इस्लामाबाद हाईकोर्ट पहुंचा भारत, 4 भारतीयों को जेल से जल्द रिहा करे Pak

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Updated: 16 Oct 2020, 09:29 AM IST

  • पाक जेल में जासूसी के आरोप में बंद हैं 4 भारतीय नागरिक।
  • सजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी पाकिस्तान रिहा करने के लिए तैयार नहीं।
  • भारत ने पाकिस्तान के इस रवैये को गैरकानूनी करार दिया है।

नई दिल्ली। इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग ( Indian High Commission ) ने पाकिस्तान से कथित जासूसी के आरोप में सैन्य अदालतों द्वारा दोषी ठहराए गए 4 भारतीय नागरिकों को जेल से रिहा करने की मांग की है। इस मामले में पाकिस्तान के असहयोगी रुख के बाद भारत ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ( Islamabad High Court ) में याचिका दायर कर सभी भारतीयों की पाक जेलों से तत्काल रिहाई की मांग की है। भारत ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि चारों भारतीय नागरिकों ( Indian Citizens ) की सजा पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद उन्हें रिहा न किया जाना पूरी तरह से गैरकानूनी है।

अब भारतीय उच्चायोग की प्रथम सचिव अपर्णा रे ने चारों भारतीय नागरिकों की ओर से इस्लामाबाद हाईकोर्ट में संवैधानिक याचिका दायर की है। याचिका में बताया गया है कि चारों भारतीय नागरिकों की जेल से रिहाई न होना गैरकानूनी और पूरी तरह से अनुचित है। सजा पूरी करने के बाद भी उन्हें पाक जेलों में रखना पाकिस्तान ( Pakistan ) के कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन है। यह पाकिस्तान के उच्च न्यायालय के आदेशों का भी उल्लंघन है।

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तत्काल रिहाई की मांग

भारतीय उच्चायोग ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मोहसिन अख्तर कयानी की अदालत में याचिका दायर की है। याचिका में चारों भारतीय नागरिकों की न्यायपूर्ण तरीके से तत्काल रिहाई की मांग की गई है। बताया गया है कि अदालती आदेश के अनुरूप् सजा पूरी करने के बाद भी इन भारतीय नागरिकों को गैरकानूनी और नियम विरूद्ध तरीके से जेल में रखा गया है। यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग और अवैध तरीके से हिरासत में रखने जैसा है।

4 में से एक 13 साल से कर रहा है रिहाई का इंतजार

जिन भारतीय नागरिकों ने अपनी सजा पूरी कर ली है उनमें बिरजू डुंग डुंग, विज्ञान कुमार, सतीश भोग और सोनू सिंह शामिल हैं। इनमें से तीन सेंट्रल जेल लाहौर और एक जिला जेल कराची में बंद हैं। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में दायर याचिका के मुताबिक डुंग डंग अप्रैल 2007, सोनू सिंह मार्च 2012, विज्ञान कुमार जून 2014 और सतीश भोग की मई 2015 में सजा की अवधि समाप्त हो चुकी है।

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जासूसी का आरोप

पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 199 के तहत दायर याचिका में कहा गया है कि कैदियों को पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार किया गया था। इन लोगों को पाक सेना अधिनियम की धारा 59 के तहत दोषी ठहराया गया था। यह जासूसी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नागरिक अपराधों की श्रेणी में आता है। इन लोगों के खिलाफ वही धाराएं लगी है जो अप्रैल 2017 में पाक जेल में गिरफ्तार पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव के खिलाफ पाकिस्तान ने लगाए हैं।

पाकिस्तान ने अभी तक नहीं दिया जवाब

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवस्तव ने कहा है कि भारत ने पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के ऑफिस को औपचारिक रूप से इन चार कैदियों की रिहाई के लिए अक्टूबर 2019 और मई 2020 के बीच पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि इन चार भारतीय कैदियों को जल्द से जल्द रिहा किया जाए और भारत वापस भेजा जाए। लेनिक पाकिस्तान की ओर से अभी तक इसका जवाब नहीं मिला है।