बैडमिंटन में सायना, सिंधु की जगह कौन लेगा

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Updated: 16 Feb 2019, 06:04 PM IST

सायना नेहवाल और पीवी सिंधु कई साल से भारत के लिए अच्छा खेल रही हैं। सायना 10 साल से ज्यादा से बैडमिंटन खेल रही है, वहीं सिंधू भी 2012 से बैडमिंटन खेल रही है। दोनों की बदौलत भारत बैडमिंटन में एक मजबूत चुनौती पेश कर रहा है।

नई दिल्ली।बैडमिंटन जगत में सायना नेहवाल की एंट्री सनसनी के रूप में हुई थी...ये वो दौर था जब बैडमिंटन जगत में चीन का एकछत्र राज था। कोई भारतीय सोच भी नहीं सकता था कि कोई महिला बैडमिंटन खिलाड़ी आएगी और बैंडमिटन की एक से 10 की रैंकिंग पर हमेशा कब्जे रखने वाले चीन को चुनौती देगी। 2006 में, सायना अंडर 19 राष्ट्रीय चैंपियन बनीं और दो बार प्रतिष्ठित एशियन सैटेलाइट बैडमिंटन टूर्नामेंट जीतकर इतिहास बनाया। वह ऐसा करने वाली पहली खिलाड़ी बनीं। 86 वें वरीयता वाली सायना ने टूर्नामेंट में खिताब के लिए मलेशिया की जूलिया वोंग पेई जियान को हराया, लेकिन इससे पहले साइना ने पहले दुनिया की नंबर चार जू हुआवे और कई शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ियों को हराया।

सायना ने लंदन ओलंपिक में जीता ब्रांज मेडल

विश्व फतह के अश्वमेध पर निकली सायना ने शीर्ष वरीय चीनी खिलाडी वांग यिहान के खिलाफ एक कठिन लड़ाई लड़ी, लेकिन हार गई और 2006 बीडब्ल्यूएफ विश्व कनिष्ठ चैंपियनशिप की उपविजेता बनीं। वह नौवीं वरीयता प्राप्त जापानी सायाका सातो को हराकर प्रतियोगिता जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। साइना के करियर का सबसे बड़ा माइलस्टोन रहा लंदन ओलंपिक में महिला एकल स्पर्धा में ब्रांज मेडल हासिल करना।

2012 में आयी एक और चैंपियन खिलाड़ी

2012 में भारतीय बैडमिंटन के लिए एक और खुशखबरी आई। बैडमिंटन में पीवी सिंधु के रूप में एक और महिला खिलाड़ी की एंट्री हुई। 7 जुलाई 2012 को सिंधु ने एशिया यूथ अंडर-19 चैम्पियनशिप के फाइनल में जापानी खिलाड़ी नोजोमी ओकुहरा को हराया। उन्होंने 2012 में चीन ओपन सुपर सीरीज टूर्नामेंट में लंदन ओलंपिक 2012 के स्वर्ण पदक विजेता चीन के ली जुएराऊ को हराकर सेमी फाइनल में प्रवेश किया। सिंधू चीन के ग्वांग्झू में आयोजित 2013 के विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में एकल पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी है। इसमें उन्होंने ऐतिहासिक कांस्य पदक हासिल किया था। भारत की उभरती हुई इस बैडमिंटन खिलाड़ी ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए 1 दिसम्बर 2013 को कनाड़ा की मिशेल ली को हराकर मकाउ ओपन ग्रां प्री गोल्ड का महिला सिंगल्स खिताब जीता।

सिंधु ने रियो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता

सिंधू को अपने करियर की सबसे बड़ी कामयाबी 2016 के रियो ओलंपिक में मिली। रियों में पदकों के सूखे के बीच सिंधु ने सिल्वर मेडल जीता। सिंधु और साइना दोनों ही पुलेला गोपीचंद की एकेडमी से आईं। कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दोनों की कई बार आमने सामने आ चुकी है। सिंधु के बैडमिंटन में आने से पहले साइना देश की सबसे अच्छी खिलाड़ी थी, लेकिन सिंधु के आने बाद लगा सायना के मुकाबले सिंधु के मुकाबले ज्यादा अटैकिंग खिलाड़ी हैं। दोनों महिला खिलाड़ी रैकिंग में एक दूसरे से आगे-पीछे होती रहती है। दोनों ही खिलाड़ी टूर्नामेंट भी जीतती रही हैं।

सायना, सिंधु ने बैडमिंटन को बनाया लोकप्रिय

सायना और पीवी सिंधु दो ऐसी बैडमिंटन खिलाड़ी जिन्होंने पूरी दुनिया में भारतीय बैडमिंटन को एक नई पहचान दिलाई। एक ने बैडमिंटन को लोकप्रिय बनाया और दूसरी ने उस लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी। सायना और पीवी सिंधु की मेहनत ही है कि आज देश-दुनिया में भारत के इन दो बैडमिंटन खिलाड़ियों का नाम सभी जानते हैं।

सायना, सिंधु की जगह कौन लेगा ?

सायना और सिंधु दोनों ही देश के लिए अच्छा खेल रही है, लेकिन सायना जहां पहले से अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन खेल रही हैं, वहीं सिंधु 2012 से अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन खेल रही हैं। सायना के आने के लगभग चार साल बाद सिंधु के रूप में देश को एक और चैंपियन खिलाड़ी मिल गई थी, लेकिन सायना सिंधु के बाद तीसरी भारतीय महिला खिलाड़ी अब तक अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन में नहीं आ पाई है। आज सायना और सिंधु के होने से भारत बैडमिटन जगत में एक बड़ी शक्ति के रुप में खड़ा नजर आता है लेकिन जब ये दोनों खिलाड़ी रिटायर हो जाएंगी तो इनकी जगह कौन लेगा।

वैष्णवी और अश्मिता ने दी साइना, सिंधु को टक्कर

नैशनल चैंपियनशिप में दूसरी वरीयता प्राप्त सायना ने वैष्णवी भाले को हराया। पहली बार सीनियर नैशनल्स के सेमीफाइनल में खेल रहीं नागपुर की वैष्णवी ने काफी अच्छी कोशिश की लेकिन सायना के अनुभव के सामने वह कुछ खास नहीं कर सकीं। वहीं सिंधु ने अश्मिता चालिहा को 21-10, 22-20 से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट सिंधु ने 38 मिनट में अपना सेमीफाइनल मैच जीता। पहला गेम 21-10 से जीतने के बाद सिंधु को दूसरे गेम में कड़ी चुनौती मिली लेकिन अश्मिता पर 22-20 से दूसरे गेम में जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई। दो जूनियर खिलाड़ियों का विश्व स्तर की दो चैंपियन खिलाड़ियों को चुनौती देना भारत के बैडमिंटन प्रेमियों के खुशी की खबर है। जिस तरीके से वैष्णवी और अश्मिता ने सायना सिंधु को टक्कर दी है। इसके एक बात तो साफ है कि हमारे देश के बैडमिंटन का भविष्य उज्जवल है।