India-China Dispute: लद्दाख में तनाव पर बोले S Jaishankar, China से मुकाबले के लिए भारत को तैयार रहना होगा

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Updated: 02 Aug 2020, 04:49 PM IST

  • India-China Dispute के External Affairs Minister S. Jaishankar ने बड़ा बयान दिया
  • विदेश मंत्री ने कहा कि हमें चीन ( China ) के साथ मुकाबला करने के लिए तैयार होना ही पड़ेगा

नई दिल्ली। लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा ( LAC ) पर चीन के साथ चल रही तनातनी ( India-China Dispute ) के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ( External Affairs Minister S. Jaishankar ) ने बड़ा बयान दिया है। विदेश मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है, जब हमें चीन ( China ) के साथ मुकाबला करने के लिए तैयार होना ही पड़ेगा। बॉर्डर पर तनाव ( India-China Border tension ) के बीच चीन के साथ पांचवें दौर की वार्ता से ऐन पहले आया जयशंकर का यह बयान कई मायनों में काफी अहम माना जा रहा है। आपको बता दें कि दोनों देशों के बीच यह बातचीत पहले कैंसिल हो गई थी। एक अंग्रेजी समाचार पत्र से बातचीत करते हुए विदेश मंत्री एस जयंशकर ने कहा कि चीन के साथ बैलेंस बनाना आसान नहीं है। इस मामले को ज्यादा लंबा नहीं खींच सकते, भारत को चीन का विरोध करना ही होगा।

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चीन को सख्त संदेश देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि चीन के साथ सीमा पर बढ़ रही टेंशन का असर आपसी व्यापार भी पड़ेगा। क्योंकि सीमा पर वर्तमान स्थिति और दोनों देशों के संबंधों को अलग-अलग रूप में नहीं देखा जा सकता। जयशंकर ने इस दौरान अमरीका के साथ बदल रहे रिश्तों को लेकर भी खुलकर बात कही। उन्होंने कहा कि अमरीका के साथ हमारे रिश्तों में बदलाव आ रहा है। हालांकि अमरीका भारत का परपंरागत मित्र नहीं है, लेकिन उसके साथ हमारे रिश्ते बेहतरी की ओर हैं। विदेश मंत्री ने अमरीका के साथ भारत के रिश्तों केा द्वीपक्षीय बताया।

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आपको बता दें कि चीन को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान ऐसे समय आया है, जब एलएसी पर दोनों देशों के बीच टेंशन का माहौल है। दरअसल, गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुए खूनी संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। हालांकि इतना ही नुकसान चीन को भी हुआ था, लेकिन चीन ने अपने मारे गए सैनिकों की संख्या का खुलासा नहीं किया था। इस घटना के बाद सीमा पर भारत और चीन के बीच काफी तनाव बढ़ गया था। यहां तक कि दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे आसार नजर आने लगे थे। सीमा पर उपजे इस तनाव को कम करने के लिए दोनों ही देशों के बीच कमांडर स्तर की वार्ता भी की गई, लेकिन इसका भी कोई लाभ देखने को नहीं मिला। पिछले जब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने चीनी विदेश मंत्री से बातचीत की तो दोनों देश अपनी सेनाओं को पीछे हटाने के लिए तैयार हो गए।

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