Book Discussion : चीन की चाल है आक्रामक रणनीति !

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Published: 25 Sep 2021, 09:05 AM IST

द लॉन्ग गेम: चाइना'ज ग्रैंड स्ट्रेटेजी टु डिसप्लेस अमेरिकन ऑर्डर पर पुस्तक चर्चा...
अमरीका को चीन से बात करते वक्त बीजिंग की ही भाषा बोलनी होगी ।

क्या पिछले एक दशक से चीन केवल एक ही आदमी के इशारों पर चल रहा है? अक्रामक, संकीर्ण और खुद को सर्वेसर्वा मानकर चलने का जो रास्ता चीन ने अख्तियार किया है, क्या वह केवल चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अक्खड़पन का नतीजा है या फिर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी महासचिव के इस चेहरे के पीछे कम्युनिस्ट पार्टी के 8 करोड़ सदस्यों की अधिक भयावह मंशा छिपी है? इन सवालों के जवाब इसलिए भी महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि अमरीका चीन के साथ संबंधों पर अपनी नई नीति तैयार कर रहा है। सालों बाद चीन पर आई महत्त्वपूर्ण किताब में भी इसी विषय पर चर्चा की गई है। लेखक रश दोशी की किताब का शीर्षक है- 'द लॉन्ग गेम: चाइना'ज ग्रैंड स्ट्रेटेजी टु डिसप्लेस अमेरिकन ऑर्डर'।

दोषी का तर्क है कि जिनपिंग अपने पूर्ववर्ती नेताओं से अलग हटकर नया कुछ नहीं कर रहे हैं। ये सब कमोबेश चीन के निर्धारित रास्ते पर ही चलते आए हैं। हो सकता है कि जिनपिंग इस रास्ते के खतरनाक मोड़ पर तेजी से बढ़ रहे हों। दोषी कहते हैं कि अमरीका से टक्कर लेना, अंतरराष्ट्रीय समझौते तोडऩा, हॉन्गकॉन्ग में चिंताजनक हालात पैदा करना, दक्षिण चीन सागर में द्वीपों पर सेना की तैनाती, ताईवान को धमकाना और हजारों उईगर मुसलमानों को शिंजियांग में बंद कर देना जैसी शी की नीतियां उनके पूर्ववर्ती राष्ट्राध्यक्षों के कार्यों पर ही आधारित हैं। दोशी के अनुसार चीनी विदेश नीति का मुख्य मकसद एशिया ही नहीं, पूरे विश्व से अमरीकी प्रभुत्व समाप्त कर उसकी जगह खुद ले लेना है। दोषी के निष्कर्ष रक्षा विभाग में अधिकारी रहे माइकल पिल्सबरी की 2015 में आई बेस्टसेलर 'द हंड्रेड ईयर मैराथन: चाइनाज सीक्रेट स्ट्रैटेजी टु रिप्लेस अमेरिका एज द ग्लोबल सुपर पावर' से थोड़े मिलते जुलते हैं, लेकिन कुछ मायने में दोषी के विचार अलग हैं। 'द लॉन्ग गेम' चीनी विषय पर लिखा गया विद्वत्तापूर्ण साहित्य है, जबकि पिल्सबरी की किताब किस्सों पर आधारित है, जिसमें आलोचकों ने कई त्रुटियां गिनाई हैं।

दोषी वाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) में चीन के निदेशक हैं। उन्होंने किताब में तीन ऐसे मोड़ों का जिक्र किया है, जो चीन को अमरीका के सामने खड़ा करने में सहायक रहे। पहला है 1989 से 91 के बीच चीन में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन। दूसरा कुवैत से सद्दाम हुसैन को हटाने में अमरीका का सैन्य शक्ति प्रदर्शन और सोवियत संघ का विघटन। वर्ष २००९ में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी 'छिपाना नीति' से आगे बढ़ कर 'सक्रिय रूप से काम करने' पर आ गई। अमरीका क तीसरा मोड़ था 2017 के अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव, जब डॉनल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति बने। तब जिनपिंग ने इसे नया युग बताते हुए कहा कि अब चीन दुनिया का नेतृत्व करेगा। दोषी कहते हैं कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में अमरीका के सामने कई चुनौतियां हैं। दोषी लिखते हैं कि शी ने चीन का भविष्य लिख दिया है। चीन को रोकने के लिए अमरीका को अपनी ताकत दोबारा बनानी पड़ेगी। अमरीका को चीन से बात करते वक्त बीजिंग की ही भाषा बोलनी होगी।

- जॉन पॉम्फ्रेट, द वाशिंगटन पोस्ट के पूर्व बीजिंग ब्यूरो प्रमुख और 'द ब्यूटीफुल कंट्री एंड द मिडल किंगडम: अमेरिका एंड चाइना, 1776 टु द प्रेजेंट' के लेखक

रश दोशी
बाइडन प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में चीन के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।
(प्रकाशक: आक्सफोर्ड
पृ.सं.: 419, मू.: 27.95 डॉलर)

(द वाशिंगटन पोस्ट से विशेष अनुबंध के तहत)