समर सीजन चौपट होने के बाद अब मानसून से उम्मीदें!

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Updated: 05 Jun 2020, 11:01 PM IST

- हालांकि फैशन डिजाइनर्स अपने काम को दे रहे हैं नया रूप
- मानसून सीजन पर भी गहरा सकते हैं संकट के बादल

जयपुर. फैशन का समर सीजन चौपट होने के बाद अब मानसून से उम्मीदें हैं। हालांकि मानसून सीजन में भी संकट के बादल के आसार बन रहे हैं। नामी फैशन स्टोर्स जहां यह मान रहे हैं कि मानसून और आगामी फेस्टिवल सीजन में भी बाजार के उपर उठने की उम्मीदें कम हैं, वहीं फैशन डिजाइनर्स को कुछ उम्मीदें जरूर नजर आ रही है। यही वजह है कि उन्होंने अपने काम को नया रंग और रूप, देने की तैयारी कर ली है। डिजाइनर्स का मानना है, कि लहरिया और मोठड़ा के खुशनुमा रंग जरूर सकारात्मकता का संचार करेंगे और ठप्प पड़ा फैशन बाजार जरूर ऊपर उठेगा।

मुझे हैं पूरी उम्मीद
फैशन डिजाइनर क्षितिजा राणा बताती हैं कि कोरोना काल में कुछ भी अनुमान लगाना बहुत मुश्किल हैं, लेकिन लोगों की सोच जरूर बदल रही है, सेफ्टी के साथ वे आगे बढ़ रहे हैं, ऐसे में फैशन जगत में भी उम्मीदें जगी हैं। आने वाले मानसून और फे स्टिवल सीजन के लिए तैयारी शुरू कर दी है। मुझे लगता है कि मानसून सकारात्मकता का मौसम लाएगा।
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काम फिर से शुरू किया है
फैशन डिजाइनर इंदा कुमारी मीणा बताती हैं कि लॉकडाउन के बाद फिर से काम शुरू किया है। आगामी मौसम और त्योहारों को देखकर आउटफिट्स तैयार कर रहे हैं। उम्मीद करते हैं कि बाजार की स्थिति सुधरे और आगामी सीजन हमारे लिए अच्छा जाए।
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डिजाइन किया 'फ्यूचर ऑफ पोस्ट पैनडेमिक फैशनÓ
टेक्सटाइल और ग्राफिक डिजाइनर तुलिका सक्सेना ने बताया कि मैंने हाल ही 'फ्यूचर ऑफ पोस्ट पैनडेमिक फैशनÓ डिजाइन किया है। जिसमें लहरिया और बंधेज में अटैच मास्क के साथ इको फै्रंडली डिजाइन भी शामिल हैं। मानसून के मुताबिक भी नए डिजाइन तैयार किए हैं। माहौल को देखते हुए डार्क कलर्स से दूरी बनाई है और एनर्जेटिक पेस्टल कलर्स को शामिल किया है।
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दूसरा पहलू यह भी लोग खरीदने नहीं आ रहे
एक नामी फैशन स्टोर के डायरेक्टर रानू जिंदल बताते हैं कि इस समय बाजार का बढऩा बहुत मुश्किल है। बाजार तो खुल गए हैं, लेकिन लोग खरीदने नहीं आ रहे हैं। फिर आगे का अभी कुछ नहीं कहां जा सकता। मानसून फैशन मार्केट की स्थिति जुलाई में ही साफ होगी। वहीं बड़ी चौपड़ स्थित एक नामी फैशन स्टोर के फाउंडर रमेश चंद अग्रवाल बताते हैं कि कोविड काल में आने वाला सीजन भी मुश्किलों में हैं। सावन में भी एथनिक ड्रेसेज की खरीदारी की उम्मीदें बहुत कम हैं।