चिराग पासवान के पास पिता की विरासत को बचाने की चुनौती, LJP के 208 नेता JDU में शामिल

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Updated: 19 Feb 2021, 10:30 PM IST

HIGHLIGHTS

  • Bihar Politics: एलजेपी के 18 जिलाध्‍यक्षों व पांच प्रदेश महासचिवों समेत 208 नेता JDU में शामिल हो गए।
  • इन सभी नेताओं ने पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में जेडीयू का दामन थामा है।

पटना। बिहार की सियासत में उठापटक का दौर बरकरार है। गुरुवार का दिन बिहार की राजनीति बेहद ही अहम रहा। खासकर लोक जनशक्ति पार्टी और चिराग पासवान के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा।

दरअसल, राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में रहते हुए जनता दल यूनाइटेड (JDU) को जोर का झटका देने वाली लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में बगावती तेवर दिखाते हुए 200 से अधिक नेताओं ने पार्टी छोड़ दी। एलजेपी के 18 जिलाध्‍यक्षों व पांच प्रदेश महासचिवों समेत 208 नेता JDU में शामिल हो गए। इन सभी नेताओं ने पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में जेडीयू का दामन थामा है।

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माना जा रहा है कि बिहार के सियासी इतिहास में अबतक की सबसे बड़ी बगावत है। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने सभी नेताओं को पार्टी में शामिल कराया है। इस अवसर पर जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, महेश्वर हजारी और गुलाम रसूल बलियावी आदि कई बड़े नेता मौजूद थे।

चिराग पासवान के सामने बड़ी चुनौती

आपको बता दें कि एलजेपी के प्रमुख चिराग पासवान के सामने एक बड़ी चुनैती है। बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से चिराग पासवान के नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं, तो वहीं अपने पापा और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के विरासत को बचाने का भी संकट है।

चुनाव में शिकस्त के बाद से कई कद्दावर नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। अब इतनी बड़ी संख्या में एक साथ नेताओं के पार्टी छोड़कर जेडीयू में शामिल होने सूत्रधार एलजेपी से निष्‍कासित नेता व पूर्व प्रवक्‍ता केशव सिंह को माना जा रहा है। उन्होंने ही सबसे पहले पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान के प्रति नाराजगी जताते हुए एलजेपी में टूट का दावा किया था।

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तमाम बागी नेताओं ने चिराग पासवान पर कई आरोप लगाए हैं। केशव सिंह ने कहा कि चिराग पासवान ने पार्टी के कार्यकर्ताओं को ठगा, जिससे वे आहत हैं। उन्‍होंने आरोप लगाया है कि चिराग पासवान ने 94 विधानसभा क्षेत्रों में फरवरी 2019 में 25 हजार सदस्य बनाने वालों को ही विधानसभा चुनाव का टिकट देने की घोषणा की थी और इस एवज में बड़ी राशि वसूली गई। इसके बाद जब चुनाव का समय आया तो पैसे लेकर बाहरी लोगों को टिकट दे दिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई नेता चिराग पासवान पर धोखाधड़ी का मुकदमा भी करने जा रहे हैं।