बच्चा वार्ड में गूंज रही बच्चों की कराहने की आवाज

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Published: 03 Aug 2021, 09:23 PM IST

नहीं मिल रहा इलाज, चिकित्सा के लिए नहीं मिल रहे डॉक्टर

मंडला. हर महीने जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए आने वाले बीमार बच्चो की संख्या हजारों में और चिकित्सक मात्र दो। इन दोनों चिकित्सकों पर ही जिला अस्पताल आने वाले सभी बीमार बच्चों का उपचार कराने का दायित्व है। इसके साथ जो बच्चे जिला अस्पताल के शिशु वार्ड में भर्ती किए जा रहे हैं, उनके इलाज की जिम्मेदारी भी इन्हीं चिकित्सकों पर है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह बच्चों का उपचार किया जाता है? गौरतलब है कि जिला अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञोंं के लिए सात पद रिक्त हैं और मात्र दो ही उपलब्ध हैं। और यह स्थिति एक दो महीनों से नहीं बल्कि पिछले कई वर्षों से बनी हुई है।
गौरतलब है कि एक ओर चिकित्सा विशेषज्ञ कोरोना की तीसरी लहर की संभावना जता चुके हैं। यह भी आशंका जताई जा रही है कि तीसरी लहर से बच्चों को बचाना अधिक जरूरी होगा क्योंकि तीसरी लहर का खतरा बच्चों पर तुलनात्मक रूप से अधिक पड़ सकता है। इससे बचने के लिए जिला अस्पताल में सभी भौतिक और तकनीकी संसाधन तो जुटाए जा रहे हैं लेकिन जो सबसे अधिक अनिवार्यता है वह हैं पर्याप्त चिकित्सकों की उपलब्धता। इसकी जिला अस्पताल में नितांत कमी बनी हुई है।
हर महीने सैकड़ों बच्चे भर्ती
यदि कोविड काल की चरम स्थिति मई 2021 के महीने को छोड़ दें जब पूरे जिले के निवासी लॉकडाउन के दौरान अपने अपने घरों में बंद थे। इस महीने के अलावा वर्ष 2021 के शेष सभी महीनों में अस्पताल में भर्ती किए गए बच्चों की संख्या सैकड़ों में थी। आंकड़े बता रहे हैं कि कोविड काल से पहले जनवरी, फरवरी और मार्च के महीने में जिला अस्पताल में उपचार के लिए तीन हजार से अधिक बच्चे लाए गए। कोविड काल के दौरान अप्रैल, मई और जून माह में इनकी संख्या कम हो गई। जुलाई में अस्पताल लाए गए बच्चों की संख्या लगभग डेढ़ हजार तक जा पहुंची।
ओपीडी में बच्चों की अधिकता रही यही कारण है कि स्वाभाविक रूप से जिला अस्पताल के शिशु वार्ड मे भर्ती किए जाने वाले बच्चो की संख्या भी सैकड़ों में रही। जनवरी 2021 से जुलाई 2021 में सर्वाधिक बच्चे जनवरी माह में भर्ती किए गए इनकी संख्या 200 रही।
तैयारी पर प्रश्नचिन्ह
अगस्त का महीना शुरू हो चुका है और विशेषज्ञों के अनुसार, सितंबर- अक्टूबर माह में कोरोना की तीसरी लहर की संभावना है ऐसे में मात्र दो चिकित्सकों के भरोसे जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले बच्चों का इलाज किस तरह से हो पाएगा? इस पर प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है। बच्चों के लिए बनाए गए कोविड केयर सेंटर में बच्चों का इलाज करने के जिम्मेदारी किन चिकित्सकों को दी जाएगी और जिला अस्पताल पहुंचने वाले बच्चों का इलाज कौन करेंगे। इस पर जिला का स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे बैठा है।