चेतावनियों की अनदेखी खतरे का संकेत

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Published: 22 Jul 2021, 07:58 AM IST

सीरो सर्वे के अनुसार देश की दो तिहाई आबादी में कोरोना के एंटीबॉडी मौजूद हैं, यानी एक तिहाई लोगों को अब भी कोरोना संक्रमण का खतरा बना हुआ है। तीन में से एक व्यक्ति संक्रमण का शिकार हो सकता है, जो वाकई गंभीर बात है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की तरफ से देश में किए गए चौथे सीरो सर्वे से जिस तरह के तथ्य सामने आए हैं, उनसे साफ है कि कोरोना संक्रमण को लेकर अभी सावधान रहना जरूरी हो गया है। सीरो सर्वे के अनुसार देश की दो तिहाई आबादी में कोरोना के एंटीबॉडी मौजूद हैं, यानी एक तिहाई लोगों को अब भी कोरोना संक्रमण का खतरा बना हुआ है। तीन में से एक व्यक्ति संक्रमण का शिकार हो सकता है, जो वाकई गंभीर बात है।

कोरोना की दूसरी लहर के धीमी पड़ जाने के बाद देश के विभिन्न भागों में अनलॉक की प्रक्रिया तेजी से शुरू हुई है। इसकी वजह से लोगों का आवागमन तेजी से बढ़ रहा है। बाजारों ही नहीं, पर्यटन स्थलों पर भी भीड़ नजर आने लगी है। ऐसी हालत में आइसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव की इस सलाह के प्रति गंभीरता जरूरी है कि सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक या किसी भी तरह की भीड़ से बचना आवश्यक है। अनावश्यक यात्रा को भी टालना चाहिए। बेहतर तो यह है कि वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने के बाद ही यात्रा की जाए। कुंभ मेले से मिले सबक के बाद उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश जैसे राज्यों में कांवड़ यात्राओं पर रोक लगाकर भीड़ को कम करने की कोशिश जरूर की गई है। अन्य आयोजनों में भी भारी संख्या में लोगों को एकत्रित होने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। कोरोना की तीसरी लहर का खतरा बढ़ता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुखिया टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस कह चुके हैं कि कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर अपने शुरुआती दौर में है। यानी तीसरी लहर सच साबित हो रही है, जिससे सतर्क रहना जरूरी है। वैसे इतिहास भी यह बताता है कि कोई भी महामारी एक बार में गायब नहीं होती। उसकी कई लहरें आती हैं। इसलिए तीसरी लहर से जुड़ी चेतावनियों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

राहत की बात यह है कि इस बार महामारी से निपटने के लिए टीके के रूप में बड़ा हथियार हमारे पास है। इसलिए टीकाकरण कार्यक्रम में किसी तहर की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। मुश्किल यह है कि एक तरफ तो लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित करने के लिए सरकार जागरूकता अभियान चला रही है, दूसरी तरफ टीकाकरण केंद्रों पर लोग घंटों इंतजार के बाद भी बिना टीका लगाए निराश वापस घर लौट रहे हैं। इससे साफ है कि सरकार अब भी पर्याप्त टीकों का इंतजाम नहीं कर पाई है, जिससे टीकाकरण नीति पर सवालिया निशान लगता है। तीसरी लहर खतरनाक रूप न ले, इसके लिए सरकार के साथ जनता के स्तर पर भी जागरूकता और सावधानी की जरूरत है।