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हरित क्षेत्र पर खड़े हो रहे कंक्रीट के जंगल

By Sunil Sharma

Jun, 07 2017 01:30:00 (IST)

मास्टर प्लान से छेड़छाड़ के मुद्दे को लेकर न्यायालय भले ही सख्त है
जयपुर। मास्टर प्लान से छेड़छाड़ के मुद्दे को लेकर न्यायालय भले ही सख्त है, लेकिन सरकारी सिस्टम में कमियां साफ दिखती है। मास्टर प्लान के महत्वपूर्ण अंग ग्रीन बैल्ट में पहले तो कंक्रीट के जंगल खड़े किए गए और इसके बाद एनओसी के लिए चक्कर। खास बात यह है कि जिस जमीन का भू-उपयोग परिवर्तन करवाया जाता है उसके एेवज में नई जमीन भी नहीं दी जा रही।

राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के पत्र को याचिका मानते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने मास्टर प्लान को लेकर आदेश जारी किए थे। इसमें ग्रीन बैल्ट का उल्लंघन करने पर नियमन रोकने की बात कही गई है। लेकिन अब जो कॉलोनियां विकसित हो रही है, उसमें ग्रीन एरिया का प्रावधान ही नहीं किए जा रहे हैं।

राजीव विहार कॉलोनी
पिछली कांग्रेस सरकार के समय राजीव विहार कॉलोनी बसाई गई। यह गोचर भूमि पर थी। तत्कालीन कलक्टर की पहल पर भू-उपयोग परिवर्तन किया गया। इसके बाद इतनी ही जमीन पुन: गोचर के लिए देनी थी। लेकिन, एेसा नहीं हुआ।

नया गांव औद्योगिक क्षेत्र
हरित क्षेत्र में खेतावास गांव पर एक औद्योगिक क्षेत्र बसाया गया है। इस औद्योगिक क्षेत्र के एेवज में भी प्रशासन ने किसी प्रकार की भूमि आवंटित नहीं की है। पांच साल से औद्योगिक क्षेत्र अटका हुआ है। पिछले साल पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेज, लेकिन स्वीकृति अब तक नहीं मिली।

कचरा निस्तारण प्लांट
खेतावास मार्ग पर औद्योगिक क्षेत्र के सामने कचरा निस्तारण प्लांट भी नगर परिषद ने हरित क्षेत्र की भूमि पर ही खड़ा किया है। हालांकि 7 साल बाद भी प्लांट शुरू नहीं हो पाया है। इस प्लांट और डम्पिंग स्टेशन के एेवज में जमीन नहीं दी गई है।

नई आवासीय योजना
घुमटी के समीप नई आवासीय योजना भी ग्रीन बैल्ट एरिया में विकसित की जा रही है। इसकी जमीन पहले से ही सरकार के पास थी। पर्यावरणीय स्वीकृति ली जा चुकी है। लेकिन हरित क्षेत्र को खत्म करने के साथ नए क्षेत्र विकसित करने के प्रयास नहीं हो रहे।