नागौर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था चरमराई, पीएचईडी को सौंपने का आग्रह

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Updated: 25 Jul 2021, 01:20 PM IST

प्रशासन शहरों के संग अभियान को लेकर अजमेर में आयोजित बैठक में कार्यवाहक सभापति सुलेमानी व पार्षद बोथरा ने रखी समस्याएं

नागौर. राज्य सरकार के निर्देश पर आगामी दिनों में आयोजित होने वाले प्रशासन शहरों के संग अभियान को लेकर शनिवार को अजमेर में आयोजित बैठक में नागौर नगर परिषद के कार्यवाहक सभापति सदाकत अली सुलेमानी, पार्षद नवरतन बोथरा, विशाल, यतिराज धनावत, पूर्व पालिकाध्यक्ष अशोक मच्छी, राकेश सेन आदि ने भाग लेकर नागौर की समस्याएं रखी।

पार्षद बोथरा ने बताया कि नागौर शहर में जलापूर्ति का जिम्मा नगर परिषद को दिया हुआ है, लेकिन अधिकारियों के सभी पद रिक्त होने से व्यवस्था चरमराई हुई है और जनता को आए दिन पानी के लिए सडक़ों पर उतरना पड़ता है। इस सम्बन्ध में सभापति मीतू बोथरा ने गत 20 जुलाई को ही जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को पत्र लिखकर वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए नागौर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पीएचईडी को सौंपने का आग्रह किया है। पार्षद बोथरा ने बताया कि नगर परिषद को दी गई शहर जल प्रदाय योजना के तहत एक सहायक अभियंता व तीन कनिष्ठ अभियंता के पद स्वीकृत किए गए, लेकिन आज तक एक भी पद नहीं भरा गया।
वहीं अमृत मिशन के तहत शहर में नई पाइपलाइन बिछाने का काम जलदाय विभाग के माध्यम से कराया जा रहा है, जिससे आमजन की शिकायतें समय पर निरस्तारित नहीं हो पाती है। इस सम्बन्ध में कई बार स्वायत्त शासन निदेशालय व पीएचईडी को लिखा गया है, लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा है।

सीवरेज लाइन के लिए 20 की मांग
सभापति मीतू बोथरा द्वारा गत दिनों स्वायत्त शासन विभाग मंत्री शांति धारीवाल को लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए बैठक में जनप्रतिनिधियों ने बताया कि नागौर शहर में आरयूआईडीपी द्वारा बिछाई गई सीवरेज लाइन का कार्य कई जगह अधूरा है, जबकि कई गलियां वंचित रह गई है। जिनको जोडऩे के लिए स्थानीय नागरिकों द्वारा लम्बे समय से मांग की जा रही है। इस कार्य के लिए करीब 20 करोड़ रुपए का खर्च आएगा, इसलिए नगर परिषद को 20 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया जाए।

वार्षिक अनुदान राशि देने में भेदभाव
बैठक के दौरान नगर परिषद के पार्षदों ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा स्थानीय निकायों को दिए जाने वाले वार्षिक अनुदान में भी भेदभाव किया जा रहा है। नागौर जिले की निम्न श्रेणी की पालिकाओं को भी नागौर नगर परिषद से अधिक बजट दिया जा रहा है। पार्षदों ने पिछले तीन साल में जारी अनुदान राशि व सभापति बोथरा द्वारा मंत्री को लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए बताया कि नागौर जिले की लाडनूं, डीडवाना, मेड़ता सिटी, कुचामनसिटी जैसी नगर पालिकाओं को भी नागौर नगर परिषद से अधिक बजट दिया गया है, जबकि नागौर जिला मुख्यालय है और यहां गत चुनाव से पूर्व वार्ड बढ़ाकर 60 कर दिए हैं। इसलिए सबसे अधिक बजट नागौर नगर परिषद को आवंटित किया जाए।