पत्रिका इंटरव्यूः स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन की चेतावनी- कोरोना लॉकडाउन को गंभीरता से नहीं लिया तो होगी कड़ी कार्रवाई

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Published: 24 Mar 2020, 06:30 AM IST

  • पहले दिन लॉकडाउन को लोगों ने गंभीरता से नहीं लिया, सोशल मीडिया को सचमुच एक खेल का मैदान बन गया है।
  • हमारे प्रयास चीन से किसी तरह भी कम नहीं, वैश्विक महामारी घोषित होने से काफी पहले ही भारत ने तैयारी शुरू कर दी।
    कोई भी निजी अस्पताल गड़बड़ी की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा, हमने अधिकारियों को निगरानी का विशेष प्रशिक्षण भी दिया है।

 

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से आज दुनिया के दूसरे देशों के साथ ही भारत में भी अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। एक ओर लॉकडाउन किया जा रहा है तो दूसरी ओर मरीजों की पहचान और इलाज की चुनौती भी है। ऐसे में इससे संबंधित तमाम मुद्दों पर पत्रिका संवाददाता मुकेश केजरीवाल के सवालों का केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने विस्तार से जवाब दिया है। पेश हैं संपादित अंश-

प्रश्नः अंदाजा मुश्किल है कि कोरोना का खतरा कितना बढ़ सकता है। लेकिन हमारी तैयारियां कितनी हैं?

उत्तरः यह धीरे-धीरे विश्व के 186 देशों में फैल गया है और 23 मार्च तक कुल-मिलाकर 2,92,142 पुष्ट मामले सामने आये हैं। कुल 12,784 मौत हुई हैं। चीन समेत 77 देशों में मौतें हुई हैं।

लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 30 जनवरी को जब इसे वैश्विक महामारी घोषित किया उससे बहुत पहले 8 जनवरी को ही हमने अपनी तैयारियां शुरू कर दी थीं। इन तैयारियों की मदद से न केवल देशभर में इस रोग से बचाव को ले कर जागरूकता बढ़ी, अपितु राज्य सरकारों ने भी तैयारियों का काम तेजी से शुरू कर दिया।

प्रश्नः स्थानीय समुदाय के माध्यम से इसका प्रसार होने की स्थिति से निपटने के लिए हमारी क्या तैयारियां हैं?

उत्तरः सामुदायिक स्तर पर संक्रमण के प्रसार को कोविड-19 के फैलाव का तीसरा चरण कहते हैं। अभी कुछ राज्य इस रोग के फैलाव के पहले चरण में हैं और अधिकांश प्रभावित राज्य दूसरे चरण में हैं। भारत सरकार प्रयास कर रही है कि तीसरे चरण की स्थिति न बने, क्योंकि इस चरण में प्रवेश से हमारे समक्ष जटिल चुनौती उत्पन्न हो जाएगी।

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तीसरे चरण की स्थिति नहीं आए, ऐसा सुनिश्चित करने के लिए बार-बार ट्रैवल एडवाइजरी में बदलाव किए गए। इससे सक्रंमित विदेशी लोग भारत में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। 24 घंटे 7 दिन काम करने वाली हेल्पलाइन 011-23978046 की लाइनें बढ़ाईं और टोल फ्री राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1075 की शुरूआत की।

कुछ देशों ने देरी की जिससे उन्हें अब खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। हमारी तैयारियों के बारे में न तो संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व स्वास्थ्य संगठन को कोई शंका है और न ही कोई अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन ऐसा सोचता है।

प्रश्नः प्रभावित इलाकों के लॉकडाउन को ले कर क्या प्रतिक्रिया मिल रही है?

उत्तरः पिछले दो-तीन दिन से हमारा मंत्रालय भी इस कदम के बारे में चिंतन-मनन करता रहा है। आज से ही 22 राज्यों के लगभग 80 जिलों में लॉकडाउन लागू कर दिया गया है।

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लॉकडाउन के पहले दिन यह देखने को मिला कि जनता इसे गंभीरता से नहीं ले रही। इस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्य सरकारों से कहा कि वे लॉकडाउन को लागू कराने के कड़े निर्देश दें। कानून में यह व्यवस्था है कि जो इसका पालन नहीं करेगा उस पर कानून के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

प्रश्नः चीन ने इस बड़े खतरे को जिस तरह से निपटा, उससे क्या-क्या सीख ली जा सकती हैं?

