कच्चा तेल 10 रुपये महंगा हुआ तो डीजल और पेट्रोल पर भी बढ़े 10 रुपये

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Published: 23 Feb 2021, 11:40 AM IST

- यूपीए सरकार बनाम एनडीए सरकार: तब 112 डॉलर प्रति बैरल के समय पेट्रोल के भाव 65 रुपए थे, अब 63 डॉलर बैरल में 89 रुपए के पार मिल रहा पेट्रोल

नई दिल्ली। कच्चे तेल के साथ पेट्रोल-डीजल के भाव भी लगातार बढ़ते रहे हैं। अक्टूबर 2020 में क्रूड ऑयल 40.19 डॉलर प्रति बैरल था। तब भारत में 81.6 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल और 70.46 रुपए प्रति लीटर डीजल बेचा गया। वहीं, 22 फरवरी को क्रूड के दाम 63.48 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गए। 22 फरवरी को भारत में पेट्रोल 90.58 तथा डीजल 80.97 रुपए प्रति लीटर रहा। यानी सीधे 10 रुपये लीटर बढ़ा दिया गए।

तब और अब में अंतर-
वहीं इसी दौरान भारत में पेट्रोल के दामों में 7.71 और डीजल के दामों में 7.40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि जब 112 डॉलर प्रति बैरल का कच्चा तेल था, तब यूपीए सरकार पेट्रोल 65.76 रुपए में बेच रही थी, लेकिन अब जब यह 63 डॉलर यानी यूपीए की तुलना में 56 फीसदी से कम कीमत है, तब भी एनडीए सरकार पेट्रोल दिल्ली में 89 रुपए के आस-पास बेच रही है।

महानगरों में सोमवार को यह रही कीमत-
आइओसीएल के अनुसार, 22 फरवरी को दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में एक लीटर पेट्रोल और डीजल की कीमत इस प्रकार है।

यूपीए में 26 फीसदी बढ़ा क्रूड-
साल 2004 में यूपीए सरकार में कच्चे तेल की कीमतें 35 डॉलर प्रति बैरल ही थीं, लेकिन 2011-12 में यह 112 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई। यूपीए के दस साल के शासन में कच्चे तेल की कीमतों में तीन गुना से ज्यादा की बढ़त हुई, जबकि इस दौरान पेट्रोल के दाम में हर साल करीब 4 रुपए की बढ़त हुई और 2004 के 33 रुपए के मुकाबले पेट्रोल की कीमत बढ़कर 2014 में यह 71 रुपए के आस-पास पहुंच गई। पेट्रोल १२ फीसदी ही बढ़ा।

नेपाल से पेट्रोल-डीजल की तस्करी-
नेपाल में डीजल व पेट्रोल का दाम कम होने के कारण भारत-नेपाल बॉर्डर पर बसे इलाकों में गांवों के रास्ते डीजल व पेट्रोल की तस्करी की जा रही है। हालांकि बॉर्डर पर वाहनों की आवाजाही पर रोक है, लेकिन खुली सीमा होने के कारण ग्रामीण रास्ते से तस्करी का खेल चल रहा है। तस्कर साइकिल और बाइक पर गैलन में नेपाल से डीजल और पेट्रोल की तस्करी कर रहे हैं।