घर में रखें इन बातों का ध्यान तो खुद चल कर आएगी मां लक्ष्मी, जाने क्या करें

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Published: 13 Apr 2018, 03:37 PM IST

वास्तु शास्त्र व ज्योतिष के अनुरूप अपने मुख्य द्वार के दोषों को दूर कर मनचाही सफलता प्राप्त की जा सकती है।

हमारे घर का मुख्य द्वार हमारी परिस्थितियों का भव्य आईना है। यूं तो लोग अधिकांशत: अपनी सुविधा के अनुरूप अपने घर का मुख्य द्वार बनाते हैं लेकिन घर के मुख्य द्वार में जरा सा भी वास्तु दोष आपके जीवन के सुख और सौभाग्य को समाप्त कर सकता है। इसलिए शास्त्रों में न केवल पूरा घर वरन घर का मुख्य द्वार भी वास्तु सम्मत बनाने की आज्ञा दी गई है। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ वास्तु टिप्स के बारे में जिन्हें अपना कर वास्तु शास्त्र व ज्योतिष के अनुरूप अपने मुख्य द्वार के दोषों को दूर किया जा सकता है।

  • यदि किसी घर के कोने, कूप, कचरे, वृक्ष, द्वार तथा देव स्थान से मुख्य द्वार अवरूद्ध हो जाना भी अच्छा नहीं होता है। इससे वास्तु ज्ञान का फल नहीं मिल पाता है।
  • घर के दरवाजे के सामने कूपवेध से स्वामी अथवा उस परिवार के निवासियों के अपस्मार्ग रोग, देवविद्ध से सर्वनाश, स्तंभवेध स्त्री दोष तथा ब्रह्मविद्ध से कुलनाश हो जाता है।
  • यदि घर का मुख्य द्वार मिट्टी के टीले, सूखी लकड़ी, खिडक़ी तथा द्वार भित्ति शैया आदि किसी से वेधित न हो तो वह द्वार मंगलकारी माना जाता है। वास्तु दृष्टि से दक्षिण द्वार हमारी रक्षा करता है और सामने की दृष्टि का वेध समूचे कुल का नाश करता है।
  • यदि भवन की छाया किसी पास के कुएं पर पड़ती हो तो उसमें निवास शुभ नहीं माना गया है। अत: ऐसे भवन के लिए वास्तुपुरुष की पूजा कर निदान करना चाहिए। दूसरे व तीसरे प्रहर के समय वृक्ष या किसी भवन की छांव घर पर ठीक नहीं है।
  • घर का मुख्य द्वार के सामने चौराहा, तिराहा अथवा मुख्य सड़क नहीं होनी चाहिए। इससे घर में अशांति का ग्रहण लग जाता है और उस भवन में रहने वाले नित नई मुसीबतों में फंसे रहते हैं।
  • सबसे अच्छा तो यही है कि इन सभी दोषों से बचा जाएं फिर भी अगर ये दोष हो तो इन सभी वास्तु दोषों से बचने के लिए घर के मुख्य द्वार पर अष्टकोणीय शीशा (Mirror) लगा देना चाहिए जिसमें सामने वाली वस्तु का प्रतिबिम्ब दिखता हो। इससे काफी हद तक वास्तु दोष सही हो जाता है।

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