आज गुरुवार को अनुराधा नक्षत्र ने बनाया शुभ मुहूर्त, आप भी ऐसे लाभ उठाएं

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Published: 05 Apr 2018, 09:12 AM IST

सूर्योदय से प्रात: ९.१९ तक सर्वार्थसिद्धि नामक शुभ योग है।

पंचमी पूर्णा संज्ञक तिथि सायं ७.०१ तक, इसके बाद षष्ठी नन्दा संज्ञक तिथि प्रारम्भ हो जाएगी। पंचमी तिथि में यथा आवश्यक समस्त शुभ व मांगलिक कार्य और सभी चंचल व स्थिर कार्य करने चाहिए पर ऋण नहीं देना चाहिए। षष्ठी तिथि में वास्तु, अलंकार व अन्य मांगलिक कार्यादि सिद्ध होते हैं।

नक्षत्र: अनुराधा ‘मृदु व तिङ्र्यंमुख’ संज्ञक नक्षत्र प्रात: ९.१९ तक, इसके बाद ज्येष्ठा ‘तीक्ष्ण व तिङ्र्यंमुख’ संज्ञक नक्षत्र है। ज्येष्ठा गण्डान्त मूल संज्ञक नक्षत्र भी है। अनुराधा नक्षत्र में सभी शुभ व मांगलिक कार्य, वास्तु व यात्रादि शुभ कहे गए हैं।

योग: व्यतिपात नामक अत्यंत बाधाकारक योग रात्रि १.२२ तक, इसके बाद वरियान नामक नैसर्गिक शुभ योग है। विशिष्ट योग: सूर्योदय से प्रात: ९.१९ तक सर्वार्थसिद्धि नामक शुभ योग है। करण: तैतिल नामकरण सायं ७.०१ तक, इसके बाद गरादि करण हैं।

श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज सूर्योदय से प्रात: ७.५० तक शुभ, पूर्वाह्न १०.५७ से अपराह्न ३.३६ तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत तथा सायं ५.०९ से सूर्यास्त तक शुभ के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर १२.०५ से १२.५४ तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।

शुभ मुहूर्त: उपर्युक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार आज किसी शुभ व मांगलिक कार्यादि के शुभ व शुद्ध मुहूर्त नहीं है।

व्रतोत्सव: आज गुरु तेगबहादुर जयंती (प्राचीन मत से), व्यतिपात पुण्यं तथा गण्डमूल प्रारम्भ प्रात: ९.१९ से। गण्डमूल में जन्मे जातकों की नक्षत्र शांति करा देना चाहिए। चन्द्रमा: चन्द्रमा सम्पूर्ण दिवारात्रि वृश्चिक राशि में है। दिशाशूल: गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। चन्द्र स्थिति के अनुसार आज उत्तर दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद है। राहुकाल: दोपहर बाद १.३० से अपराह्न ३.०० बजे तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।

आज जन्म लेने वाले बच्चे
आज जन्म लेने वाले बच्चों के नाम (नो, या, यी, यू) आदि अक्षरों पर रखे जा सकते हैं। इनकी जन्म राशि वृश्चिक है तथा जन्म ताम्रपाद से है। सामान्यत: ये जातक माननीय, दीर्घायु, बुद्धिमान, सत्यप्रिय, जितेन्द्रिय पर ज्येष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातक थोड़े क्रूर, भोगी होकर भी विद्वान होते हैं। इनकी आदत अच्छे कार्यों में भी कमी ढूंढने की होती है। ज्येष्ठा गण्डान्त मूल संज्ञक नक्षत्र भी है। अत: ज्येष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातकों के संभावित अरिष्ट निवारण की दृष्टि से २७ दिन बाद जब ज्येष्ठा नक्षत्र की पुनरावृत्ति हो, उस दिन मूल शांति करा देना हितकर है। वृश्चिक राशि वाले जातकों की दूर परे की यात्रा हो सकती है।

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