वन बेडरूम फ्लैट से नासा के मंगल मिशन की गतिविधियां संभाल रहे भारतीय मूल के संजीव

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Updated: 02 Mar 2021, 10:11 AM IST

- नासा के मंगल मिशन में भारतीय मूल के प्रोफेसर संजीव गुप्ता भी हैं।
- संजीव वन बेडरूम फ्लैट से सारा काम संभाल रहे हैं।
- प्रो. संजीव गुप्ता (55) भारतीय मूल के ब्रिटिश भूविज्ञानी हैं।

लंदन। अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मंगल मिशन से जुड़े सैंकड़ों वैज्ञानिकों में भारतीय मूल के प्रोफेसर संजीव गुप्ता भी हैं। वह दिन-रात इस मिशन के काम में जुटे हैं। खास बात यह है कि वह नासा हैड क्वार्टर या ऑफिस से नहीं, बल्कि अपने वन बेडरूम फ्लैट से सारा काम संभाल रहे हैं। उन्होंने लंदन में यह फ्लैट किराए पर लिया है। कोरोना संकट के कारण यात्रा पर प्रतिबंध है। इसलिए वह मंगल मिशन का काम घर से कर रहे हैं। पिछले दिनों मंगल ग्रह पर नासा ने अपना परसिवरेंस रोवर उतारा है। यह मंगल पर जीवन की तलाश करेगा। वहां से सैम्पल भी एकत्रित करेगा। प्रो. संजीव गुप्ता (55) भारतीय मूल के ब्रिटिश भूविज्ञानी हैं। लंदन के इंपीरियल कॉलेज में भूविज्ञान विशेषज्ञ हैं।

परिवार से दूर गुजर-बसर-
प्रो. संजीव ने दक्षिणी लंदन में किराए पर फ्लैट इसलिए लिया, क्योंकि वे परिवार में किसी को परेशान किए बिना इस महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर ध्यान देना चाहते थे। वह कहते हैं कि इस मिशन से जुड़े हुए 400 से अधिक वैज्ञानिकों में से कई घर से काम कर रहे हैं। उन्हें मिशन के दौरान नासा की कैलिफोर्निया लैब में न होने का मलाल है।

मंगल पर 40 मिनट बड़ा होता है दिन -
प्रो. संजीव ने बताया कि मंगल पर धरती की तुलना में दिन 40 मिनट बड़ा होता है। टीम पूरे दिन काम करती है। रोवर की लैंडिंग के बाद वह 5 कम्प्यूटर, 2 एपल मैक, 1 आइपैड, 2 अन्य स्क्रीन व जूम स्टाइल मीटिंग के साथ काम में जुटे हैं। इन मीटिंग में तय होता है कि सैम्पल कहां से उठाने हैं। प्रो. गुप्ता ने बताया कि परसिवरेंस रोवर मंगल ग्रह के जेजोरो क्रेटर पर लैंड हुआ है।