RSS चीफ मोहन भागवत ने कहा- भारत विरोधी नहीं हिंदू, ओवैसी ने ऐसे किया पलटवार

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Published: 02 Jan 2021, 09:26 AM IST

  • RSS चीफ मोहन भागवत और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी आमने-सामने
  • हिंदू के देशभक्ति वाले बयान पर ओवैसी का भागवत को जवाब
  • ओवैसी ने भागवत ने दिलाई दो घटनाओं की याद

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसव संघ ( RSS ) के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। शुक्रवार को भागवत ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई हिंदू है तो वह देशभक्त ही होगा। यह उसका बुनियादी चरित्र और प्रकृति है। भागवत ने कहा कि हिंदू कभी भारत विरोधी नहीं हो सकता।

भागवत के इस बयान के बाद ओवैसी का पलटवार भी सामने आया है। ओवैसी ने भागवत के देशभक्त हिंदू वाले बयान पर उन्हें ट्वीट के जरिए जवाब दिया।

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आरएसएस चीफ मोहन भागवत और एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी एक मुद्दे पर आमने-सामने आ गए। भागवत के हिंदू देशभक्त वाले बयान पर पलटवार करते हुए ओवैसी ने याद दिलाते हुए कहा कि अगर हिंदू देशभक्त ही होगा तो फिर नाथूराम गोड़से कौन था।

ओवैसी ने ट्वीट में लिखा, 'क्या भागवत जवाब देंगे: गांधी के हत्यारे गोडसे के बारे मे क्या कहना है? नेल्ली नरसंहार, 1984 सिख विरोधी दंगे और 2002 गुजरात नरसंहार के ज़िम्मेदार लोगों के लिए क्या कहना है?'
एआईएमआईएम चीफ ने एक और ट्वीट किया।

इस ट्वीट में उन्होंने लिखा- 'एक धर्म के अनुयायियों को अपने आप देशभक्ति का प्रमाण जारी किया जा रहा है, जबकि दूसरे को अपनी पूरी जिंदगी यह साबित करने में बितानी पड़ती है कि उसे यहां रहने और खुद को भारतीय कहलाने का अधिकार है।'

ये बोले थे भागवत
आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा था कि - अगर कोई हिन्दू है तब वह देशभक्त होगा और यह उसका बुनियादी चरित्र व प्रकृति है। संघ प्रमुख ने महात्मा गांधी की उस टिप्पणी को उद्धृत करते हुए यह बात कही, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी देशभक्ति की उत्पत्ति उनके धर्म से हुई है।

भागवत के मुताबिक- गांधीजी ने कहा था कि मेरी देशभक्ति मेरे धर्म से निकलती है। मैं अपने धर्म को समझकर अच्छा देशभक्त करूंगा।

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दरअसल मोहन भागवत ने जेके बजाज और एमडी श्रीनिवास की लिखित पुस्तक 'मेकिंग ऑफ ए हिन्दू पैट्रियट : बैकग्राउंड आफ गांधीजी हिन्द स्वराज' का लोकार्पण के दौरान ये बात कही। उन्होंने कहा कि किताब के नाम और मेरा उसका विमोचन करने से अटकलें लग सकती हैं कि यह गांधी जी को अपने हिसाब से परिभाषित करने की कोशिश हैं।
लेकिन ऐसा नहीं है, महापुरुषों को कोई अपने हिसाब से परिभाषित नहीं कर सकता। ये किताब एक व्यापक शोध पर आधारित है।