गुलाब की महक, पपीते की मिठास, कमाई पांच लाख पार

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Updated: 02 Aug 2021, 08:25 AM IST

- पाली के किसान तोलाराम घांची ने छोड़ी परम्परागत फसलों की खेती
- गुलाब व पीपते की खेती से अब कमा रहे लाखों रुपए

-राजीव दवे
पाली। जहां चाह, वहां राह... यह बात पाली के रहने वाले किसान तोलाराम घांची पर सटीक बैठती है। जिन्होंने परम्परागत फसलों (मूंग, ज्वार, तिल व गेहूं आदि) की खेती छोडकऱ नवाचार किया और आज उनकी कमाई सालाना पांच लाख रुपए से ऊपर पहुंच गई है। अब प्रयोगात्मक रूप में उन्होंने पाली जैसे गर्म जलवायु वाले क्षेत्र में अंजीर व आम के पौधे भी लगाए है। वे कहते हैं कि कड़ी मेहनत व लगन से काम किया जाए तो हर मुश्किल राह आसान हो जाती है। इसी सिद्धान्त से आज वे खेती में नवाचार कर सफलता प्राप्त कर सके है।

रानी के किसान को देखा और शुरू की खेती
तोलाराम बताते हैं कि करीब तीन साल पहले मुंडारा माता के दर्शन कर लौटते समय रानी के एक खेती में किसान को गुलाब के पौधे लगाते देखा। इस पर उनके मन में गुलाब की खेती का विचार आया और उन्होंने आते ही खेती की खड़ाई कर तीसरे दिन देसूरी नर्सरी से देसी गुलाब के 2000 पौधे लाकर लगाए। उनसे चार माह में फूल मिलना शुरू हो गए। आज रोजाना 20 से 25 किलो फूल बेच रहे हैं। अब खेत में 3000 हजार गुलाब के पौधे लगे हैं। गुलाब की खेती बेहतर होने पर उन्होंने ड्रिप भी लगवाई। वे कहते है इस खेती में मेहनत अधिक है। पौधों का ख्याल भी अधिक रखना पड़ता है, लेकिन कमाई भी बेहतर है।

सोशल मीडिया पर देखा और लगाए अमरुद
बकौल तोलाराम का कहना है कि सोशल मीडिया चैनल पर अमरुद की खेती के बारे में देखकर उन्होंने 10 लाल अमरुद के पौधे लगाए। उनकी एक साल में फसल आई और अच्छी पैदावार हुई। इस पर होकर 200 पौधे लगा दिए। अब उन्होंने पींग अमरुद लगाए है। जो बाजार में 200 से 250 रुपए किलो तक बिकते हैं।

देसी की जगह अब ताइवानी पपीते
इसके साथ ही वे पपीते की खेती कर रहे है। उन्होंने बताया कि पहली बार देसी पपीते के 200 पौधे लगाए थे। उनमें से अब कुछ ही बचे है। इस कारण उन्होंने लेडटेडी ताइवानी पपीते के 150 नए पौधे लगाए है। वे पेड़ पर पक्के पपीते बेचते हैं। जिनकी बाजार में अच्छी मांग रहती है। केले के भी वे 150 पौधे लगाए है।

सोलर प्लांट से करते सिंचाई
खेत में सिंचाई व घर की बिजली के लिए वे डिस्कॉम पर निर्भर नहीं है। उन्होंने खेत में पांच किलो वाट का सोलर प्लांट लगा रखा है। इससे उत्पन्न होने वाली बिजली से ही वे खेत में सिंचाई करते है। उन्होंने बताया कि प्लांट लगाने के बाद से अब तक उन्होंने एक रुपया बिजली पर खर्च नहीं किया है।