वैक्सीन का टोकन दिला रहे पत्थर, आखिर किसने बनाया सिस्टम ?

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Updated: 09 Jun 2021, 04:52 PM IST

स्थानीय लोगों की चल रही मनमानी, आसपास से वैक्सीन लगवाने आ रहे लोगों के हाथ लग रही निराशा...

नीमच/जावद. नीमच जिले के सरवानिया महाराज में कोविड के टीकाकरण को लेकर स्थानीय गांव वालों ने टोकन वितरण के लिए अपना नियम बना लिया है। जिसके कारण कई लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल टीकाकरण को लेकर शुरू से लोगों में जद्दोजेहाद देखी जा रही है, पहले ऑनलाइन स्लॉट को लेकर समस्या बनी थी। उसके बाद ऑफलाइन को लेकर जब नियम बनाया और टोकन सिस्टम पहले आओ पहले पाओ चालू हुआ तो सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ीं। अब यहां लोगों ने खुद ही गोले मे पत्थर रखकर अपना नियम बना लिया है। जो कि आए दिन विवादों की वजह बनता नजर आ रहा है।

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सिस्टम पर भारी पत्थर
जावद तहसील के सभी वैक्सीनेशन सेंटर पर टोकन सिस्टम बनाया गया है। लेकिन वैक्सीन के लिए दिए जाने वाले पहले टोकन को लेकर एक अन्य नियम भी लगभग सभी वैक्सीनेशन केन्द्रों पर चालू हो गया है। टीका केंद्र के बाहर बने गोलों मे स्थानीय लोगों द्वारा अलसुबह 4 बजे से ही पत्थर रख कर अपना नम्बर लगा देते है और जब सुबह टोकन सिस्टम शुरु होता है तो अपने रखे पत्थरों के हिसाब से टोकन ले लेते हैं। ये व्यवस्था किसने बनाई और क्यों बनाई ये किसी को नहीं पता ?मगर नियम विपरीत ऐसा सिस्टम टीकाकरण केन्द्रों पर चल रहा है। इस प्रकार की व्यवस्था से जो लोग आसपास के गांव से टीका लगवाने आते हैं उनको टोकन नहीं मिल पा रहा है और उन्हें बिना टीका लगवाए ही वापस लौटना पड़ा रहा है। आसपास के गांवों के लोग जब तक टीकाकरण केन्द्र पर पहुंचते हैं तो उन्हें पहले ही वहां गोलों में पत्थर रखे मिलते हैं और टोकन के लिए कोई भी गोला खाली नहीं मिलता। जिसके कारण उन्हें टोकन नहीं मिल पाता है और उन्हें बिना वैक्सीन लगवाए ही घर लौटना पड़ता है।

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कई बार बनती है विवाद की स्थिति
टोकन के लिए पहले से गोले में रखे पत्थर के बावजूद अगर कोई शख्स गोले में खड़ा हो जाए तो उसका विवाद होना मानिए तय है। क्योंकि जिसका पत्थर होता है वो झगड़ने पहुंच जाता है। ऐसे में टीकाकरण केन्द्र पर विवाद की स्थिति भी बन जाती है। बुधवार सुबह भी दो महिलाओं के बीच इसी बात को लेकर विवाद खड़ा हो गया जिसे अधिकारियों ने शांत कराया। पत्थर सिस्टम को लेकर ग्राम मोड़ी के पप्पू सोनी ने बताया कि हम सुबह 5 बजे से आकर खड़े हैं। पत्थर रखे होने के कारण हमारा टोकन लेने का नम्बर नहीं लग रहा है, और बिना टीका लगवाए ही वापस लौटना पड़ रहा है। वहीं राजमल ने बताया कि वो सुबह 5 बजे आए और यहां गोलों में 100 के आसपास पत्थर रखे हुए थे। जिन लोगो ने पत्थर रखे थे वो यहां मौजूद भी नहीं थे। राजमल ने कहा कि ऐसी व्यवस्था किसने की ये व्यवस्था गलत है इस प्रकार से इस व्यवस्था को हटाना चाहिये। क्योंकि इसका फायदा सिर्फ स्थानीय लोगों को हो रहा है।

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