India-China Standoff: चीनी सेना Finger Points से हटे पीछे, कोर कमांडरों की बैठक में भारत का स्टैंड

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Updated: 02 Aug 2020, 06:41 PM IST

  • भारत और चीन के बीच सीमा विवाद ( India-China standoff ) के बाद रविवार को पांचवें दौर ( commander level talks ) की बैठक।
  • देपसांग ( Depsang ) में भारत की स्थिति मजबूत, फिलहाल पैंगोंग त्सो फिंगर प्वाइंट्स व अन्य विवादित स्थानों ( Collision in Ladakh ) पर ध्यान।
  • भारत सबसे पहले इन्हीं इलाकों से Chinese People's Liberation Army पीछे हटाने के मुद्दे पर मजबूती से खड़ा है।

नई दिल्ली। सीमा विवाद ( India-China standoff ) के बाद सैन्य स्तर पर चीन के साथ चल रही बातचीत के दौरान भारत पूर्वी लद्दाख में केवल पैंगोंग त्सो फिंगर प्वाइंट्स ( Chinese Army in Pangong Tso Area ) और अन्य विवादित स्थानों ( Collision in Ladakh ) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। भारत इन इलाकों से चीन की सेना पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी ( Chinese People's Liberation Army ) को पूरी तरह पीछे हटाए जाने की मांग कर रहा है।

इस संबंध में लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और मेजर जनरल लियू लिन सहित भारत और चीन के कोर कमांडरों की एक बैठक ( commander level talks ) फिलहाल वास्तविक नियंत्रण रेखा ( Line of Actual Control ) पर चीनी की सीमा के मोल्डो में चल रही है। इस चर्चा का मुख्य मकसद सेना को पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी करना है।

केंद्र सरकार के सूत्र के मुताबिक, "देपसांग ( Depsang ) के मैदानी इलाके हमारी बैठक का एजेंडा नहीं हैं। चर्चा मुख्य रूप से पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में पैंगोंग त्सो फिंगर प्वाइंट्स समेत अन्य विवादित क्षेत्र से चीन की सेना को पीछे हटाने के लिए की जा रही है।" सूत्रों ने बताया कि भारत इस बात पर स्पष्ट है कि सेना को पीछे हटाने की प्रक्रिया पहले पूरी होना चाहिए। इसके बाद ही दोनों पक्षों के बीच एलएसी के साथ आगे और पीछे के इलाकों से शांति स्थापित करने की प्रक्रिया जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है।

देपसांग में अप्रैल और मई के महीने में जब चीनियों ने वहां निर्माण शुरू कर दिया था, उसके बाद से भारत मजबूत स्थिति में है। बीते 28 जुलाई को मुलाकात के बाद भारतीय पक्ष को कोर कमांडर स्तर पर वार्ता के लिए दिशानिर्देश चीन अध्ययन समूह (CSG) द्वारा दिए गए थे। भारत अब इस मुद्दे पर मजबूती से अड़ा है कि यह पहले फिंगर इलाके सहित सभी विवादित बिंदुओं से चीनी सेना को पूरी तरह पीछे हटना होगा।

CSG सरकार के उन सबसे शीर्ष इकाइयों में से एक है जो चीन के साथ बातचीत के दौरान उठाए जाने वाले स्टैंड पर सैन्य और राजनयिकों को दिशानिर्देश प्रदान करता है और चीनी पक्ष द्वारा उठाए गए बिंदुओं और मांगों पर एक स्टैंड भी लेता है। भारत की सीमा पर चीन द्वारा बड़े पैमाने पर निर्माण किए जाने के बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, और हरियाणा के आसपास बख्तरबंद मोर्चों की तैनाती के साथ ही भारतीय सेना ने दो स्थानों से अपने पर्वतों की टुकड़ियों को भेजा है।

चीन की ही तरह भारत द्वारा मजबूत तैनाती किए जाने के बाद भारत अब किसी जल्दबाज़ी में नहीं है और चाहता है कि चीन 14-15 जुलाई को आयोजित कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता के दौरान की गई अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करें और अपने स्थायी स्थानों पर वापस जाएं। पैंगोंग त्सो फिंगर प्वाइंट्स में चीनी पक्ष ने पिछली वार्ता के बाद सेनाओं को पीछे हटाने की शुरुआत की थी लेकिन इस प्रक्रिया को पूरी तरह से वहां 2-3 दिनों के बाद बंद कर दिया गया था। चार विवादित बिंदुओं में पैट्रोलिंग प्वाइंट-14, पीपी-15, पीपी-17, पीपी-17 ए और फिंगर प्वाइंट्स शामिल हैं।

भारत अब इस सिलसिले में लंबी तैयारी कर रहा है क्योंकि उसने लद्दाख क्षेत्र में आने वाले कठोर सर्दियों के लिए स्टॉक करना शुरू कर दिया है। शीतकालीन तैनाती के लिए सेना के पास पहले से ही सैनिकों के लिए कपड़े और आवास का एक बड़ा भंडार है क्योंकि भारतीय सेना दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर पर सैनिकों को तैनात करती है और इसके लिए पूरी तरह तैयार है।

वहीं, अतिरिक्त आवश्यकताओं के लिए सेना स्वदेशी के साथ-साथ विदेशी विक्रेताओं से अतिरिक्त टेंट और आश्रयों के लिए ऑर्डर देने की प्रक्रिया में है। समर स्टॉकिंग का समय चल रहा है और हमें उस समय तक अतिरिक्त केबिन और टेंट मिलने वाले हैं। बता दें कि सर्दियों के राशन और गोला-बारूद के भंडारण के लिए जून, जुलाई और अगस्त के महीने सबसे अच्छा समय माना जाता है। पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में जल्द ही बर्फबारी शुरू होने की संभावना है और वहां तापमान पहले से ही कम है।