व्हाट्सएप जासूसी कांड: महज 9 सालों में करीब 7 मिलियन डॉलर से 1 बिलियन डॉलर का बन चुका है NSO ग्रुप

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Updated: 04 Nov 2019, 02:46 PM IST

  • 2010 में साइबर इंटेलीजेंस से जुड़ी NSO ग्रुप की हुई थी शुरुआत
  • 2014 में अमरीकन कंपनी ने खरीद लिए थे ग्रुप के सभी स्टेक
  • फरवरी 2019 में अमरीकन कंपनी से ग्रुप फाउंडर्स ने दोबारा खरीदे 60 फीसदी स्टेक
  • NSO ग्रुप की मदद से देश के करीब 121 लोगों के व्हाट्सएप चैट को खंगाला गया

नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से देश के सभी सोशल मीडिया प्लेफॉर्म पर नंबर वन ट्रेंडिंग टॉपिक व्हाट्सएप जासूसी कांड है। इस कांड के खुलासे के बाद रोजाना अपडेट आ रहे हैं कि केंद्र सरकार कितने लोगों के व्हाट्सएप पर नजर रख रही थी। इस पूरे मामले में इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप का नाम सामने आया है। बीते 24 से 36 घंटों में देश के लोग सिर्फ इस कंपनी के नाम को ही जान पाए हैं। अभी तक सरकार और बाकी किसी एजेंसी ने इस कंपनी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। जब पत्रिका ग्रुप ने इस कंपनी के बारे में पता लगाने की कोशिश की तो काफी चौंकाने वाली बातें और आंकड़े सामने आए हैं। आइए आपको भी बताते हैं कि इस इजरायली कंपनी के बारे में, जिसने भारत की सियासत में भूचाल ला दिया है...

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महज 9 साल पुरानी कंपनी
एनएएसओ ग्रुप जो आज दुनिया की नजरों में आया है वो करीब 9 साल पहले 2010 में एक स्टार्टअप के तौर पर शुरू हुआ था। इस कंपनी में एडी शाल्व की कंपनी वेंचर्स कैपिटल फंड जेनिसिस पार्टनर्स ने 1.8 मिलियन डॉलर का इंवेस्ट किया था। उस समय इस स्टार्टअप में कंपनी का स्टेक 30 फीसदी था। 1.8 मिलियन डॉलर को आधार मानकर चले तो 100 फीसदी इंवेस्टमेंट करीब 7 मिलियन डॉलर का होता है। इस कंपनी के फाउंडर मेंबर्स शाल्व हुलिओ, निव कार्मी और ओमरी लैवी थे। जिन्होंने इस कंपनी की नींव रखी थी। जिसके बाद इस कंपनी ने अपने काम और इंटेलीजेंस में काफी तरक्की की और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज यह कंपनी इजरायल की सबसे बड़ी इंटेलीजेंस प्रोवाइडर कंपनी है।

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लगातार बढ़ता रहा कंपनी का प्रोफिट
कंपनी के प्राॅफिट की बात करें तो लगातार इजाफा देखने को मिला है। 2013 में कंपनी का एनुअल रेवेन्यू 40 मिलियन डॉलर था। जो 2015 में बढ़कर 150 मिलियन डॉलर हो गया। वहीं कई देशों ने इस कंपनी की सेवाएं ली हैं। 2012 में मैक्सिको ने 20 मिलियन डॉलर का कांट्रैक्ट साइन किया था। 2015 में पनामा ने सरकार ने एनएसओ कंपनी से सर्विलेंस टेक्नोलॉजी खरीदी थी। आज भी कई प्रोजेक्ट्स में यह कंपनी काम कर रही है। वहीं दूसरी ओर कंपनी ने साइबर इंटेलीजेंस से रिलेटिड कई सॉफ्टवेयर भी तैयार किए हैं। जिनका इस्तेमाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को हैक करने के लिए किया जाता है। मौजूदा समय में पेगासस सॉफ्टवेयर काफी सुर्खियों में हैं।

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2014 में इस अमरीकन कंपनी के हाथों में आया था ग्रुप
एनएसओ ग्रुप का मालिकाना हक बदलता रहा है। बात 2014 की है जब कंपनी के फाउंडर ने इस ग्रुप को अमरीकन प्राइवेट इक्विटी फर्म फांसिसको पार्टनर्स को 130 मीलियन डॉलर्स में बेच दिया था। 2017 में फांसिसको पार्टनर्स ने इस कंपनी को निकालने के बारे में सोचा। उस कंपनी ने इस ग्रुप की कीमत 1 बिलियन डॉलर्स लगाई थी, लेकिन तब उन्हें इस ग्रुप का कोई खरीदार नहीं मिला। फरवरी 2019 में कंपनी के दो फाउंडर मेंबर्स इस कंपनी को दोबारा हासिल करने के लिए सामने आए। शाल्व हुलिओ और ओमरी लैवी ने नोवलपीना कैपिटल की मदद से इस कंपनी के 60 फीसदी स्टेक अपने नाम कर लिए। मौजूदा समय में आज कंपनी की मौजूदा वैल्यू 1 बिलियन से ज्यादा की है।

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भारत के साथ क्या हुआ विवाद
हाल ही में इस बात का खुलासा हुआ है कि इजरायली कंपनी हृस्ह्र ग्रुप के द्वारा पेगासस नाम के स्पाईवेयर से भारतीय लोगों को निशाना बनाया गया था। जिसमें पत्रकारों, वकील और नेताओं और बाकी हस्तियां शामिल हैं। इन लोगों की संख्या मौजूदा समय में 121 पहुंच गई है। ये मामला मई के महीने में हुआ था, लेकिन अब जब बात सामने आई है तो सरकार सभी के निशाने पर आ गई है। वहीं कंपनी से भी सवाल किए जा रहे हैं। वहीं कंपनी की ओर से सभी आरोपों का खंडन किया है। कंपनी का कहना है कि वो अपनी सर्विस सरकारी एजेंसियों को देती हैं।