनकी नि:स्वार्थ मदद करते हैं, शनिदेव उनसे हमेशा प्रसन्न रहते हैं और उनकी सफलता-उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। शनिवार का उपवास रखकर अपने हिस्से का भोजन गरीबों को देने की आदत है तो समझें शनि की कृपा से अन्न के भंडार आपके लिए हमेशा खुले रहेंगे।

MUST READ : शनि का सबसे आसान उपाय, जो पॉजीटिविटी बढ़ाने के साथ ही निगेटिविटी का असर करता है कम

शनिदेव : जन्म कथा
शनि देव के जन्म से संबंधित एक पौराणिक कथा बहुत प्रचलित है। इस कथा के अनुसार शनि, सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं। सूर्य देव का विवाह संज्ञा से हुआ था और उन्हें मनु, यम और यमुना के रूप में तीन संतानों की प्राप्ति हुई। विवाह के बाद कुछ वर्षों तक संज्ञा सूर्य देव के साथ रहीं लेकिन अधिक समय तक सूर्य देव के तेज को सहन नहीं कर पाईं।

इसलिए उन्होंने अपनी छाया को सूर्य देव की सेवा में छोड़ दिया और कुछ समय बाद छाया के गर्भ से शनि देव का जन्म हुआ। हालांकि सूर्य देव को जब यह पता चला कि छाया असल में संज्ञा नहीं है तो वे क्रोधित हो उठे और उन्होंने शनि देव को अपना पुत्र मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद से ही शनि और सूर्य पिता-पुत्र होने के बावजूद एक-दूसरे के प्रति बैर भाव रखने लगे।