नया वित्त वर्ष शुरू, सुनहरे भविष्य के लिए इस तरह करें वित्तीय प्लानिंग

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Published: 01 Apr 2018, 02:08 PM IST

नए वित्त वर्ष में अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करना और बीते वित्त वर्ष में जो गलतियां हुई उन्हें दोबारा न दोहराना सबसे आवश्यक हाेता है।

नया वित्त वर्ष शुरू, सुनहरे भविष्य के लिए इस तरह करें वित्तीय प्लानिंग

नर्इ दिल्ली। नए वित्त वर्ष की शुरुआत आज से हो गई है। नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही इस बार कई बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में सबसे अहम होता अपने निवेश की प्लानिंग करना, अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करना और बीते वित्त वर्ष में जो गलतियां हुई उन्हें दोबारा न दोहराना। हम आपको इस नए वित्त वर्ष में कैसे प्लानिंग करनी है वह बता रहे हैं। यह आपको बेहतर टैक्स प्लानिंग के साथ शानदार रिटर्न दिलाने में मदद करेगा। साथ ही भविष्य में छोटी से बड़ी जरूरतों के लिए भी पैसे की कमी नहीं होने देगा।


खर्च और इनकम की तुलना करें

सबसे पहले मौजूदा वित्तीय स्थिति का लेखा जोखा लें। अपनी कुल आय- जिसमें नौकरी, मकान का किराया आदि जैसी आमदनी भी शामिल हो की गणना करें। अपने सारे खर्च जैसे लोन का रीपेमेंट, मकान का किराया, फोन का बिल, खाने-पीने का खर्च आदि के अलावा निकट भविष्य में होने वाले खर्च को भी शामिल करें।


निवेश में टालमटोल का रवैया

निवेश करने में आलस का बहुत बुरा असर मिलने वाले रिटर्न पर होता है। ज्यादातर निवेशक निवेश से पहले टालमटोल का रवैया अपनाते हैं। इस वित्त वर्ष में आप ऐसा न करें और वक्त रहते सही जगह पर निवेश करें।

एसेट एलोकेशन

सामान्य शब्दों में कहें तो एसेट एलोकेशन का मतलब है निवेश की जाने वाली राशि को विभिन्न एसेट जैसे कि इक्विटी, डेट, स्मॉल सेविंग स्कीम, गोल्ड, प्रॉपर्टी आदि में निवेश करना। निवेशक की जोखिम उठाने की क्षमता कितनी है, यह देखते हुए ही निवेश के विकल्प का चुनाव किया जाना चाहिए।


बिना लक्ष्य निर्धारित किए न करें निवेश

कोई भी लक्ष्य चाहे वह पांच साल बाद अपना घर खरीदने का हो या कार खरीदने का, सबसे पहले लक्ष्य निर्धारित करें। एक बार इस तरह के लक्ष्य निर्धारित करने से आपमें बचत की प्रवृत्ति विकसित होगी। फिर आपने वित्तीय लक्ष्य को पाने के लिए सही जगह निवेश करेंगे।


निवेश के बाद समीक्षा की आदत

ज्यादातर मामलों में यह देखने को मिलता है कि निवेशक निवेश के बाद अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा नहीं करते हैं। ऐसा इस बार नहीं करें। नियमित अंतराल पर निवेश की समीक्षा करें, ताकि आपने जिस एसेट क्लास में निवेश किया है उसके प्रदर्शन को समय-समय पर जानें। जिस एसेट क्लास में प्रर्दशन अच्छा नहीं तो उसे बदल दें।

टैक्स प्लानिंग में जल्दवाजी नहीं

अक्सर देखा जाता है कि वित्त वर्ष की समाप्ति पर निवेशक बिना किसी लक्ष्य के टैक्स बचाने के लिए निवेश करते हैं। इससे बचना बहुत जरूरी है। इसके लिए वित्त वर्ष शुरू होने के साथ ही अपनी टैक्स देनदारी को कैलकुलेट करते हुए सही प्रोडक्ट का चुनाव करें।


रिस्क लेने की क्षमता के अनुसार चुनें विकल्प

निवेश के विभिन्न विकल्पों में रिस्क यानी जोखिम भी विभिन्न स्तर के होते हैं। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति जितना अधिक जोखिम उठाता है उसकी पूंजी में उतनी अधिक वृद्धि भी हो सकती है और घाटा भी उसी अनुपात में हो सकता है। इसलिए निवेश के विकल्प से संबंधित सभी प्रकार के जोखिमों के बारे में पहले ही जान लें। बाजार के जोखिम, ब्याज दर के जोखिम, व्यावसायिक जोखिम, पुनर्निवेश का जोखिम, विनिमय दर का जोखिम, महंगाई आदि निवेश को प्रभावित करते हैं।

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