गुरु-शुक्र का समसप्तक योग हो चुका है शुरु, जो रहेगा पूरे एक माह तक...

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Updated: 03 Aug 2020, 03:28 PM IST

इन पांच राशि वालों को होगा खास फायदा...

गुरु और शुक्र अपने आप में दोनों शुभ ग्रह हैं, लेकिन आपस में दोनों की शत्रुता है। गुरु वैवाहिक सुख (विवाह होगा या नहीं) का प्रतिनिधि ग्रह है तो शुक्र दांपत्य सुख (विवाह के बाद सेक्स लाइफ) का प्रतिनिधित्व करता है। इन दोनों ग्रहों के समसप्तक में आ जाने के कारण अनेक लोगों के वैवाहिक सुख और दांपत्य सुख पर विपरीत असर पड़ सकता है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस माह यानि अगस्त 2020 की 1 तारीाख सुबह 5.09 बजे शुक्र के मिथुन राशि में प्रवेश करते ही गुरु के साथ इसका समसप्तक योग बन गया। अब शुक्र 1 सितंबर 2020 तक मिथुन राशि में रहने के बाद कर्क राशि में प्रवेश कर जाएगा। अर्थात् इस पूरे माह समसप्तक योग का प्रभाव रहेगा, जिससे एक माह के समय में सभी राशि के जातकों को अपने जीवनसाथी के साथ तालमेल बनाकर चलना जरूरी होगा।

ऐसे समझें समसप्तक योग
: समसप्तक योग दो या दो से अधिक ग्रहों के योग से मिलकर बनता है।

: जब भी कोई दो ग्रह एक दूसरे से सातवें स्थान पर होते हैं, तब उन ग्रहों के बीच समसप्तक योग बन जाता है।

: दूसरे शब्दों में कहें तो जब ग्रह आपस में अपनी सातवीं पूर्ण दृष्टि से एक-दूसरे को देखते हैं तब समसप्तक योग बनता है।

: यह वैसे तो एक शुभ योग होता है, लेकिन शुभ-अशुभ ग्रहों की युति के कारण इसके शुभाशुभ फल में भी बदलाव आता है।

: इस योग का फल इस बात पर निर्भर करता है कि यह किन ग्रहों की युतियों, किन लग्न और किन-किन ग्रह योगों से बन रहा है।
: इस योग में ग्रहों की मैत्री, शत्रुता, समस्थिति, मारक, भावेश, अकारक, कारक भाव जैसी शुभ-अशुभ योग स्थिति मायने रखती है।
: यह स्थिति जातक की कुंडली में बनने वाले समसप्तक योग की स्थिति पर निर्भर करेगी कि किस तरह की स्थिति से यह योग बन रहा है।
: केंद्र त्रिकोण के ग्रहों के संबंध से यह योग बनने पर शुभ फल देने वाला होता है।

: केंद्रेश त्रिकोणेश की युति में ग्रहों का आपसी नैसर्गिक रूप से संबंध भी शुभ होना जरूरी होता है।

: इस योग की जैसी स्थिति कुंडली, लग्न आदि के द्वारा बनेगी वैसे ही इस योग के शुभ-अशुभ फल होंगे।

: यहां गुरु और शुक्र के बीच समसप्तक योग बन रहा है, ये दोनों ग्रह आपस में शत्रु हैं इसलिए इसका शुभ फल कम, अशुभ फल ज्यादा मिलेगा।

गुरु-शुक्र समसप्तक का फल
: गुरु को वैवाहिक सुख का प्रतिनिधि ग्रह माना जाता है, तो शुक्र दांपत्य सुख का। दोनों ग्रहों की शत्रुता होने के कारण दोनों ही प्रकार के सुख प्रभावित होंगे।

: जिन लोगों के विवाह में बाधा आ रही है, विवाह नहीं हो पा रहा है, उन्हें अभी एक माह और इंतजार करना पड़ेगा। 01 सितंबर के बाद विवाह की बात बनेगी।

: जिन लोगों का विवाह हो गया है, लेकिन पति-पत्नी के बीच अनबन बनी रहती है, वह अभी और बनी रहेगी। उसमें राहत नहीं मिलने वाली।

: जिन लोगों की सेक्सुअल लाइफ खराब चल रही है, उसमें अभी एक माह सुधार नहीं आएगा।

: प्रेम संबंधों में टकराहट आने की स्थिति बनेगी। प्रेमी-प्रेमिका एक-दूसरे की परवाह नहीं करेंगे।

: गुरु आध्यात्मिकता, सात्विकता का ग्रह है, जबकि शुक्र भोग विलास का, तो जो लोग आध्यात्मिक राह पर चलना चाहते हैं, उनकी साधना में रूकावट आ सकती है।

इन राशियों को होगा फायदा...

: वृषभ राशि :
शुक्र के स्वामित्व वाली इसी राशि समसप्तक योग के शुभ फल प्राप्त होंगे। आपके पारिवारिक जीवन में सुधार होने के आसार हैं साथ ही आप अपने परिजनों के साथ खास समय बिता पाएंगे।

: मिथुन राशि :
वृषभ राशि के जातकों के लिए गुरु-शुक्र की युति से बनने वाला समसप्तक योग लाभकारी होगा।

: सिंह राशि :
एकादश भाव में शुक्र का परिवर्तन और इस कारण बना समसप्तक योग का आपको भी शुभ फल मिलेगा। सिंह राशि के जातकों की सभी अधूरी मनोकामनाएं पूरी होने के आसार हैं।

: तुला राशि :
तुला राशि वालों के स्वामी शुक्र के भाग्य स्थान पर आने से समसप्तक योग भाग्यशाली रहेगा। इससे यदि आप किसी कानूनी मामले में फंसे हुए हैं, तो आपको उसमें सफलता मिल सकती है।

: धनु राशि :
धनु राशि के सातवें भाव में शुक्र प्रवेश करने से गुरु-शुक्र युति से बने योग का प्रभाव शुभ रहेगा। आपको समसप्तक योग की वजह से समाज में यश, मान-सम्मान की प्राप्ति होगी।

परेशानियों से बचने के लिए ये करें उपाय..
गुरु और शुक्र दोनों की प्रसन्नता के उपाय इस दौरान किए जाना चाहिए, इसके तहत गुरुवार को केले के पेड़ में शुद्ध जल अर्पित करके उसकी पूजा करें। केले का दान करें। जबकि शुक्रवार के दिन मिश्री और दूध का दान करना शुभ रहेगा।