सावन में कालसर्प दोष मुक्ति के लिए बढ़ी इन सांपों की डिमांड, कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश

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Published: 01 Aug 2021, 09:55 AM IST

Sawan में मेरठ के गांवों में रहने वाले सपेरे मांगते हैं मुंहमांगी कीमत। कालसर्प दोष और अन्य दोषों में सांप खरीदकर जंगल में छोड़ते हैं लोग।

मेरठ। सावन (Sawan 2021) का महीना भगवान शिव (Shiv Puja) की अराधना का होता है। इस एक महीने में की जाने वाली पूजा कई प्रकार के ग्रह नक्षत्रों के दोषों को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। सावन के महीने में काल सर्प दोष (kaal sarp dosh) और राहु-केतु दोष को दूर करने वाली भी पूजाएं की जाती या करवाई जाती हैं। शास्त्रों में काल सर्प दोष को दूर करने के लिए विभिन्न प्रकार के सर्पों (Snakes) की पूजा का विधान बताया गया है। इन्हीं में से एक विधान है जिंदा सांप (Snake Puja) के साथ उसकी विधि-विधान से पूजा और फिर उसको जंगल में छोड़ देना। हालांकि कई लोग आज के समय में इसे अंधविश्वास भी कहते हैं। लेकिन सावन का महीना आते ही जिंदा सांपों की डिमांड काफी अधिक बढ़ जाती है। लोग गुपचुप तरीके से इन सांपों को खरीदते हैं फिर इनको जंगल में छ़ोड़ देते हैं।

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दरअसल, मेरठ में गढ रोड पर एक गांव और हस्तिनापुर ब्लाक में कई गांव ऐसे हैं जहां सपेरे निवास करते हैं। सांप को पकड़ने और उनकी प्रजातियों को पहचानने में माहिर ये सपेरे पंडित द्वारा बताए गए प्रजाति के सांप को पकड़ यजमान को सौंप देते हैं। लोग जीवित सांप के साथ पूजा—पाठ और अनुष्ठान करने के बाद जीवित सांप को जंगल में छोड़ देते हैं। उधर, गढ रोड स्थित गांव के रहने वाले एक सपेरे ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके पास सावन के शुरूआती दिनों से ही सांप खरीदने के लिए फोन आने शुरू हो जाते हैं। लेकिन जो उनके पास आता है और एडवांस देकर जाता है, उसी के लिए वे सांप की व्यवस्था करते हैं। उसने बताया कि दोमुंही सांप की कीमत 5 हजार रुपये और काले सांप की कीमत 10 से 11 हजार के बीच होती है।

पूजा में शामिल होने का खर्च होता है अलग

सपेरे ने बताया कि सांप से हर कोई डरता है, इसलिए जीवित सांप के साथ पूजा करवाने वाला व्यक्ति यही कहता है कि उस दौरान सपेरा साथ में हो। अगर किसी के साथ जाते हैं तो उसका खर्च अलग होता है। लाने ले जाने से छोड़ने और खाने तक का खर्च सब कुछ पूजा कराने वाले पर निर्भर होता है। एक और सपेरे सोनू ने बताया कि वह सावन के दिनों में करीब 10 दिन काफी व्यस्त रहता है। इस दौरान वह सांपों को पकड़ता है, पूजा करवाए जाने के दौरान उपस्थित रहता है और फिर जंगल में छुड़वाने का काम करवाता है। पिछले 5 साल से वह इस काम को कर रहा है।

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पूरी पड़ताल के बाद होता है मोलभाव

सोनू का कहना है कि इधर कुछ वर्षों से सांपों की तस्करी बढ़ी है। वन्य जीव अधिनियम के तहत सांपों की कुछ प्रजातियों के पकड़ने पर प्रतिबंध है। सांपों के खेल दिखाने पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है। इसलिए काफी सोच समझकर और पूरी पड़ताल कर मोलभाव करते हैं। वे मोबाइल पर इस तरह की कोई डिलिंग नहीं करते। जो उनके गांव आता है, उनसे बात करता है, उसको ही पूजा लिए मनमाफिक प्रजाति का सांप पूजा के लिए उपलब्ध कराते हैं।