उत्तरः हमारे प्रयास चीन के प्रयासों से कमजोर नहीं, बल्कि प्रभावशाली साबित हुए हैं। हमारे प्रयासों के बल पर देश में दो महीने से अधिक समय तक कोविड-19 के रोगियों के जीवन की रक्षा की गई।

आज की तिथि में कोरोना वायरस के 433 पुष्ट मामले हैं, जिनमें से 40 विदेशी हैं। 23 रोगी स्वस्थ होकर अपने घरों में चले गए हैं।

प्रश्नः जांच की सुविधा का बहुत कम उपयोग हो रहा है।

उत्तरः एनआइवी पुणे की देखरेख में 118 प्रयोगशालाओं में जांच की जा रही है। इसके अलावा, हमारे मंत्रालय ने 16 निजी प्रयोगशालाओं को भी जांच करने की अनुमति दी है। 19 मार्च से प्रतिदिन 10 हजार जांच की गयी जबकि 23 मार्च से 20 हजार जांच की जा रही है। प्रारंभ में थर्मोस्कैनिंग के बाद जरूरी समझे गए लोगों की जांच की गई। यह कहना सही नहीं है कि जांच के कम नमूने लिए जा रहे हैं।

प्रश्नः केंद्र सरकार के अपने ही दिशा-निर्देश के बावजूद अधिकांश मंत्रालयों में भी थर्मल स्कैनर अब तक उपयोग नहीं हो रहे हैं।

उत्तरः इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बड़ी संख्या में थर्मल स्कैनर से प्रारंभिक जांच की जा रही थी। अब मंत्रालयों में भी इसकी व्यवस्था शुरू कर दी गई है।

प्रश्नः भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले सामने आने के बाद से ही मास्क, सैनेटाइजर और बचाव के साधन गायब हो गए और कालाबाजारी होने लगी।

उत्तरः यह बार-बार स्पष्ट किया गया है कि मास्क लगाना आवश्यक नहीं है। संक्रमित व्यक्ति के लिए ऐसा करना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि उससे संक्रमण फैलता है। जहां तक कालाबाजारी की बात है उपभोक्ता कार्य मंत्रालय ने मास्क और सैनेटाइजर के मूल्य तय कर दिए हैं और राज्य सरकारें कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं।

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प्रश्नः आपने यह तो कहा कि मास्क की स्वस्थ्य लोगों को आवश्यकता नहीं। लेकिन इससे बचाव की दृष्टि से कुछ लाभ तो मिलता ही है।

उत्तरः जैसा कि मैंने कहा कि संक्रमित व्यक्ति के लिए मास्क लगाना अत्यंत आवश्यक है। मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि अधिक भीड़-भाड़ के समय स्वस्थ व्यक्ति भी अगर चाहे तो मास्क लगा सकता है क्योंकि भीड़ में संक्रमण के प्रसार की कुछ न कुछ आशंका बनी रहती है।

प्रश्नः ऐसे समय में भी डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी अपनी सेवा दे रहे हैं, ताकि लोग सुरक्षित रह सकें। उनकी सुरक्षा के लिए क्या उपाय अपनाए जा रहे हैं?

उत्तरः मंत्रालय डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा और उनके संक्रमित नहीं होने के लिए अनेक स्तर पर कई प्रयास कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों को सुरक्षित रखने के व्यावहारिक निर्देश दिए हैं।

प्रश्नः इसके इलाज और टीके को ले कर भारत में क्या प्रयास हो रहे हैं और उनसे क्या उम्मीद की जा सकती है?

उत्तरः मेरे पास स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी विभाग का भी कार्यभार है। हमने कोरोना वायरस पर काबू पाने के वैज्ञानिक समाधान के प्रस्ताव भेजने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय का विज्ञापन जारी किया है। बेहतर प्रस्ताव देने वाले को पुरस्कृत भी किया जाएगा। कोरोना वायरस के टीके को लेकर भारत में अनुसंधान चल रहा है। यह एक लंबी प्रक्रिया है और ठोस समाधान मिलने के बाद भी पशुओं पर ट्रायल के उपरांत इंसानों पर भी ट्रायल किया जाता है।

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प्रश्नः जयपुर के अस्पताल में इसके मरीजों के इलाज के लिए एंटी एचआइवी दवा देने का जो तरीका अपनाया गया, उसको ले कर कितनी उम्मीद है?

