कोटा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरों टीम नीमच अफीम फैक्ट्री पहुंची और की जांच शुरू

|

Published: 20 Jul 2021, 05:00 PM IST

- मुखिया के जरिए होता था अफीम काश्तकार के पट्टे के मॉर्फिन बढ़ाने का खेल

patrika

नीमच। कोटा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरों के हत्थे चढ़े यूपी गाजीपुर स्थित अफीम फैक्ट्री के महाप्रबंधक (आईआरएस) शशांक यादव से १६.३२ लाख मिठाई के डिब्बो से जब्त होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय से टीम ने २२ जुलाई तक रिमांड पर लिया है। जिसने नारकोटिक्स विभाग के भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। जिसको लेकर एसीबी की एक टीम नीमच अफीम फैक्ट्री सोमवार शाम को पहुंची। जहां पर फैक्ट्री के अंदर जाकर लेब और अन्य विभाग में पहुंचकर वहां के कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ कर रिपोर्ट तैयार की है।

एसीबी कोटा निरीक्षक अजित भबोलिया ने बताया कि अफीम फैक्ट्री नीमच और गाजीपुर के महाप्रबंधक शशांक यादव को हमने शनिवार को कोटा उदयपुर मार्ग पर पकड़ा था। उनके पास 16 लाख 32 हजार रु बरामद किए गए थे उन्हें न्यायालय में पेश किया है और 22 तारीख तक रिमांड मांगा है। उसी संदर्भ में आज नीमच अफीम फैक्ट्री पूछताछ के लिए आए हैं स्टाफ से पूछताछ की गई है और उनसे संबंधित जो भी जांच है उसे रुकवाया गया है हमें सूचना मिली थी कि नीमच अफीम फैक्ट्री में राजस्थान और मध्य प्रदेश के अफीम किसानो की अफीम की जांच होती है और शशांक यादव द्वारा किसानों की अफीम टेस्टिंग में मार्फिन बढ़ाने के नाम पर किसानों से मोटी रिश्वत वसूली जा रही है इसी सूचना के आधार पर शशांक यादव को रोका गया था और वे रुपयों के बारे में संतुष्टि पूर्वक जवाब नहीं दे पाए उपरोक्त मामले में अनुसंधान जारी है, साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं निलंबन के लिए भी पत्र लिखा जा चुका है आगे की कार्यवाही अनुसंधान और साक्ष्य के आधार पर की जाएगी।

आपको बता दें कि नारकोटिक्स विभाग के लिए वसूली हो या अफीम जांच में लगे अधिकारियों के लिए रिश्वत या अफीम काश्तकारों से लेनदेन का काम मुखिया के जरिए ही होता है। विशेषतौर पर मुखिया क्षेत्र के काश्तकारों में से ही किसी एक चुना जाता है। मुखिया ही किसानों और अधिकारियों के बीच कड़ी का काम करता है। महाप्रबंधक शंशाक यादव के पकड़े जाने के बाद किसान रिश्वत के खेल को स्वीकार करते हैं। उनका मानना है कि मॉर्फिन कम बताकर अफीम फैक्ट्री में अधिकारी कम आरी का पटटा देने का डर दिखाते है या पट्टा निरस्त करने की धमकी देते हैं। यहीं से फैक्ट्री में रिश्वत का खेल चलता है। जिसने रिश्वत दे दी, अधिक मॉर्फिन बताकर रिपोर्ट सही दी जाती है। रिश्वत नहीं देने वाले काश्तकारों के पट्टे निरस्त कर दिए जाते हैं।

बुवाई से ही रखते है काश्तकारी पर नजर
अफीम काश्तकारों को ६ आरी, १० आरी और १२ आरी का पट्टा जारी किया जाता है। बुवाई के समय ही किसानों पर नजर जमा ली जाती है। निर्धारित मात्रा में काश्तकारों की अफीम अलग निकालकर उसे जांच के लिए अफीम फैक्ट्री भेजा जाता है।

मालदार किसान का बनता है दांव
अफीम में कम गाढ़ापन एवं मॉर्फिन होने के बाद भी काले सोने को सही ठहरा कर ईमानदार किसान की मेहनत पर जांच अधिकारी ही पानी फेर देते हैं। रिश्वत देने वालों की अफीम सही नहीं होने के बाद भी उसे १२ आरी का पट्टा मिल जाता है। जांच अधिकारी ५० हजार से दो लाख रुपए तक एक किसान से रिश्वत के वसूलते हैं।

तीन साल में तीन आईआरएस व नारकोटिक्स अधिकारी गिरफ्तार
वर्ष २०१८: नारकोटिक्स विभाग के निरीक्षक विपिन गुप्ता व संविदाकर्मी पंकज पांचाल द्वारा परिवादी नरेंद्र कुमार से अफीम का पट्टा देने की एवज में बीस हजार रुपए की मांग की गई थी। पंकज पांचाल को रंगे हाथों पकड़ा था।

वर्ष २०१९: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरों कोटा के तत्कालीन अतिरिक्त कमिश्रर डॉ. सहीराम मीणा को २६ जनवरी २०१९ को एक लाख रुपए की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

वर्ष २०१९: टैक्स लाइबिलिटी खत्म करने व टैक्स की राशि रिफंड करवाने की एवज मं आरोपी तत्कालीन आयकर आयुक्त (अपील) कोटा अमरीश बेदी द्वारा परिवादी भरत कुमार कुशवाह से २ लाख रुपए की मांग की थी।

वर्ष २०२१: नारकोटिक्स विभाग चित्तौडग़ढ़ में पदस्थापित अधिकारी सुधीर यादव को ४ अप्रेल २०२१ को आकस्मिक चैकिंग कर अन्य अधिकारियों के साथ पकड़ा था।

ब्यूरों को कर रहे गुमराह
एसीबी की रिमांड पूछताछ के दौरान अफीम फैक्ट्री के महाप्रबंधक शशांक यादव उन्हें झूठी कहानी बता रहे है। उन्हें पता ही नहीं कि मिठाई के डिब्बे में रुपए कैसे आए। एसीबी कडाई के साथ पूछताछ में जुटी है। जल्द ही पूरे काले मामले का खुलासा होगा।
- चंद्रशील ठाकुर, एएसपी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरों कोटा