Global Warming से ग्लेशियर को बचाने का अनोखा प्रयास, कई किलोमीटर बिछ जाते हैं तिरपाल

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Updated: 23 Jun 2020, 10:24 PM IST

Highlights

  • इटली (Italy) का उत्तरी इलाका प्रेसेना ग्लेशियर 1993 से अपने आकार का एक तिहाई हिस्सा खो चुका है।
  • 2700-3000 मीटर की ऊंचाई को कवर करते है तिरपाल, बाहरी तापमान से कम तापमान बनाए रखते हैं।

रोम। ग्लोबला वार्मिंग (GLobal Warming) का असर पूरे विश्व में दिखाई देने लगा है। खासकर उत्तरी भूभाग में ग्लेशियर (Glacier) अपना आकार खो रहे हैं। इटली (Italy) का उत्तरी इलाका प्रेसेना ग्लेशियर 1993 से अपने आकार का एक तिहाई हिस्सा खो चुका है। यहां पर अकसर स्कीइंग रेस का आयोजन होता है। सर्दियों में यहां सैलानी काफी संख्या में आते हैं।

एक बार जब स्कीइंग सीजन खत्म हो जाता है,यानी गर्मियों के आते ही संरक्षणवादी इन ग्लेशियरों को बचाने के लिए निकल पड़ते हैं। इस क्षेत्र को सिकुड़ने से बचाने के लिए ये लोग इस क्षेत्र को ढंकने लगते हैं। इसके लिए ये एक त्रिपाल की मदद लेते हैं। यह त्रिपाल तीस हजार वर्ग मीटर तक फैला होता है। वहीं 2700—3000 मीटर की ऊंचाई को कवर करता है।

जियोटेक्सटाइल से बने ये तिरपाल सूरज की रोशनी से बचाते हैं, ताकि ग्लेश्यिर के पिघलने की रफ्तार को कम किया जा सके। इस प्रकार जितना संभव हो उतना बर्फ का संरक्षण किया जा सकता है। लोम्बार्डी और ट्रेंटिनो अल्टो अदिगे क्षेत्रों की सीमा को श्रमिक लंबे तिरपाल से ढंककर तापमान को नियंत्रित करते हैं। इस त्रिपाल से छह माह तक इस ग्लेशियर को ढंका जाता है। ठंड आते ही इन्हें हटा दिया जाता है। श्रमीकों को ये सब करने के लिए कई दिन का समय लगता है।