उत्तरः एंटी एचआईवी दवा देना या पैरासिटामोल का प्रयोग करना एक हिट एंड ट्रायल जैसा प्रयास है। कुछ मामलों में इन दवाओं के इस्तेमाल से रोगियों को कुछ फायदा हुआ है लेकिन इसे प्रामाणिक नहीं माना जा सकता।

प्रश्नः प्राइवेट लैब की ओर से वसूली जाने वाली कीमत पर कैसे नियंत्रण किया जाएगा?

उत्तरः निजी प्रयोगशालाओं की ओर से जांच के दिशा-निर्देश भी तय कर दिए गए हैं। इन दिशा-निर्देशों में जांच का शुल्क भी तय किया गया है

प्रश्नः प्राइवेट अस्पतालों में इसके इलाज पर सरकार कैसे नजर रखेगी ताकि मरीजों के साथ मनमानी नहीं हो?

उत्तरः स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय और अन्य संगठनों को वृहद अधिकार दिए गए हैं कि वे निजी अस्पतालों में सरकार के दिशा-निर्देशों के पालन पर पूरी नजर रखें। उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई करें। कोई भी निजी अस्पताल गड़बड़ी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा। हमने अपने अधिकारियों को निगरानी रखने का विशेष प्रशिक्षण भी दिया है।

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प्रश्नः केंद्र सरकार की ओर से इस मामले पर विभिन्न एजेंसियों, मंत्रालयों आदि के बीच समन्वय के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई है?

उत्तरः मेरे मंत्रालय ने कोरोना वायरस पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकारों की तैयारियों और उनके प्रयासों के प्रभाव की समीक्षा के लिए कुल 30 संयुक्त सचिवों और अपर सचिवों को संबंधित राज्यों में कुछ दिन के लिए तैनात किया था। उनकी समीक्षा और अध्ययन से पता चला कि केन्द्र और राज्य सरकारों तथा संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल है।

अब निजी प्रयोगशालाओं को जांच की अनुमति देते समय भी अधिकारियों तथा निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

प्रश्नः सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अपुष्ट जानकारियां साझा की जा रही हैं।

उत्तरः सोशल मीडिया सचमुच एक ऐसा खेल का मैदान बन गया है जिसमें कोई भी बल्लेबाजी और गेंदबाजी लगातार करने को तैयार रहता है। आयुर्वेद, होम्योपैथी और योग से गंभीर रोगों के दुष्प्रभाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। लेकिन नई चुनौती बनकर उभरे रोग को लेकर ये स्वास्थ्य प्रणालियां अभी शायद सक्षम नहीं दिखतीं। रोगियों से भी अपील की जाती है कि वे सरकारी सुविधाओं और प्रयासों का लाभ उठाएं ताकि किसी के जीवन को क्षति न पहुंचे। सरकार लोगों को आगाह करती है कि वे झोलाझाप चिकित्सकों से दूर रहें।

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प्रश्नः ऐसे खतरों को देख हम स्वास्थ्य ढांचे में क्या दीर्घकालिक बदलाव लाएंगे?

उत्तरः आज की चुनौती को देखते हुए, हमने राज्यों में एक-एक कोरोना वायरस विशेष अस्पताल तत्काल प्रभावी बनाने का काम शुरू कर दिया है। इसके अलावा, हमने पी.एम.एस.एस.वाय (PMSSY) के अंतर्गत राज्यों में बने अस्पतालों में 50-50 बिस्तर कोरोना वायरस के रोगियों के लिए शीघ्र उपलब्ध कराने का काम तेजी से शुरू कर दिया है।

प्रश्नः अब भी विदेशों में बड़ी संख्या में भारतीय फंसे हैं। उनको वापस लाने के लिए क्या उपाय किए जाएंगे?

उत्तरः हमें देश में कोरोना वायरस के संक्रमित लोगों की चिंता थी, तो साथ में यह भी चिंता थी कि विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों को किस तरह वापस लाया जा सके। हमने लगभग 2000 लोगों को विदेशों से निकाला, जिनमें से 48 विदेशी हैं।