आपका हक : चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर शिकंजा जरूरी

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Published: 04 Aug 2021, 11:10 AM IST

child pornography : आइटी अधिनियम की धारा 67 के तहत चाइल्ड पोर्नोग्राफी को अपराध घोषित किया गया है। इसके तहत पहली बार अपराध करने पर पांच साल का कारावास और दस लाख रुपए का जुर्माना।

आभा सिंह

(लेखिका सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हैं)

Child Pornography : सूचना प्रौद्योगिकी कानून (आइटी कानून IT ACT ), 2000 भारत में साइबर क्राइम कानूनों का आधार है। हम सभी इन्टरनेट से जुड़ी कई तरह की गतिविधियां से जुड़े रहते हैं। इन सभी को सुरक्षित करने के लिए एक अधिनियम बनाया गया, जिसे हम आइटी अधिनियम 2000 कहते है। इस अधिनियम के तहत बताया गया है कि सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते समय किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि कोई अपराध न हो पाए। आइटी अधिनियम की धारा 67 के तहत चाइल्ड पोर्नोग्राफी को अपराध घोषित किया गया है। इसके तहत पहली बार अपराध करने पर पांच साल का कारावास और दस लाख रुपए का जुर्माना। इसके बाद भी अपराध करने पर दस लाख रुपए के जुर्माने के साथ सात वर्ष के कारावास का प्रावधान है।

लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पोक्सो अधिनियम) में भी बाल अश्लीलता के संबंध में दंड का प्रावधान है। पोक्सोअधिनियम की धारा 14 बच्चों के यौन अंगों का चित्रण, वास्तविक या नकली यौन गतिविधियों में बच्चे की भागीदारी और बच्चे के अभद्र या अनुचित चित्रण सहित किसी भी प्रकार के उपयोग को अपराध मानती है। एक बच्चे की सहमति दोनों कानूनों के तहत अप्रासंगिक है। कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठन जैसे ट्रिपलाइन नियमित रूप से दुनिया भर में इस तरह के मामलों की निगरानी करते हैं। वे अपराधियों के आइपी पते को ट्रैक करते हैं और संबंधित देशों के गृह विभागों को भेजते हैं। फिर राज्य पुलिस को सूचना अग्रेषित की जाती है, जो इसे आगे आवश्यक कार्रवाई करने के लिए जिला स्तर के अधिकारियों को भेजता है।

इंटरपोल और इंटरनेट वॉच फाउंडेशन की मदद से, केंद्र ने पिछले चार महीनों में चाइल्ड पोर्नोग्राफी की 3,500 से अधिक वेबसाइटों को ब्लॉक करने में कामयाबी हासिल की है। इंटरपोल बाल यौन शोषण वाली वेबसाइटों तक पहुंच प्राप्त करने का एक प्रमुख स्रोत है। सिर्फ चाइल्ड पोर्न ही समस्या नहीं है, हर तरह की पोर्न सामग्री पर लगाम जरूरी है। उच्चतम न्यायालय केंद्र से इंटरनेट पर सभी प्रकार की पोर्नोग्राफी को रोकने के लिए तरीके और साधन खोजने के लिए कह चुका है। न्यायालय ने कहा था कि अश्लीलता भारतीय कानून के तहत एक अपराध है और इसे निरंतर नहीं होने दिया जा सकता। पोर्न फिल्मों के निर्माण के रैकेट से जुड़े होने के आरोप में अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति की गिरफ्तारी से इस समस्या की गंभीरता का पता चलता है।