हाइवे पर वाहनों के पीछे उड़ रही बीमारियां, सांस लेना मुश्किल

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Published: 27 Oct 2020, 05:15 PM IST

उड़ रहे धूल के गुबार, वाहनों के पीछे चलना बीमारियों को न्योता देने के बराबर, हाइवे किनारे की दुकानों व ढाबों में बैठना मुश्किल, दिनभर उड़ती है हाइवे किनारे की मिट्टी

नागौर. हाइवे पर वाहनों के साथ ही बीमारियां भी दौड़ लगा रही है। जो चपेट में आया वो हो गया संक्रमित। जी हां, हाइवे पर उड़ रहे धूल के गुबार न केवल सांस की बीमारियां बढ़ा रहे हैं वरन् चर्म के रोगियों का भी इजाफा कर रहे हैं। इन दिनों हाइवे पर किसी भी वाहन के पीछे चलना बीमारियों को न्योता देने के बराबर साबित हो रहा है। किनारे संचालित ढाबे और दुकानों में तो ग्राहकों को बैठाना मुश्किल हो गया है। साफ-सफाई नहीं होने से हाइवे किनारे पड़ी धूल वाहन चलने से दिनभर उड़ती रहती है। ऐसे में हाइवे पर चलना तो क्या किनारे के आसपास रहना भी मुसीबत भरा साबित हो रहा है। उधर, हाइवे प्राधिकरण ने किनारों पर सफाई को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है। ऐसे में लोगों की मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही।

पीछे चले तो जान सांसत में आ जाए
दुपहिया वाहन को किसी भारी वाहन के पीछे यदि एक किमी तक भी चलाया जाए तो जान सांसत में आ जाती है। वाहन चालक धूल-मिट्टी से सना नजर आता है। सांस लेने में तकलीफ होने लगती है और ज्यादा देर तक वाहन पीछे-पीछे दौड़ाया जाए तो नाक व मुंह के जरिए शरीर में घुसने वाले धूल के कण हालत खराब कर देते हैं।

बीमार और हो रहे बीमार
नागौर शहर में ही बीकानेर हाइवे पर दिनभर धूल के गुबार उड़ते हैं। शहरी क्षेत्र से गुजरते हुए गोगेलाव तक कमोबेश ऐसी ही स्थिति नजर आती है। जिला अस्पताल जाने वाला मार्ग होने से इस हाइवे पर दिनभर में कई मरीज गुजरते हैं। बीमारियों से निजात पाने के लिए वे अस्पाल जाते हैं, लेकिन आवाजाही के समय हाइवे पर उड़ते धूल के गुबार उनको और बीमार कर रहे हैं।

दुकानदारों का धंधा चौपट हो रहा
जोधपुर बाइपास तिराहे पर स्थिति और भी खतरनाक बनी हुई है। भारी वाहन चलने से उड़ती धूल किनारे के ढाबों व दुकानों में घुस रही है। आसपास के दुकानदार बताते हैं कि धूल के कारण उनका धंधा चौपट हो रहा है। प्रतिदिन पानी छिड़काव कर कुछ राहत पाने का प्रयास करते हैं, लेकिन पानी से भीगी मिट्टी कुछ ही देर में सूख जाती है। इसके बाद स्थिति वापस ज्यों की त्यों हो जाती है। किनारे की सफाई किए बगैर इस समस्या से राहत मिलने की उन्हें कोई उम्मीद नजर नहीं आती।