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GST: सरकार ने कहा- घर होंगे सस्ते, बिल्डरों ने कहा, महंगा होगा

By Sunil Sharma

Jun, 26 2017 12:21:00 (IST)

ऐसा जीएसटी में ओवरऑल प्रॉपर्टी पर 12 फीसदी की दर से टैक्स तय करने के कारण हुआ है
देश की आजादी के बाद का सबसे बड़ा इनडायरेक्ट टैक्स रिफॉर्म जीएसटी 1 जुलाई से देश भर में लागू होने जा रहा है। सरकार का कहना है कि जीएसटी लागू होने का फायदा कारोबारी, निवेशक से लेकर आम आदमी तक को मिलेगा। हालांकि, सरकारी दावों का पता अगले कुछ महीनों में ही चल पाएगा लेकिन अभी से ही होम बायर्स से लेकर डेवलपर्स तक में इसको लेकर उलझन बढ़ गई है। ऐसा जीएसटी में ओवरऑल प्रॉपर्टी पर 12 फीसदी की दर से टैक्स तय करने के कारण हुआ है।
सरकार का कहना है कि जीएसटी लागू होने से रियल्टी सेक्टर पर टैक्स का बोझ कम होगा जिसका फायदा होम बायर्स को मिलेगा। वहीं, डवलपर्स का कहना है कि जीएसटी लागू होने से टैक्स का बोझ कम नहीं बल्कि बढ़ेगा, जिससे प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ेगी। इसके चलते कीमत में इजाफा की भरपाई होम बायर्स से की जाएगी। ऐसी उहापोह की स्थिति के बारे में प्रॉेपर्टी एक्सपट्र्स की राय है कि अभी घर खरीदारों को वेट एंड वॉच की नीति होम बायर्स को अपनानी चाहिए और जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए। जीएसटी लागू होने के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी।
कीमत बढऩे के पक्ष में क्रेडाई का तर्क
क्रेडाई के चेयरमैन गीतांबर आनंद ने बताया कि अभी 4.5त्न  की दर से सर्विस टैक्स लगता है  और  लैंड कॉस्ट का 75 त्न  टैक्स फ्री है। जीएसटी में अगर कोई प्रॉपर्टी की कीमत 5000 रुपए वर्ग फीट है और 12त्न  की दर से टैक्स लगा तो बायर्स को 600 रुपए टैक्स देना होगा। वहीं, कंस्ट्रक्शन लागत 2000  है जिसपर इनपुट क्रेडिट से करीब 400 रुपए की बचत होगी। ऐसे में टैक्स वृद्धि से कीमतें बढ़ेंगी।

टैक्स छूट का फायदा होम बायर्स को मिले
सरकार का कहना है कि जीएसटी में प्रॉपर्टी बाजार पर सिर्फ 12 फीसदी की दर से टैक्स लगाया गया है। अभी रियल्टी सेक्टर पर उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क, राज्यों के इंट्री टैक्स आदि को मिलकार टैक्स का बोझ जीएसटी के मुकाबले दो गुने से ज्यादा है। जीएसटी से टैक्स का बोझ कम होगा और  इनपुट क्रेडिट का लाभ भी मिलेेगा। ऐसे में डवलपर्स को यह लाभ घर खरीदारों को देना होगा। ऐसा नहीं करने पर जीएसटी कानून 171 के तहत मुनाफाखोरी माना जाएगा औैर कार्रवाई की जाएगी।

टैक्समैन.कॉम के कंसल्टेंट वी.एस डाटे के मुताबिक अगर फ्लैट 60 लाख रु. का है तो करीब 20 लाख का सीमेंट व सरिया लगता है।  12 फीसदी  की दर से एक्साइज ड्यूटी से 2.4 लाख रुपए का टैक्स जाता है। जीएसटी में यह रकम इनपुट क्रेडिट के तौर पर डवलपर्स को मिल जाएगा।

ऐसे बढ़ेंगी कीमतें
रियल एस्टेट कंपनी केबी-वन के डायरेक्टर ऋषि सिंह ने बताया कि जीएसटी में सरकार ने लैंड कॉस्ट पर एबेटमेंट (जमीन की कीमतों पर छूट) नहीं दिया है। मेट्रो और टियर टू शहरों में जमीन की कीमत इतनी अधिक होती है कि प्रोजेक्ट कॉस्ट काफी महंगी हो जाती है। ऐसे में जीएसटी में लैंड कॉस्ट शामिल करने पर प्रोजेक्ट की लागत बढ़ेगी। जीएसटी में अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी में खरीदार को 12 फीसदी जीएसटी के अलावा स्टॉम्प ड्यूटी व अन्य चार्ज देने होंगे। अभी तक सिर्फ 4त्न की दर से सर्विस टैक्स देना होता है। साथ में अभी तक लैंड कॉस्ट का 75 फीसदी पर कोई टैक्स नहीं लिया जाता है।