आपकी बात, अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को बढ़ावा देना कितना उचित है?

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Published: 28 Feb 2021, 07:12 PM IST

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

समन्वय जरूरी
अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों को बढ़ावा देने से हमारे हिंदी माध्यम विद्यालयों की शिक्षा पर प्रश्नचिह्न, तो लगता ही है, साथ ही हमारी युवा पीढ़ी के मध्य विभाजन भी बनाता है। सभी प्रकार की तकनीकी जानकारी के लिए बच्चों को अंग्रेजी का ज्ञान होना आवश्यक है। इसलिए अंग्रेजी की पढ़ाई भी जरूरी है। अत: समाज में समानता स्थापित करने के लिए दोनों माध्यमों का समन्वित रूप बना शिक्षा की व्यवस्था की जाए।
-हेमलता कुमारी, अजमेर
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हिंदी माध्यम स्कूलों का भी ध्यान रहे
वैसे तो हिन्दी हमारी मातृभाषा है, परंतु बिना अंग्रेजी के हमारी शिक्षा अधूरी है। आज के युग में अंग्रेजी भाषा का महत्त्व बढ़ गया है। वैसे भी देश में विदेशी कंपनियों की संख्या बढऩे से अंग्रेजी को ज्यादा तवज्जो मिल रही है। ऐसे माहौल में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को बढ़ावा देना उचित है ,परंतु हिन्दी स्कूलों को किनारे करना भी उचित नहीं है।
-शुभदा भार्गव, अजमेर
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हो रहे हैं जड़ों से दूर
अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को बढ़ावा देना सरासर अनुचित है। दुनिया में ऐसे बहुत सारे देश हैं, जहां पर अंग्रेजी नहीं पढ़ाई जाती है। हमारे लिए तो यह अत्यंत ही शर्मनाक बात है कि हम हमारी प्राचीन गौरवशाली भाषा संस्कृत और हिंदी को छोड़कर अंग्रेजों की भाषा को बढ़ावा देते हैं। इससे न केवल हम अपनी संस्कृति को भूल रहे हैं, अपितु नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से दूर करने का भी अक्षम्य अपराध कर रहे हैं।
-गोपेन्द्र मालवीय, इंदौर
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आधुनिक शिक्षा भी जरूरी
अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को खोले जाने से विद्यार्थियों को मुख्यधारा से जुडऩे का मौका मिलेगा, साथ ही वे नवाचारों को सीख सकेंगे। विद्यार्थियों को अब जरूरत है वर्तमान समय के अनुसार बुनियादी शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा की भी। वैश्विक तौर पर अपने आप को सुदृढ़ बनाने के लिए समयानुसार अंग्रेजी भाषा की अत्यंत आवश्यकता है। इसलिए अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को बढ़ावा देना उचित है
-बिहारी लाल बालान लक्ष्मणगढ़ सीकर
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उच्च प्राथमिक तक अंग्रेजी माध्यम ठीक नहीं
अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा जरूरी है, परंतु प्राथमिक और जहां तक संभव हो उच्च प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए यह कदाचित सही नहीं है। इसकी बजाय उनको संस्कारवान बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
-शैतान स्वामी लिचाना,नावां, नागौर
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नहीं है हितकारी
अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को बढ़ावा देकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना है। हमारी राष्ट्र भाषा प्रत्येक क्षेत्र में सर्वोत्तम है, समृद्धशाली है, बाहर की कोई भी भाषा और संस्कृति हमारे लिए हितकारी नहीं हो सकती। अभी से चेत जाएं, राष्ट्र भाषा एवं प्रदेश की भाषाओं को बढ़ावा दें।
-थानमल जैन, बैगलोर
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अब तो अंग्रेजी का मोह छोड़ें
आजकल माता- पिता अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पढ़ाकर गर्व महसूस करते हैं, मगर वे यह नहीं जानते कि बच्चे अपनी भाषा और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। कुछ बच्चे न तो अंग्रेजी के रह पाते हैं और न ही हिंदी के। अब समय आ गया है जब हिंदी स्कूलों को प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि अपनी भाषा के ज्ञान के बिना व्यक्ति का विकास संभव नहीं।
-साजिद अली, इंदौर
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अंग्रेजी को महत्त्व दिया जाए
शिक्षा का भाषा से सम्बन्ध न हो कर समझ से है, लेकिन वर्तमान समय में उच्च शिक्षा के लिए अंग्रेजी माध्यम का ही विकल्प है। नौकरी और व्यापार के लिए भी अंग्रेजी भाषा की जानकारी होना आवश्यक है। अंग्रेजी भाषा सम्पूर्ण विश्व में जानी जाती है। अत: शिक्षा पद्धति में अंग्रेजी को महत्त्व देना चाहिए।
-राजकुमार सैनी, डिडवाना, दौसा
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मजबूरी है अंग्रेजी माध्यम
शासन द्वारा अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को बढ़ावा देने का मुख्य कारण सरकारी स्कूलों में लगातार दर्ज संख्या का कम होना और अंग्रेजी माध्यम के प्राइवेट स्कूल का लगातार बढऩा है। हम अंग्रेजी के महत्त्व को नहीं नकार सकते, क्योंकि मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई अंग्रेजी में ही होती है। विधि की उच्च शिक्षा भी अंग्रेजी माध्यम से होती है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी अंग्रेजी जरूरी है। इसके बावजूद बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने के लिए मातृभाषा हिंदी की सहायता लेना जरूरी है। इससे बच्चों को समझ विकसित होती है।
-रीना वासनिक, महासमुंद, छत्तीसगढ़
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अंग्रेजी है जरूरी
अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को बढ़ावा देना जरूरी है। आज हम सभी को यह पता है, कि हिंदी माध्यम से पास होने वाले बच्चों को अंग्रेजी में वार्तालाप करने में थोड़ी परेशानी होती है। अंग्रेजी की कम जानकारी के कारण वे अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाते। इसी वजह से अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का महत्त्व बढ़ गया है।
-आस्था गुप्ता, जयपुर
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शिक्षा का माध्यम मातृ भाषा हो
शिक्षा मातृ भाषा में होती है, तो दुनिया की कोई भी भाषा सीखने में बहुत आसानी होती हैं। नई शिक्षा नीति भी यही कहती हैं। व्यक्ति की बुद्धि का विकास मातृभाषा में शिक्षा से होता है। वर्तमान में अंग्रेजी भाषा के स्कूलों को जरूरत से ज्यादा बढ़ावा देना हमारे सामाजिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाएगा। कोई भी भाषा सीखने में बुराई नहीं, लेकिन शिक्षा का माध्यम मातृभाषा ही होनी चाहिए।
-इंदु मोहन जांगिड़, राजसमंद