RLSP के JDU में विलय से पहले बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर, तेजस्वी ने नीतीश कुमार को दिया बड़ा झटका

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Updated: 12 Mar 2021, 06:38 PM IST

HIGHLIGHTS

  • राष्ट्रीय लोक समता दल (रालोसपा) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी का विलय सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइडेट (JDU) में करने की घोषणा की है।
  • RLSP के JDU में विलय होने से पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की मौजूदगी में रालोसपा के प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र कुशवाहा समेत बिहार और झारखंड के तमाम पदाधिकारी RJD में शामिल हो गए।

पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद से सियासी उठापटक का दौर लगातार जारी है। विधानसभा के चुनाव में कांटे की टक्कर में महज कुछ सीटों के अंतर से जीत दर्ज करने वाली एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सरकार के खिलाफ तेजस्वी यादव हल्ला बोल रहे हैं और अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक बड़ा झटका दिया है।

दरअसल, बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद से छोटे दलों में भगदड़ मची है और अब अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, क्योंकि विधानसभा चुनाव में इन दलों का प्रदर्शन बेहद ही खराब रहा। ऐसे में पार्टी से जुड़े नेता और कार्यकर्ता अपने राजनीतिक भविष्य को बेहतर करने के लिए पार्टी छोड़ दूसरे दलों का दामन थाम रहे हैं।

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इसी कड़ी में राष्ट्रीय लोक समता दल (रालोसपा) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी का विलय ही नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइडेट में करने की घोषणा कर दी। पार्टी की विलय जेडीयू में होने से पहले शुक्रवार को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एक बड़ा झटका दिया।

राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की मौजूदगी में रालोसपा के प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र कुशवाहा समेत बिहार और झारखंड के तमाम पदाधिकारी जेडीयू के बजाए राजद में शामिल हो गए। माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव ने इसके जरिय नीतीश कुमार को एक बड़ा झटका देते हुए भविष्य की राजनीति के संकेत दे दिया है।

14 मार्च को RLSP का JDU में होगा विलय

बिहार की सियासत में विधानसभा के चुनाव के बाद से भगदड़ मची हुई है। रालोसपा के नेताओं को राजद में शामिल कराने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा को छोड़कर पूरी पार्टी का राजद (RJD) में विलय हो गया है।

तेजस्वी यादव और राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह की मौजूदगी में रालसपा के तीन दर्जन से अधिक नेताओं ने राजद का दामन थामा। ऐसे में ये रालोसपा के बड़े-बड़े चेहरों का JDU छोड़ RJD में शामिल हो जाना नीतीश कुमार के लिए एक बड़ा झटका है।

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अब रालोसपा के जितने भी बड़े या छोचे चेहरे बचे हैं वे सभी कल यानी 14 मार्च को राजधानी पटना में जेडीयू का दामन थामेंगे। इस विशेष मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौजूद रहेंगे। रालोसपा के अंदर विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से ही घमासान शुरू गया था। उपेंद्र कुशवाहा की कार्यशैली से पार्टी नेता और कार्यकर्ता नाराज थे। यही कारण है कि चुनाव के दौरान ही रालासपा के प्रदेश अध्यक्ष भूदेव चौधरी ने पार्टी छोड़ दी थी। चुनाव परिणाम के बाद राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश यादव और राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. सुबोध मेहता ने भी रालोसपा का साथ छोड़कर RJD का हाथ थाम लिया था।

नीतीश कुमार से अलग होकर उपेंद्र कुशवाहा ने बनाई थी पार्टी और अब..

आपको बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा और नीतीश कुमार कुछ साल पहले एक साथ एक मंच पर एक ही पार्टी के लिए राजनीति करते थे। लेकिन फिर राजनीतिक महत्वकांक्षा ने जोर पकड़ा तो उपेंद्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नाराज होकर अपनी खुद की एक अलग पार्टी बना ली।

2013 में उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार का साथ छोड़कर यानी JDU से अलग होकर अपनी अलग पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) बनाई थी। हालांकि, वीरेंद्र कुशवाहा ने एक बयान में कहा कि रालोसपा का निर्माण 2009 में गांधी मैदान में किया हुआ था।

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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को गद्दी से हटाने के लिए ये बड़ा फैसला लिया गया था, लेकिन अब एक बार फिर से उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार के साथ जाने का फैसला लिया है, जो कि पार्टी के लिए ठीक नहीं है। इसलिए पार्टी ने सामूहिक तौर पर कुशवाहा को निष्कासित करते हुए रालोसपा का विलय राजद में करने का निर्णय लिया है।

एलजेपी के अंदर भी मची है भगदड़

आपको बता दें कि लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अंदर भी बिहार विधानसभा चुनाव के बाद से भगदड़ मची है। पार्टी के सैंकड़ों नेता और कार्यकर्ता एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान से नाराज होकर पार्टी छोड़ चुके हैं और वे सभी JDU या BJP या RJD में शामिल हो चुके हैं।

पिछले महीने एलजेपी के करीब 400 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चिराग पासवान से नाराज होकर पार्टी छोड़ दी। उनमें से 200 से अधिक नेताओं ने भाजपा का दामन थामा तो वहीं बाकी के 208 से अधिक नेताओं ने जेडीयू का दामन थाम लिया। इतना ही नहीं चिराग पासवान पर विधानसभा चुनाव के दौरान धोखा देने और पैसे लेने का भी गंभीर आरोप लगाया।