कोरोना टीके के बजाय नाक से दी जाने वाली वैक्सीन ज्यादा असरदार, विशेषज्ञों का दावा

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Published: 12 Aug 2021, 06:13 PM IST

हार्वर्ड के इम्युनोलॉजिस्ट जोस ऑर्दोवास मॉनटेन्स के अनुसार वायरस के खिलाफ लड़ाई में वैक्सीन को उसी जगह देना चाहिए जहां से वह प्रवेश करता है।

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से बचाव को लेकर अब नेजल वैक्सीन बाजार में आने वाली हैं। कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैक्सीन ज्यादा असरदार हो सकती है। दुनियाभर में इसके पहले चरण का परीक्षण चल रहा है।

हाल में अमरीकन सोसाइटी ऑफ वायरोलॉजी के साथ बैठक में मीसा वैक्सीन का दावा था कि टीका लगने के बाद वायरस आक्रमण करता है तो दवा उसे वहीं बेकार कर सकती है।

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जहां से वायरस प्रवेश करे वहीं लगाएं टीका

हार्वर्ड के इम्युनोलॉजिस्ट जोस ऑर्दोवास मॉनटेन्स के अनुसार वायरस के खिलाफ लड़ाई को अधिक मजबूत करने के लिए वैक्सीन वहीं देनी चाहिए जहां से वायरस शरीर में प्रवेश कर रहा है। जोस के अनुसार जो टीका हमें हाथ में लग रहा है वह इसके तत्वों को कोशिकाओं तक पहुंचाती है।

नेजल वैक्सीन से सबसे अधिक उम्मीदें

प्रो.जोस के अनुसार टीका सीधे नाक से दिया जाए तो नाक, श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से के साथ फेफड़ों में मजबूत इम्युनिटी तैयार होगी। इसके साथ एंटीबॉडीज और टी-कोशिकाएं भी अपना काम करेंगी। इसका फायदा ये होगा कि वायरस जब नाक से प्रवेश करेगा तभी नाक में पहले से मौजूद प्रतिरोधक तंत्र उसे बेकार कर देगा।

बच्चों के लिए मजबूत कवच

लोवा यूनिवर्सिटी के पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजिस्ट प्रो.पॉल मैक्रे के अनुसार हाथ में लगने वाले टीके की बजाए नाक से टीका दिया जाए तो बच्चे और अधिक आसानी से कोरोना को मात दे सकते हैं। यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक 80 लोगों पर टीके का परीक्षण करेंगे।

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शरीर में इम्युनिटी का मतलब

वैज्ञानिकों का कहना है कि शरीर में इम्यूनिटी का अर्थ रक्त से है। ये शरीर प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है। ये पूरे शरीर में बहता है और किसी बाहरी तत्व को निष्क्रिय कर सकता है। कई ताजा अध्ययनों से ये सामने आया है कि इम्युनिटी शरीर में मौजूद उत्तकों में वास करती है।