PM Modi at UNGA: पीएम मोदी ने क्यों लिया चाणक्य, दीनदयाल उपाध्याय और टैगोर का नाम

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Updated: 25 Sep 2021, 10:51 PM IST

PM Modi Speech at UNGA: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने चौथे भाषण के दौरान दुनिया को तीन महत्वपूर्ण संदेश देने के लिए चाणक्य, दीनदयाल उपाध्याय और टैगोर का नाम लिया।

न्यूयॉर्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक शक्तिशाली भाषण दिया। इसमें पीएम मोदी ने उन महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया, आज दुनिया जिनका सामना कर रही है। पीएम ने बेहद ही शानदार ढंग से अपने भाषण के दौरान दुनिया को तीन संदेश भेजने के लिए चाणक्य, दीनदयाल उपाध्याय और रवींद्रनाथ टैगोर का जिक्र किया। जबकि उनके दो संदेश संयुक्त राज्य अमरीका की ओर इशारा करते हुए दिए गए थे और एक संदेश उस दर्शन पर था जो भारत के विकास को निर्देशित करता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में चौथी बार दिए जा रहे अपने भाषण के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के लोकतंत्र के बारे में बात की, तो उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय की शिक्षा को याद किया। दीनदयाल उपाध्याय की जयंती भी 25 सितंबर को ही पड़ती है। उन्होंने कहा कि अंत्योदय का दर्शन, जहां अंतिम उपयोगकर्ता का विकास सबसे महत्वपूर्ण है, दीनदयाल उपाध्याय की ही दी हुई शिक्षा है।

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पीएम मोदी ने कहा, "एकात्म मानवदर्शन के प्रणेता, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी की आज जन्मजयंती है। एकात्म मानवदर्शन यानि इंटीग्रल ह्यूमैनिज्म। अर्थात, स्व से समष्टि तक, विकास और विस्तार की सह यात्रा। और ये चिंतन, अंत्योदय को समर्पित है। अंत्योदय को आज की परिभाषा में वेयर नो वन इज लेफ्ट बिहाइंड, कहा जाता है। इसी भावना के साथ, भारत आज इंटीग्रेटेड, इक्विटेबल डेवलपमेंट की राह पर आगे बढ़ रहा है। विकास, सर्वसमावेशी हो, सर्व-स्पर्शी हो, सर्व-व्यापी हो, सर्व-पोषक हो, यही हमारी प्राथमिकता है।"

कोविड-19, आतंकवाद जैसे मुद्दों को संबोधित करने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र को एक सलाह दी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र प्रणाली को अपनी प्रभावशीलता और प्रासंगिकता में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इस संबंध में पीएम मोदी ने चाणक्य को उद्धृत करते हुए कहा, "भारत के महान कूटनीतिज्ञ, आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले कहा था- कालाति क्रमात काल एव फलम् पिबति। जब सही समय पर सही कार्य नहीं किया जाता, तो समय ही उस कार्य की सफलता को समाप्त कर देता है। संयुक्त राष्ट्र को खुद को प्रासंगिक बनाए रखना है तो उसे अपनी प्रभावशीलता को सुधारना होगा, विश्वसनीयता को बढ़ाना होगा।"

इसी कड़ी में, पीएम मोदी ने अपना भाषण समाप्त करते हुए रवींद्रनाथ टैगोर के शब्दों का इस्तेमाल किया। पीएम मोदी ने कहा, "मैं, नोबल पुरस्कार विजेता, गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर जी के शब्दों के साथ अपनी बात समाप्त कर रहा हूं। शुभो कोर्मो-पोथे/ धोरो निर्भोयो गान, शोब दुर्बोल सोन्शोय / होक ओबोसान। अर्थात...अपने शुभ कर्म-पथ पर निर्भीक होकर आगे बढ़ो। सभी दुर्बलताएं और शंकाएं समाप्त हों। ये संदेश आज के संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र के लिए जितना प्रासंगिक है उतना ही हर जिम्मेदार देश के लिए भी प्रासंगिक है। मुझे विश्वास है, हम सबका प्रयास, विश्व में शांति और सौहार्द बढ़ाएगा, विश्व को स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध बनाएगा।"

पीएम मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र आज कई सवालों का सामना कर रहा है। पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र से समय आने पर निडर होकर कार्रवाई करने के लिए कहा, "इस तरह के सवाल कोविड, जलवायु परिवर्तन, छद्म युद्ध, आतंकवाद और अब अफगानिस्तान के मुद्दे पर उठाए गए हैं।"