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स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण के वैश्विक प्रभाव विषय पर व्याख्यान माला 11 को

By Prateek Saini

Sep, 08 2018 06:10:26 (IST)

इस अवसर पर स्‍वामी विवेकानंद पर आधारित एकल नाटक का मंचन किया जाएगा...

(पत्रिका ब्यूरो,मुंबई): विले पार्ले पूर्व के दीनानाथ मंगेशकर सभागार में 11 सितंबर को स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण के वैश्विक प्रभाव विषय पर एक व्याख्यान माला आयोजित की जाएगी। दिव्य प्रेम सेवा मिशन न्यास के सरंक्षक प्रेम शुक्ला ने यह जानकारी दी। इस अवसर पर स्‍वामी विवेकानंद पर आधारित एकल नाटक का मंचन किया जाएगा। शुक्‍ला ने कहा कि स्वामी विवेकानंद भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म परंपरा को पश्चिमी विश्व में प्रस्थापित करने वाले अद्वितीय व्यक्तित्व रहे। भारतीय स्वाभिमान और चेतना के उनके पुनर्जागरण में ही भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का बीजारोपण भी हुआ है।


मुंबई मराठी पत्रकार संघ में आयोजित प्रेस वार्ता में कार्यक्रम के संयोजक विधायक पराग अलवनी ने बताया कि 11 सितंबर की शाम 4.30 बजे स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण का वैश्विक प्रभाव पर आयोजित व्याख्यान माला में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिवप्रताप शुक्ला, झारखंड विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव, उत्तर प्रदेश के विधायक रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया', दिव्य प्रेम सेवा मिशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गौतम हिस्सा लेंगे। उसके उपरांत पद्मश्री शेखर सेन कृत स्वामी विवेकानंद एकल नाटक का मंचन होगा।


शिकागो में अयोजित किया गया विश्व हिंदू सम्मेलन

बता दें कि 1893 में स्वामी विवेकानन्द ने शिकागो मेें धर्मगुरूओं के सम्मेलन में व्याखान दिया था इसकी 125 वीं वर्षगाठ पर देशभर में आयोजन किए जा रहे है। 1893 के सम्मेलन में स्वामी जी ने विश्व को भारत देश उसकी संस्कृति और हिंदू दर्शन से रूबरू करवाया था। इस आयोजन की वर्षगाठ पर शिकागो में विश्व हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया है। पीएम मोदी ने पत्र के माध्यम से वहां संदेश भेजा। इस पत्र में पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया की कई समस्याओं का हल हिन्दू दर्शन और चिंतन में विद्यमान है। पीएम ने हिंदुत्व के विचारों से लोगों को जोड़ने के लिए प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल करने का आह्वान किया। पीएम नरेंद्र मोदी ने विश्व हिंदू कांग्रेस को भेजे अपने संदेश में कहा कि हिन्दू धर्म के विभिन्न प्राचीन महाकाव्यों और शास्त्रों को डिजिटल स्वरूप में लाने की जरुरत है। इससे युवा पीढ़ी उनके साथ बेहतर तरीके से जुड़ सकेगी


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