बद्रीनाथ: इतिहास में पहली बार सूख गया तप्तकुंड का चमत्कारी जल

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Published: 11 Jun 2020, 08:07 AM IST

हर किसी को आश्चर्य...

miraculous water of Taptakund dried up of Badrinath Dham- बद्रीनाथ के तप्तकुंड का चमत्कारी जल इतिहास में पहली बार सूखा

कोरोना के संक्रमण काल के बीच पिछले दिनों बद्रीनाथ तीर्थ के द्वार खुले, इस दौरान जहां घी का लेप गीला रहना वर्षों बाद हुए चमत्कार के रूप में माना जा रहा था, वहीं एक बार फिर बद्रीनाथ के इतिहास में पहली बार एक ऐसी स्थिति बनी है, जिसने हर किसी को आश्चर्य में डाल दिया है।

पहले ये मिले थे शुभ संकेत...
असल में बद्रीनाथ के जब कपाट खुलते हैं तो यहां भगवान को लगाया गया घी का लेप सर्दी के चलते सख्त हो जाता है, लेकिन इस बार यह घी गीली अवस्था में मिला, जिसे शुभ संकेत के रुप में माना जा रहा था।

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अब हुई इतिहास में पहली बार ये घटना...
वहीं एक बार फिर बदरीनाथ धाम में एक नई स्थिति देखने को मिली है, जिसके संबंध में बताया जा रहा है कि ये इतिहास में पहली बार हुआ है। दरअसल इस बार बद्रीनाथ के ऐतिहासिक तप्तकुंड में पानी नहीं है।

बद्रीनाथ के तत्पकुंड का महत्व
यूं तो पहाड़ी इलाके रहस्य व रोमांच से भरे होते हैं लेकिन बद्रीनाथ स्थित तप्त कुण्ड का रहस्य सबकी समझ से परे है। यह गरम पानी का कुण्ड मंदिर की कुछ सीढिय़ां उतरने के बाद नीचे की ओर है।

यूं तो इस जगह पर जून के महीने में भी ठंड की वजह से नलकों का पानी जम जाता है, फिर यह उबलता हुआ गरम पानी कैसे। साधु संत व पुजारियों का कहना है कि भक्तों की सुविधा के लिए भगवान ने यहां गरम जल की व्यवस्था की है। मान्यता है कि इस कुण्ड में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और रोगों का विनाश होता है।

कहा जाता है कि प्राचीन काल में जहां भगवान बदरीनाथ जी ने तप किया था, वहीं पवित्र-स्थल आज तप्त-कुण्ड के नाम से विश्व-विख्यात है और उनके तप के रूप में आज भी उस कुण्ड में हर मौसम में गर्म पानी उपलब्ध रहता है।

तप्तकुंड में स्नान करने का अपना महत्व है। इस कुंड में खुद ही गर्म पानी निकलता है जिसका धार्मिक महत्व तो है ही साथ ही इससे स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है। कहा जाता है कि इस पानी में गंधक की मात्रा काफी ज्यादा है। इसलिए इस कुंड के पानी में स्नान करने से चर्म रोगों से भी निजात मिलती है। यही कारण है कि चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्री इस कुंड में एक बार स्नान जरूर करते हैं।

वहीं आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार प्राकृतिक तौर पर गर्म पानी के स्रोत गंधक से निकलते हैं। गंधक का पानी चर्म रोगों से निदान के लिए काफी फायदेमंद होता है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गर्म पानी में स्नान से थकावट दूर होना भी स्वाभाविक है।

पूजा से पहले इसी तप्तकुंड के गर्म पानी में स्नान...
धाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु पूजा से पहले इसी तप्तकुंड के गर्म पानी में स्नान करते थे। इसे चमत्कार ही कहेंगे कि इस कुंड में प्राकृतिक रूप से ही हर समय गर्म पानी आता है।

पानी के मूल स्रोत को किया बंद
दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए पानी के मूल स्रोत को बंद कर दिया गया है। जिसकी वजह से यह कुंड अब सूखा हुआ है। मंदिर समिति का कहना है कि संक्रमण को देखते हुए एहतियातन तप्तकुंड को खाली कर दिया गया है।

पानी की निकासी कुंड के बाहर से सीधे अलकनंदा में...
वहीं कुंड के सुखने के चलते यहां आने वाले पानी के मूल स्रोत को अब बंद कर पानी की निकासी कुंड के बाहर से सीधे अलकनंदा में कराई जा रही है। बदरीनाथ धाम के दर्शन से पहले श्रद्धालु तप्तकुंड में स्नान करते हैं। अब चारधाम यात्रा शुरु होने वाली है। जिसे देखते हुए बदरीनाथ धाम के कर्मचारियों ने तप्तकुंड को फिलहाल सुखा दिया है।

अब ये की जा गई व्यवस्था...
बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल के अनुसार धाम में यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि तप्तकुंड सूखा पड़ा है। पूर्व में यहां कुंड में सैकड़ों लोग एक साथ स्नान करते थे। जिसे देखते हुए कुंड से बाहर तीन धारों में गर्म पानी छोड़ा जा रहा है। श्रद्धालु इन धारों पर स्नान कर सकते हैं।