18 साल का जोगी वर्चस्व खत्म, कांग्रेस के हाथ में मरवाही, पांच माह से कांग्रेसी कर रहे थे फिल्डिंग

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Published: 11 Nov 2020, 02:47 PM IST

- सीएम ने रखा एक एक वोट का हिसाब, पूरे कैंपेन और प्लानिंग पर रही नजर
- मरवाही विधानसभा सीट पर जोगी परिवार का मैजिक खत्म

बिलासपुर. मरवाही की सीट जो 18 साल तक जोगी या उनके परिवार के पास रही अब इस विधानसभा में उनका मैजिक खत्म हो गया है। मरवाही अब वापस कांग्रेस के हाथ में हैं, बकायदा सीएम भूपेश बघेल ने भी ट्वीट कर इस बात की खुशी जताई है। विदित हो कि पूर्व मुख्यमंत्री मरवाही विधायक स्वर्गीय अजीत जोगी के निधन के बाद इस सीट को अपने हाथ में लेने के लिए कांग्रेसियों न सिर्फ पूरा होमवर्क किया बल्कि जरूरत के हिसाब से पूरी फिल्डिंग ही जमा दी थी।

रणनीति के तहत लगभग सभी मंत्री एक-एक कर मरवाही पहुंचे, स्थानीय विधायकों को जिम्मेदारी दी गई साथ ही कांग्रेस के लगभग 50 विधायकों को यहां झोंक दिया गया। सबसे खास बात यह कि स्वयं सीएम भूपेश बघेल इस इलाके में दर्जनों बार गए और लोगों से रू-ब-रू हुए। कार्यकर्ताओं को रिचार्ज किया, जनता की नब्ज की टटोली।

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कांग्रेस की ओर से जुलाई महीने से इस सीट को कवर करने के लिए दौरा शुरू कर दिया गया। सबसे पहले राजस्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल को इस विधानसभा का प्रभारी बनाया गया साथ में पाली तानाखार विधायक मोहित केरकेट्टा को भी इसकी जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद प्रदेश उपाध्यक्ष अटल श्रीवास्तव का लगातार दौरा और लोगों से मेल जोल शुरू हो गया था।

क्षेत्र की जनता की समस्या को जानने के लिए हर ब्लाक में चाय चौपाल का कार्यक्रम रखा गया, जिसमें छोटी-छोटी शिकायतों को तत्काल निराकरण करने का आदेश अफसरों को दिया गया। इसके अलावा मनरेगा से 34 करोड़ रुपए का काम स्वीकृत किया गया। इसके अलावा 10 से अधिक सड़क, छोटे-बड़े पुल-पुलिया निर्माण सहित अनेक कार्य स्वीकृत किए गए।

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कांग्रेस नेताओं ने क्षेत्र की समस्या जानने के बाद अलग-अलग समाज के लोगों से बैठक कर उन्हें अपने पाले में किया गया। चुनाव करीब आते ही 332 करोड़ रुपए का कार्य स्वीकृत किया गया। एक एक कर सभी विभाग के मंत्री आए और क्षेत्र के लोगों को योजना लाभ ज्यादा से ज्यादा मिले इस ओर ध्यान दिया गया। कांग्रेस ने अलग अलग टीम बनाकर क्षेत्र में घेरा बंदी कर दिया था जिसका परिणाम जीत के रूप में मिला।