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अगर आप जा रहे हैं यात्रा पर तो भूलकर भी इस चीज़ को ना करें अनदेखा, देखने मात्र से हो जाता है भाग्योदय

By Tanvi Sharma

Jul, 04 2018 06:27:42 (IST)

अगर आप जा रहे हैं यात्रा पर तो भूलकर भी इस चीज़ को ना करें अनदेखा, देखने मात्र से हो जाता है भाग्योदय

अगर आप जा रहे हैं यात्रा पर तो भूलकर भी इस चीज़ को ना करें अनदेखा, देखने मात्र से हो जाता है भाग्योदय

पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा हर साल बड़े धूम धाम से निकली जाती है जिसमें करोड़ो श्रद्धालु रथ यात्रा में शामिल होते है। इस रथ यात्रा में मंदिर के तीनों देवता,भगवान जगन्नाथ,उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा तीनों अलग-अलग रथों में विराजमान होकर नगर में यात्रा के लिए निकलते हैं। यह उत्सव कई वर्षों से बहुत ही हर्षोल्लस के साथ मनाया जाता है।

शास्त्रों और पुराणों में भी रथ-यात्रा का महत्व बताया गया है। स्कन्द पुराण में बताया गया है की रथयात्रा में जो व्यक्ति श्री जगन्नाथ जी के नाम का कीर्तन करते हुए पूर्ण भक्तिभाव से गुंडीचा नगर तक पहुंच जाता है। वे लोग पुनर्जन्म से मुक्त हो जाते हैं और जो व्यक्ति प्रभु जगन्नाथ को प्रणाम करते हुए रास्ते में धूल-कीचड़ आदि में लोट-लोट कर जाते हैं। कहा जाता है की ऐसे लोग सीधे भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त होते हैं। वहीं जो लोग गुंडिचा मंडप में रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम और सुभद्रा देवी के दर्शन दक्षिण दिशा को आते हुए करते हैं उन लोगों को मोक्ष मिलता है। यह पर्व या उत्सव ऐसा उत्सव होता है जिसमें भगवान जगन्नाथ स्वयं चलकर जनता के बीच दर्शन देने आते हैं। जनता के बीच वे उनका सुख-दुख बांटते हैं।

ओडिशा की यात्रा आपको एक ऐसी धरती पर ले जाएगी, जहां भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी और भयंकर लड़ाइयां (कलिंग युद्ध) लड़ी गई। जिसकी वजह से अशोक एक सम्राट से बौद्ध के मार्ग पर चलने वाले सबसे बड़े संत में तब्दील हुए। जगन्नाथ मूर्ति की स्थापत्य कला और समुद्र तट पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। कोणार्क का अद्भुत सूर्य मन्दिर, भगवान बुद्ध की अनुपम मूर्तियों से सजा धौल-गिरि और उदय-गिरि की गुफ़ाएं, जैन मुनियों की तपस्थली खंड-गिरि की गुफ़ाएं, लिंग-राज, साक्षी गोपाल और भगवान जगन्नाथ के मन्दिर दर्शनीय है। पुरी और चन्द्रभागा का मन तो सुभाने वाला समुद्री किनारा, चन्दन तालाब, जनकपुर और नन्दनकानन अभ्यारण दर्शनीय स्थल है।

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