जिंदा ही नहीं मरने वालों को भी है 'लॉकडाउन' खुलने का इंतजार!

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Updated: 08 Apr 2020, 12:32 PM IST

  • Coronavirus संकट के बीच एक और बड़ी मुश्किल
  • मरने वाले भी देख रहे Lock Down खुलने की राह

नई दिल्ली। देशभर में कोरोना वायरस ( Coronavirus in india ) का खतरा लगातार बढ़ रहा है। कई राज्यों में कोरोना ने कहर मचा रखा है। खास तौर पर महाराष्ट्र ( Maharashtra ) और केरल ( Kerala ) में हालात काफी चिंताजनक हैं। यही वजह है कि देशभर में 21 दिन का लॉकडाउन ( Lock Down ) लगा रखा है। लेकिन इन लॉकडाउन का असर हर किसी पर पड़ रहा है।

भले ही राज्य सरकारें लॉकडाउन की अवधि को बढ़ाने की मांग कर रही हों लेकिन हर कोई चाहता है कि जल्द से जल्द लॉकडाउन खत्म हो।

कोरोना संकट के दौर में जिंदा लोग लॉकडाउन के खत्म होने का इंतजार कर ही रहे हैं लेकिन मरने वालों को भी लॉकडाउन खत्म होने का बेसब्री से इंतजार है। दरअसल मृतकों की अस्थियां गंगा में प्रवाहित होने के लिए लॉकडाउन के खुलने की राह देख रही हैं।

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देशभर में चल रहे 21 दिन के लॉकडाउन ने भले ही हमें महामारी से बचा रखा है लेकिन कई मुश्किलें भी खड़ी कर दी हैं। यही वजह है कि लोग चाहते हैं कि जल्द से जल्द से कोरोना भागे और लॉकडाउन खुल जाए।

लेकिन लोगों के साथ-साथ मरने वालों को भी लॉकडाउन के खुलने का बेसब्री से इंतजार है। दरअसल मृतकों की अस्थियां इस बात की राह देख रही हैं कि लॉकडाउन खुले और उन्हें गंगा में प्रवाहित किया जाए।

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लॉकडाउन की वजह से राज्यों की सीमाओं को सील कर दिया गया है। ऐसे में लोग हरिद्धार जाकर अस्थियों का विसर्जन गंगा में नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे ही परेशानी हरियाणा में भी देखने को मिल रही है।

यहां के सिरसा जिले में पिछले 13 दिनों में 130 लोगों की मौत हो चुकी है। शिवपुरी में अस्थियां रखने के कमरे में जगह कम पड़ गई है।

सिरसा शिवपुरी में संस्कार करवाने वाले आचार्य भागीरथ का कहना है कि लॉकडाउन के चलते पहले के मुकाबले अब मृतक देह का संस्कार करने आने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है।

लॉकडाउन के चलते लोग हरिद्वार नहीं जा पा रहे और यहां काफी संख्या में अस्थियां जमा हो गई हैं।

लोगों को दिए जा रहे टोकन

आचार्य भागीरथ के मुताबिक अस्थियां रखने वाले लोगों को टोकन भी दिए जा रहे हैं। इसी तरह सोनीपत में 68 मृतकों की अस्थियों को श्मशानघाट के लॉकर रखा जा रहा है।