ऋण मुक्तेश्वर धाम को निखार रहा पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग

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Published: 02 Aug 2021, 11:46 AM IST

यहां स्थापित है ऋण से मुक्त करने वाले भोलेनाथ, दो मंजिला शिव मंदिर में विराजे हैं वर्षों पुराने शिवलिंग

मंडला. जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटद दूरी ग्राम खड़देवरी में भगवान भोलेनाथ का दो मंजिला मंदिर है। इस प्राचीन दार्शनिक स्थल को ऋण मुक्तेश्वर शिव मंदिर के नाम से पहजाना जाता है। देखरेख के अभाव में जीर्णशीर्ण हाल में पहुंच चुके शिव मंदिर को अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने विकसित करने की पहल शुरू कर दी है। वहीं भारतीय सांस्कृतिक निधी ने पौधरोपण कर सौंदर्यता बढ़ाने का कार्य किया है। जानकारी के अनुसार नर्मदा के उत्तरी तट पर ग्राम खड़देवरी में यह शिव मंदिर का नर्मदा पुराण में उल्लेख दिया हुआ है। कहते हैं कि 500 वर्ष पूर्व राजा हृदय शाह के द्वारा बनाया गया शिव मंदिर जो स्वयंशंभू माना गया है। भूमि स्थल से प्राप्त शिवलिंग जो कि पुराणिक मान्यताओं के आधार पर ऋणमुक्त करने वाला है। जिसे स्वयं शंभू कहा जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार हजारों वर्ष पुराना शिवलिंग है जो कि धरती के गर्भ से प्राप्त हुआ है। मंदिर बाद में बनाया गया है। इसलिए इसे स्वयं शंभू के नाम से जाना जाता है।

मंदिर दो भागों में बना हुआ है ऊपरी भाग में हाथ से बनी हुई प्रतिमाएं, दीवारों पर अंकित है। जिसमें लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश तथा हनुमान जी की प्रतिमा है। वहीं नीचे तल पर स्वयं शंभू ऋण मुक्तेश्वर भगवान का शिवलिंग स्थापित हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के द्वारा इस मंदिर को अधीनस्थ किया गया है। धीरे-धीरे विभाग के द्वारा इसका संरक्षण तथा विकास किया जा रहा है। मान्यता है कि इस मंदिर में कोई भी श्रद्धालु अपनी बीमारी लाचारी को दूर करने के लिए मांग करने आते हैं तो स्वयं शंभू भगवान उसकी मांग की पूर्ति करते हैं लेकिन कपट भावना से कोई व्यक्ति मांग करने आता है तो वह इस मंदिर पर नहीं पहुंच पाता। ऋण मुक्तेश्वर शिवमंदिर मंडला और रायपुर हाईवे रोड पर ग्राम खड़ देवरी ग्राम पंचायत पीपर पानी में बना हुआ है। जिसे गांव के अंदर से जाकर नर्मदा तट पर पहुंचना पड़ता है। आने वाले समय में यह मंदिर एक पर्यटन के हिसाब से दार्शनिक स्थल होगा जो कि लोगों का मनोरंजन का साधन बन सकेगा। नर्मदा परिक्रमा वासियों के लिए यह एक शुभस्थल है जहां पर ठहरने की व्यवस्था की मांग परिक्रमा वासी करते आ रहे हैं।


इनका कहना
ऋण मुक्तेश्वर मंदिर जीर्णोद्वार के बाद लोंगो के लिए आस्था केन्द्र बना हुआ है। जिले में न जाने ऐसे कितने प्रचीन काल के मंदिर बने हुए हैं जो आम जनता से दूर है। इसका कारण है कि मंदिरों की जानकारी लोंगो तक नहीं पहुंच पाती है। शासन-प्रशासन के साथ समाज के हर व्यक्ति का दायित्व है कि विरासत की रक्षा करे।
राजेश क्षत्री, शिक्षक
भारतीय सांस्कृतिक निधी के तत्वावधान में मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए फूल, नारियल, सुपाड़ी के पौधे लगाए गए हैं। आने वाले समय में और भी कार्य किए जाएंगे। पर्यटन की दृष्टि से क्षेत्र को विकसित किया जा रहा है। वहीं नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को भी इसका लाभ मिल सकेगा।
अरूण अग्रवाल, संयोजक, भारतीय सांस्कृति निधी