आयुर्वेद जीवन जीने का तरीका है

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Published: 27 Sep 2021, 09:16 PM IST

Nagaur. संत श्री लिखमीदास महाराज के निर्वाण दिवस पर आयुर्वेदिक चिकित्सा-एक्युप्रेशर सुजोक शिविर का आयोजन

नागौर. आयुर्वेद जीवन जीने का तरीका है। इस पद्यति से उपचार में मरीजों में कोई प्रतिकूल प्रभाव भी नहीं होता। आयुवर्वेद विभाग के उपनिदेशक डॉ. जे. पी. मिश्रा सोमवार को संत लिखमीदास महाराज स्मारक संस्थान अमरपुरा की ओर से लिखमीदास महाराज के निर्वाण दिवस पर आयोजित आयुर्वेदिक, एक्युप्रेशर सुजोक शिविर में मुख्य अतिथि के तौर पर बोल रहे थे। इस दौरान शिविर में कुल 348 रोगी लाभान्वित हुए। डॉ. मिश्रा ने कहा कि आदि काल से ही विज्ञान को विकसित करने में महापुरुषों का योगदान रहा है । यहां का ज्ञान विज्ञान विकसित अवस्था में भी अन्य देशों की अपेक्षा रहा है । जहां चारों वेद लिखे गए हैं । गुरुकुल में भी छात्रों को जीवन जीने का मार्गदर्शन शिक्षा के माध्यम से दिया गया । आयुर्वेद उसी शिक्षा का एक भाग है । उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में दिखी चरक संहिता में अनेक बीमारियों व उसके इलाज का विवरण दिया गया है । इसलिए आयुर्वेदिक पूर्ण चिकित्सा पद्धति है । आयोजन में आर्थिक सहयोग अखिलेश व प्रवीण सोलंकी का रहा। अध्यक्षता भामाशाह जंवरीदेवी सोलंकी ने की। इसमें डॉ. संत प्रसाद त्रिपाठी , डॉ. हरवीर सिंह सांगवा , डॉ. कैलाश ताडा , डॉ. हेमलता गहलोत , डॉ. उमा टाक , डॉ नरेंद्र पंवार तथा एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ डॉ. फैशल चौहान अपनी सेवाएं दी। कार्यक्रम में अविनाश देवड़ा, कमल भाटी , कार्यकारिणी सदस्य धर्मेंद्र सोलंकी , माली समाज मकराना के अध्यक्ष भंवर लाल गहलोत , मंगाराम मेघवाल , जगदीश सोलंकी आदि मौजूद थे। संचालन बालकिशन भाटी ने किया।