सूखने लगे स्टाप डैम और कुएं, हैंडपंपों में से पानी की जगह फेंक रहे हवा

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Published: 11 Mar 2018, 11:12 AM IST

पानी को लेकर अभी से निर्मित होने लगे अकाल जैसे हालात, छतरपुर पंचायत के ग्रामीण बुनियादी सुविधा को तरसे, करेंगे सत्याग्रह

सारनी. छतरपुर पंचायत के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधा को तरस रहे हैं। पहुंच मार्ग, शिक्षा, स्वास्थ्य, जल और रोजगार की समस्या से पूरा गांव जूझ रहा है। पानी को लेकर पहली बार अकाल जैसे हालात निर्मित हो हैं। जनप्रतिनिधि और प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। मजबूरन ग्रामीण सत्याग्रह करने पर विवश हो रहे हैं। समाजसेवी सुनील सरियाम बताते हैं कि 4 हजार की आबादी वाली पंचायत की सुध लेने में प्रशासन द्वारा रुचि नहीं दिखाई जा रही है। यही वजह है कि पंचायत में आज तक डैम निर्माण नहीं हुआ। जबकि हमारी पंचायत अंतर्गत संचालित दो भूमिगत कोयला खदान से सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व प्राप्त होता है।

आनन-फानन में खनन कराए कुंए भी निकले सूखे -
पंचायत अंतर्गत 4 गांव हैं। केरिया, उमरी, छतरपुर और ढुमकाढाना। इन गांवों में करीब 35 हैंडपंप है। जिनमें से आधे पानी कम हवा ज्यादा छोड़ रहे हैं। वहीं गीदलढाना और सरपंच मोहल्ला के हैंडपंप बंद पड़े हैं। पंचायत में पानी की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। एक किलोमीटर दूर बरसाती तवा नदी है। इसमें जमा पानी भी काला पड़ गया है। पीने के उपयोग में नहीं लाया जा सकता। जलसंकट की आहट से आनन-फानन में नलजल योजना प्रारंभ करने खनन किए जा रहे कुंए भी सूखे निकल रहे हैं। इससे यह तो तय हो गया है कि इस गर्मी पानी को लेकर ग्रामीणों की परीक्षा की घड़ी है।

सूखने लगे स्टॉप डैम और कुंए
पंचायत अंतर्गत दो भूमिगत कोयला खदान होने से पहले से ही यहां का भू-जलस्तर सामान्य से कम है। अल्पवर्षा और गर्मी से मार्च माह में ही कुंए और स्टॉप डैम सूखने लगे हैं। संभावना व्यक्त की जा रही है कि मई-जून में सूखने वाले स्टॉप डैम और कुंए अप्रैल माह में ही सूख जाएंगे। पानी की वैकल्पिक व्यवस्था अभी से नहीं की गई तो हालात ऐसे निर्मित हो जाएंगे कि मवेशियों को पानी पिलाना तक मुश्किल हो जाएगा। यह कहना है पंचायत के पूर्व सरपंच कैलाश वरकड़े का। उन्होंने कहा कि पहली बार पानी के अकाल जैसे हालात निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि करीब 55 लाख रुपए की लागत से डैम निर्माण का एस्टीमेट तैयार हुआ था। फाइल भी कलेक्ट्रेट पहुंच गई है। बावजूद इसके निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। समय रहते पानी की व्यवस्था नहीं करने पर सत्याग्रह की चेतावनी देने वालों में पूर्व उपसरपंच दिलीप वरकड़े, बिजल सिंह सरियाम, शिवदीन सरियाम, मुकेश धुर्वे, मनोज, संजू समेत अन्य ग्रामीण शामिल है।

सिर्फ नाम का है गोदगांव -
पंचायत के पूर्व उपसरपंच दिलीप वरकड़े, मुकेश धुर्वे बताते हैं कि जिस तरह हम वर्षों से मूलभूत सुविधा को तरस रहे हैं। उससे यह तो स्पष्ट है कि हमारी पंचायत के गांव सिर्फ नाम के लिए वेकोलि के गोदगांव है। उन्होंने बताया कि जितना राजस्व हमारी पंचायत की भूमि से सरकार को प्राप्त होता है। उससे 10 प्रतिशत राशि भी पंचायत के गांवों पर खर्च की जाती तो आज हमारा गांव मॉडल गांव के रूप में पहचाना जाता। लेकिन डब्ल्यूसीएल ने भोले-भाले आदिवासियों की जमीन खोखली करने में ज्यादा रुचि ली और गांव के विकास करने में कम। यही वजह है कि 90 के दशक से पंचायत अंतर्गत दो भूमिगत कोयला खदान संचालित होने के बावजूद हमारे गांव बुनियादी सुविधा को तरस रहे हैं।