जीवन को यूं बनाएं बेहतर

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Published: 30 Apr 2018, 10:09 AM IST

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जीवन को यूं बनाएं बेहतर

सभी चीजों के तो साध्य और साधन के संबंध हो सकते हैं लेकिन जीवन का नहीं। जीवन से बड़ा और कुछ भी नहीं है। जीवन ही अपनी पूर्णता में परमात्मा है।

इंद्रीय और भोग
इन्द्रियों के अपने-अपने भोग हैं। जब इन्द्रियां विषयों की तरफ जाकर सुख का अनुभव करती हैं और बार-बार उसी सुख को पाना चाहती हैं, वही भोग कहलाता है। इन इन्द्रियों से मिलने वाले भोग की लालसा इतनी ज्यादा होती है कि इंसान इन भोगों को ही ढूंढता रहता है। उम्र बीत जाती है फिर भी मन भोगों की तरफ ही भागता रहता है। भोग शरीर की ऊर्जा को खा जाता है। इंसान खत्म हो जाता है लेकिन भोग कभी खत्म नहीं होते।